सफर

‘सफर ‘

सफर, सूखी नदियां, बंजर पहाड़ ,बिन पत्तों के नंगे दरख़्त और बिना परिंदों का आसमान ।

कहते है हर सफ़र हसीं होता है

लेकिन मेरा मन विचलित है इस सफर में ।

माँ की दुआएं,पापा का विश्वास ,जेहन में कुछ कर दिखने का संकल्प, वैसे तो सब कुछ साथ है मेरे

लेकिन कमी है संकल्प में दृढ़ता की,

कमी है आत्मविश्वास की ।

मेरा मन विचलित है इस सफ़र में ।

written by:- sapan agrawal

insta handle :-sapan_writes

©सपन अग्रवाल

माँ तू ही सब कुछ हैं

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6 thoughts on “‘सफर ‘”

  1. Mere Khtrnk & Pyaare &Best Writter in the World Love you bhiya😍😍❤❤❣❣😘😘😘😘💕💕keep Growing☝💪

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