शहीद,

धरती पीली, अम्बर नीला,
तुझको शीष झुकाऊं माँ।
तेरी ही माटी का मैं गुड्डा,
तुझपे जान लुटाऊं माँ।

जन्म दिया जिस माँ ने,
उसका भी कर्तव्य निभाऊं माँ।
आँख करे जो तिरछी तुझपे,
उसको चीर के आऊँ माँ।

तेरी आन की खातिर मैं,
शहीद भी हो जाऊं माँ।
लिपट कर आऊँ तिरंगा में,
तेरी मिट्टी से लिपट जाऊँ माँ।

गद्दारों को निकाल देश से,
चुनर तेरी धानी कर जाऊँ माँ।
आन , बान, शान है तू मेरी
कैसे तुझे भुलाऊं माँ।

पापी का नाश कर मैं
तेरी गंगा में नहाऊं माँ
बांध चलूं मैं कफ़न सर पे
दुश्मन से टकरा जाऊँ माँ

नमन करूँ शीष झुकाऊं
जान अर्पित कर जाऊँ माँ
तेरी ही माटी का मैं गुड्डा,
तुझपे जान लुटाऊं माँ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

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