Hindi Poetry

ह्रदय की पीड़ा

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शहीदों के माँ के ह्रदय की पीड़ा गाना चाहती है,
बधिर हैं जो लोग उनको भी सुनाना चाहती है।
राजनीति की दिवारें देश खोखला कर रही,
आज कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

गलियों और चौबारों में जिनके आज ताले हैं,
जिन्होनें अपने घरो में देशद्रोहियों को पाले हैं।
आओ आज उसका अंजाम दिखाना चाहती है,
जड़ से मिटा देने का उनको एक बहाना चाहती है।।
आज कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

जो जाकर वापस फिर लौट पाया नहीं,
जो पुत्र है माँ भारती का है पराया नहीं।
लाल के कातिल को शूली पर चढ़ाना चाहती है,
हाँ उन्हें जड़ से मिटाने का एक बहाना चाहती है।।
मेरी कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।
कैसे रोकूं अगर वो चिल्लाना चाहती है,
देशद्रोही को मारने का एक बहाना चाहती है।
मेरी कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

शहीदों के माँ के ह्रदय की पीड़ा गाना चाहती है,

✍🏻 sakshee🙂
@_sakku_writes

From Footpath, The Warrior

मुस्कान

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About Post Author

Sachin Gupta

Law graduated in 2019, Practicing as an advocate in Delhi. Presently, I want to post my ideas.
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