Blog

‘सफर ‘

0 0
Read Time:40 Second

सफर, सूखी नदियां, बंजर पहाड़ ,बिन पत्तों के नंगे दरख़्त और बिना परिंदों का आसमान ।

कहते है हर सफ़र हसीं होता है

लेकिन मेरा मन विचलित है इस सफर में ।

माँ की दुआएं,पापा का विश्वास ,जेहन में कुछ कर दिखने का संकल्प, वैसे तो सब कुछ साथ है मेरे

लेकिन कमी है संकल्प में दृढ़ता की,

कमी है आत्मविश्वास की ।

मेरा मन विचलित है इस सफ़र में ।

written by:- sapan agrawal

insta handle :-sapan_writes

©सपन अग्रवाल

माँ तू ही सब कुछ हैं

Blog for Technical

About Post Author

sapan_agrawal

graduate in bio_science from university maharaja's college.jaipur now pursuing teachers training course . कुछ ख्वाहिशें मेरी, बर्फ के मकान सी। जैसे मस्जिद में गीता, मंदिर में कुर-आन सी ।
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Author

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

6 thoughts on “‘सफर ‘

  1. Mere Khtrnk & Pyaare &Best Writter in the World Love you bhiya😍😍❤❤❣❣😘😘😘😘💕💕keep Growing☝💪

Leave a Reply

%d bloggers like this: