विषय मैं निहारती

विषय मैं निहारती
वसुंधरा के पावन पथ पर मैं निहारती आम के पल्लव को
मैं समीर के झोंकों में मंत्रमुग्ध हो निहारती खग के कलरव को
मैं पावक की गर्माहट सेक कर मारुत के वेग को साधती
मैं आनंदमय हो निहारती जलधि के जल को।।

सूरज के उष्म को देख कर मैं निहारती शशि के शीतल को
मैं दसों दिशाओं का अभिवादन कर निहारती वन और उपवन को।।

मैं देखती मयूर का नृत्य
मैं देखती संसार का कृत्य
मैं निहारती गुलमोहर के तरुवर को।।

मैं देखती देवदार के बाग
मैं देखती वाद्ययंत्र का राग
मैं निहारती विशाल सागर को।।

हिमालय की वादियों का चिंतन कर मैं निहारती जीवन के उत्सव को
अम्बर के सानिध्य में मैं निहारती काल के गौरव को।।

©️Ankita Shrivastava Ayodhya Uttar Pradesh

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivast

करें क्या ???

News Updates

Leave a Reply

%d bloggers like this: