लौटा दो

लौटा दो

मैं बैठी हूँ अपने द्वारे , अपनी लाठी के सहारे
आँखे बस रास्ता ताखती रहती है
बस वही सवाल पूछती है
मेरा कान्हा बता दो , मेरा बेटा लौटा दो ।
चार साल हो गये उस बात को
मेरे सूने पड़े हाथ को
वो उंगलिया लौटा दो , मेरा बेटा लौटा दो ।
नन्हा सा वो चलता था
मन को बहुत खिलता था
दिल को वो राहत लौटा दो , मेरा बेटा लौटा दो ।
स्कूल जाते मार खाता था
मेरा मन भी बहुत दुखाता था
वो आँखों की रौशनी लौटा दो, मेरा बेटा लौटा दो ।
माँ माँ चिल्ला कर पुकारता था
गुस्सा भी बहुत दिलाता था
वो गुस्सा लौटा दो , मेरा बेटा लौटा दो ।
परीक्षा का आखरी दिन था,
डॉक्टर बनने को वो पूरा निपुण था
वो ख़ुशी लौटा दो , मेरा बेटा लौटा दो ।
कहती थी में हर रोज
मत कर गाडी चलाते बात फ़ोन पर
वो मेरा चिल्लाना लौटा दो, मेरा बेटा लौटा दो ।
क्या सब ठीक हो जाएगा , क्या मेरा बेटा लौट आएगा,
गाडी चलाते केवल गाडी पर ध्यान दो
अपनी ज़िंदगी बचा लो , मेरा बेटा लौटा दो ।

-: अंशुल जैन :-

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