शर्मसार इंसानियत

ख़ून के आंसु रोया दिल, जब देख हुईं इंसानियत शर्मसार,
जब देखा उस लड़की की इज्ज़त लूट हुऐ वो हैवान फरार॥

नजरें भी झुक जाती, जब होता एक और निर्भया का निर्माण,
ना जाने कितनों को छोड़ देती देश की अदालत हर बार॥

अब सहा नहीं जाता हमसे नारी पर ऐसा अत्याचार,
दिन ब दिन वारदातें बढ़ रही अब कुछ तो करो देश की सरकार।

क्यों ख़ामोश बैठे हो, बांध कर तुम अपने हाथ,
बहन बेटियों की ना परवाह तुम्हे, तुम सब हुए इतने लाचार।।

शर्मसार इंसानियत

Shivam kumar
@Shivam.1076

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Entry No. THG019

Date: 27rd Oct 2020

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