हम बादशाह हमारी सल्तनत के

हम बादशाह हमारी सल्तनत के,क्यों रहे किसी के ख़ौफ़ में
तुम खूब करो सौदा भले,हाँ! सौदा हमारे ईमान का
मोल लगा न पाओगे,है रौब हमारा बख़ुब यहाँ
जो देखो हमारा ज़लज़ला,तुम त्राहि-त्राहि ख़ुद करो
इमां हमारा यूँ सस्ता नही,जो बोरे अशर्फियों से भरो
शागिर्द हमारे भी कम कहाँ,बस कहने पर ही मर मिटे
नही करना चाहते खर्च हम,वो क्यों इस दलदल में मरे
मोल लगाने जो आये है,है बेहतर उन सबके लिए
जो करना था वो कर लिया,तख़लिया! तख़लिया!

~ विश्वजीत सिंह राठौड़
~Insta:- anant vishv

हम बादशाह हमारी सल्तनत के

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