Hindi Poetry

विश्वगुरु भारत बदल गया है

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अब इस दुनिया में कितना कुछ बदल गया है
भारत भी ना जाने कैसा था कैसा बन गया है
अब फिर ये ख़ुद को दिला पाएगा वो महारत?
क्या.!! क्या पहले जैसा बन जाएगा भारत

धर्म के ठेकेदारों ने इसे क्षत विक्षत कर डाला है
शास्त्री और नेहरू ने तो इसे नाजों से पाला है
ये देश आज विकट परिस्थितियों में फस गया है
ना जाने इसके वासियों को क्या हो गया है
सब गुमसुम हैं, कुछ बुझे बुझे से रहते हैं
वो मस्ती भरी बातें भी तो अब कहां करते हैं
आज फ़िर से ये सारे फ़ूल मुरझाए हैं
परेशानीयों से भी तो बहुत घबराये हैं
ये तो ख़ैर तात्कालिक विपदा है
जिसका जो कुछ था वो अता है

अब हम लोग भी तो थोड़े हार गए हैं
विश्वगुरु भारत के सपने को निराधार मान गए है
उम्मीद छोड़ कर आशाओं में जी रहे हैं
प्रयास छोड़ कर धाराओं मे बह रहे हैं
शायद हम ख़ुद को विफल मान रहे हैं
ऐ ख़ुदा ये हम किस दुनिया में आ गए हैं

यहां के लोग तो इशारों में भी खेल सकते हैं
चाहे जीरो हो उसपे भी कई दिन बोल सकते हैं
यहाँ के ‘बोस’ ‘शेखर’ और ‘भगत’ निराले हैं
इनके जैसे और ना जाने कितने रखवाले हैं
ये वो हैं जो फ़ाँसी को झूला समझ झूल गये हैं
अपनी जवानी में ही इस धरती में झूम गए हैं

यहां विवेकानंद के रूप में विवेक और आनंद हुए हैं
‘लाला’ की तलवार पे ना जाने कितने शीश चढ़ गए हैं
और अभिनंदन का तो अभिवादन करने के लायक नहीं हूँ
जितना लिख रहा हूँ उसका भी तो सहायक नहीं हूँ
तो क्या अब यहीं थम जायेगा हमारा भारत
क्या अब पुनः विश्वगुरु बन पाएगा भारत
क्या मिल पायेगी फ़िर पहले जैसी शहादत

क्या पहले ज़ैसा बन जाएगा भारत
क्या पहले ज़ैसा बन जाएगा भारत….

जय हिंद

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

 

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About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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