एक वक़्त ऐसा भी…

elephant_thehindiguruji
Image Source: Google

युद्ध का बिगुल बज चुका है
अकल्पनीय मगर सत्य
सारी मानव जाति अपने बनाए
पिंजरे में है क़ैद बेबस
कभी सोचा न था
वक़्त का पहिया ऐसे धमेगा
हाँ कभी चाहा था
काश एक दिन के लिए ही सही
वक़्त ठहर जाए
ज़िंदगी की आपाधापी से सभी मुक्त हो
सारी दौड़ समाप्त हो
हर दिन एक जैसा हो
मगर इतना ना सोचा था
ये युद्ध प्रकृति का है
मानव के विरुद्ध
धरती-माँ ने किए है सारे मार्ग अवरुद्ध
आज बादल दिखने लगे है
पेड़-पोधे भी नाच-गा रहे है
पशु-पक्षी है हैरान
क्यूँ है ये इंसान परेशान
मानव ने सोचा था
अवतार पर एकधिकार क्या सिर्फ़ उसका है
नहीं, यहाँ सब को हक़ है बराबर
हे इंसान तू सुधर जा
अन्यथा कुछ भी हो सकता है
विकास की ये अंधी दौड़ तेरी
तुझे ही ले डूबेगी।

Written By: CA Sunita Agrawal

मंजिल एक रास्ते अनेक…

Image Source: Google

मंज़िल एक रास्ते अनेक
गुजरना है या गुजर जाना है

रिश्ता एक अंजाम अनेक
निभाना है या निकल जाना है

दोस्त एक दुश्मन अनेक
डरना है या डरा जाना है

परिवार एक रिश्तेदार अनेक
सुन्ना है या सुना जाना है

प्यार एक धोके अनेक
जीना है या मर जाना है

मजिल एक रास्ते अनेक
तुझे चलना है आगे बढ जाना है

Written by :-नितिन मंगल ( रूहानी मोहब्बतें)

मैं तुमसे बेहतर हूँ मगर….

मैं तुमसे बेहतर लिखता हूँ, पर जज्बात तुम्हारे अच्छे है
मैं तुमसे बेहतर दिखता हूँ, पर अड़ा तुम्हारी अच्छी है
मैं खुश हरदम रहता हूँ, पर मुस्कान तुम्हारी अच्छी है
मैं अपने उसूलों पर चलता हूँ,पर जिद तुम्हारी अच्छी है
मैं एक बेहतर शख्सियत हूँ,पर सीरत तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बहुत बहस करता हूँ, पर दलीले तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बेहतर गाता हूँ,पर धुन तुम्हारी अच्छी है
मैं जितना कुछ भी कहता हूं, पर हर बात तुम्हारी अच्छी है

Written by :- सखा

चाहे जो भी है तू…

Pic Credit: Google
चाहे जो भी है 
मेरा प्यार है तू
आँगन में चहकती चिड़िया है तू
बागों में महकती कालिया है तू
समुन्दर की उठती लहर है तू
लहरों की कतार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
मेरी रातों का महताब है तू 
मेरी सुबह का आफताब है तू
बादल से बरास्ता नीर है तू
पूजूं तुझे मेरा पीर है तू 
कश्ती में पतबार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
अपने पिता की मुस्कान है तू
अपनी माँ का सारा जहां है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू ।
हाथों का कंगन है तू
माथे प' चमकता चन्दन है तू।
मेरे हाथों की लकीर है तू
रहमत खुदा की औ' तकदीर है तू
मेरे लबों का रसपान है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू।।

©piyu_agrawal

तेरा इश्क़ ही तो है…

Pic Credit: Google
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो टपकता अश्क़ बन के
बहता मेरे तकिये तले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो रिझाता मुझे ख्वाब बन के,
पाकर जिसे मेरा दिल खिले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो तड़पाता मुझे याद बन के,
सोचकर जिसे मेरा दिन बने।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो महताब सा ठंडा,
निहार कर जिसे मेरी रात बने।
तेरा इश्क़ ही तो है
जिसकी दीवानगी ये दिल सहे,
यादों में जिसकी ये दिल रहे।
हाँ ,हाँ तेरा इश्क़ ही तो है।।

‘इंसान और धर्म’

Pic Credit: Google

मज़हबी ठेकेदारों ने बड़ा बवाल मचा रखा है
धर्म को धर्म नहीं,इल्जाम बना रखा है ।

न इंसान पैदा होते,न इंसानियत जन्म लेती अब
इंसान को हिन्दू और मुसलमान बना रखा है ।

भक्ति,आस्था,अध्यात्म कोई नहीं जानता यहाँ
बस दिखाने को पूजा और अजान बना रखा है ।

असल में बिरले ही मर्म समझते इनका
उनके लिए ही गीता और कुर-आन बना रखा है ।

बेवजह ही पत्थर पूजता है इंसान पत्थर दिल खुद है

फिर भी पूजने को धाम बना रखा है ।



written by:- sapan agrawal.

“आशियाना”

Pic Credit: Google

‘आशियाना ‘
कितना अच्छा होता न ,अगर सबके पास
अपना एक छोटा सा आशियाना होता
जिसमें माँ का ममता भरा आँचल,
और पापा का ढेर सारा दुलार होता ।
न कोई ताना,न कोई फटकार ।
माँ के हाथ का खाना ,
पापा की बनावटी धमकी
और कुछ अपनों का साथ होता ।
कितना अच्छा होता न,अगर सबके पास
अपना एक छोटा सा आशियाना होता ।

written by :- sapan agrawal

अब तक पेट न भरा तुम्हारा ?…

हजारों लाखों मजदूर, जो मज़े से बसों मे बैठे गपीया रहे, हसी मज़ाक कर रहे होते हैं, रिपोर्टर के पहुंचने पर रोनी सूरत बना लेते हैं, और तुरंत रटा हुआ जवाब सुना देते हैं,

“खाने को कुछ नहीं”… अबे ससुर तुम देश खा गए, पूरा देश का बजट तुम लोगों को ध्यान मे रखकर बनता है, अब तक पेट न भरा तुम्हारा?…

“तू चल ,न रुक”

एक राह।
तू राही….
तू चल, न रुक।
होगा क्षत-विक्षत बेशक़ तू,
तू चल, न रुक।
तू कर करम,कर प्रयास तू
होगा विफल,हो उठ खड़ा
तू चल न रुक।
न कर फिक्र अंजाम की ,न जिक्र कोई मुकाम का,
न कर कोई अगर मगर….न कर डगर की तू फ़िकर
गर करनी हो नौका पार तो क्या राह और क्या मंजर?
तू चल,न रुक।
गर पकड़ ही ली है राह तो सोचना क्या  सफर के बारे
रख धैर्य तू,न रह मौन तू,
तू चल,न रुक
रूह से जंग जीतने की तू जिदकर
तू जिद कर कुछ कर गुजरने की।
तू चल,न रुक।।
Written by :-Sapan Agrawal