सफ़र की कहानी

सफ़र की कहानी

 

सफ़र सी चल रही है जिन्दगी–कोई तो आकर इसे थाम लो,
गुमनाम सा चल रहा हूँ इस शहर में–कोई तो आकर मेरा नाम लो…

की निकलता हूँ घर से– तो कई वादे मेरे साथ निकलते है,
सफ़र थोड़ा कठिन है मेरा– फ़िर भी मेरे साथ चलते हैं…
राह में अक्सर यूँ ठहर के– मैं हर बार सोच मे पड़ जाता हूँ,
देखता हूँ की हालात मेरे जमीर के–और फ़िर से राह मे निकल जाता हूँ…

ये जो सफ़र की समझाईश है– हर किसी की इसमे पैदाइश हैं,
जिन्दगीं-हुनर-पैसा-शोहरत ये सब सफ़र के हिस्से हैं– जिस महफिल में भी तुम जाओ सब जगह इसके किस्से हैं…

सफ़र सा चल रहा है ये शहर– ना जाने ये रुकेगा कब,
छांव में बैठा शक्स यही सोचे– की कड़ी धुप में कहां गये सब…

✍kabiryashhh✍

https://thehindiguruji.com/category/contents/poetry/

खिड़की से एक सुहावना सफ़र

Authors

Leave a Reply

%d bloggers like this: