सारी उम्र बीत गई…

सारी उम्र बीत गई...

कुछ भी नही मिला अब तक ।
अकेला था, अकेला हूँ,
कोई यार नही मिला अब तक ।
आवारा था, आवारा हूँ,,
कोई मंजिल… कोई मकाम नही मिला अब तक ।
जिन्दा था, जिन्दा हूँ,
पर जीने का सहारा ना मिला अब तक ।
सफ़र में था, सफ़र में हूँ,
एक अदद हमसफर नही मिला अब तक ।
पैसा है, शोहरत है… फ़िर भी बड़ा गरीब हूँ,
क्या करूँ… उसका प्यार नही मिला अब तक ।

 

By: सखा

Safar

सफ़र की कहानी

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