सबक

ये जो तुम हर व्यथा को
कल पर छोड़ देते हो न
ये तुम्हारे व्यस्त होने की निशानी नही अपितु
डर है
डर, आज का सामना करने का
डर, तुम्हारे घाव हरे होने का
डर , उस हर बात का जो तुम्हे पीछे खिंचती है
और हाँ…
डर इस बात का की तुम, तुम नही रहोगे
तो सबक लो और
व्यथाओं को खुद पर हावी मत होने दो व डरपोक मत बनो।
डर का सामना करना आखिरी उपाय है उससे भागना नही।

©️Anant_vishv

कोरोना के इस काल ने,
कितनो को निगल लिया,
जो महकते थे इस जहाँ में गुलाब बन,
उन्हें पल भर में नियति ने अपना कर लिया।
एहसास हुआ कुछ ऐसा ,
जीवन और मृत्यु के बीच अनियमितता का,
मौत और जीवन है दो पहलू इस सफर के।
परिंदा बैठ काया के घरौंदे में,
बस जपता रहता स्वांसों की माला।
जीवन की इस अनियमितता ने अब,
मुझको माया से बाहर निकाला।
दुनियाँ के क्षण भंगुर रिवाजो से दूर,
ले सबक जिन्दगी का सच्चा,
मैने मुझको मुझमें ढूंढ़ निकाला।

कविता जयेश पनोत

 

जनाज़े के राही सुबक-सुबक के चलते है,
जिन्दगीं के आखिरी लम्हों में धधक-धधक के जलते हैं….
की ‘सबक’ दूसरों के सफ़र से भी ले लिया करो यारों,
जो अकड़ में रहते हैं – वो तड़प-तड़प के ढलते हैं…
✍kabiryashhh✍

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