Hindi Poetry

सब गुलाम हैं…

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आज भी सब गुलाम हैं,
अपनी अपनी इच्छाओं के ,
आज भी यहाँ लोग भूखे प्यासे सड़को पर भटकते रहते हैं,
उनका पूरा दिन ओर रातें सड़को के फूटपाथ पर गुजराती हैं,
तो फिर कैसे कह दूं के समाज बदल रहा है……

आज भी यहाँ लड़कियां रात को अकेली बाहर नही निकल सकती,
आज भी उनके पसन्द के कपड़े पहनने पर रोक लगायी जाती हैं,
आज भी वो नारी उतना ही सहन करती है,
तो फिर कैसे कह दूं के समाज बदल रहा हैं……

आज भी यह जात-पात में भेदभाव होता हैं,
आज भी यहाँ मंदिर-मस्जिद को लेकर दंगे होते हैं,
आज भी न जाने कितने बेकसूर उन दंगो के शिकार हो जाते हैं,
तो फिर कैसे कह दूं के समाज बदल रहा हैं……

सन्नी रोहिला……

 

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Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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