शिक्षा

शिक्षा

शिक्षा का महत्त्व जब जान जाएगा।
तभी तो तू, इंसान कहलायेगा।
अच्छे, बुरे, समतल, समन्दर, तूफान से
लड़कर आगे बढ़ पायेगा।

नौकरी कर पैसा कमाना , शिक्षा का स्थान नही
ग़रीबों, यतीमों पे जुल्म ढाना, कोई उत्थान नही।

बिन शिक्षा के इंसान जानवर बन जाता है
हालात आये ऐसे, जानवर भी शिक्षित नज़र आता है।

मानव बुद्धिमान होकर, सब विनाश कर गया
देखते ही देखते देखो, कितना अवकाश कर गया।

कैसी शिक्षा, कैसा नीति, कैसा ये प्रावधान है
अपने औऱ ग़ैरों को मारे, भला कैसा इंसान है।

पोथी पढ़-पढ़ के, पंडित न हो जायेगा
पाप किया तो फल भी तू ही खायेगा।

शिक्षा से शिक्षित होकर कर तू उपकार
इस धरती पे जैसा करे मिले जीवन का सार
इस धरती पे जैसा करे मिले जीवन का सार

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

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गरीबग़रीबीदोस्तीNews

गरीब

गरीब

क़िस्मत गरीब की भी एक दिन खुदा बदल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,
क़िस्मत गरीब की भी,,,,,

(1) पूरी उम्र गुजारी रहकर के छप्पर छाते,,
राहें बनाई हमने नित महल हम बनाते,,
खुशियाँ मिले जहां बस कोई ऐसा पल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,

(2) रुपयों वाला आके हमकों ये भिक्षा देता,,
करनी पड़े गुलामी हमकों ये शिक्षा देता,,
दुखों का हो निवारण कोई तो हमकों हल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

(3) मर जाये यूँ ही एक दिन राहों में हम तड़पकर,,
फ़िर देख लेना आके तू भी तमाशा जी भर,,
सचिन खुदा के दर पर मुझे साथ लेके चल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
Insta id,, burning_tears_797

ग़रीबीझूठ और फरेब की दुनियादोस्तीNews

ग़रीबी

ग़रीबी

ग़रीबी

दुख और सुख के रास्ते है।
कोई न किसी के वास्ते हैं।
राहों में पड़े हैं पत्थर यहाँ,
ठोकर खाकर भी है चलना यहाँ।
जीत उसी की जो कर ले मुट्ठी में ज़माना
ज़िन्दगी एक ग़रीबी सफर है सुहाना।
कभी है हकीकत, कभी है फसाना।

बादल घिर आते हैं
खुशी गम में अपने पहचाने जाते है।
अमीरी और ग़रीबी के सिक्के है
किसी की किस्मत में तारे तो किसी के धक्के है
फिर भी झूम कर दिल गाये ये तराना
ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना।
कभी है हकीकत, कभी है फसाना।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, ig-writernilofar

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दोस्तीकुछ अंशपरिवारNews

झूठ और फरेब की दुनिया

झूठ और फरेब की दुनिया

झूठ और फरेब की दुनिया में,
इस रिश्ते में बस सच्चाई है,
तुम्हारे अंदर हजारो खामियां हो,
उसके लिए वो भी अच्छाई है।

बिना शर्तों पे दस्तकत किए ,
उसने सारी पूरी करके दिखाई हैं,
वक़्त से फर्क नहीं पड़ा उसे,
उसने हर हाल में यारी निभाई है।

बिना शर्तों के होता है,
मतलब बस एक दूसरे की खुशी से होता है,
और दोस्ती निभाने की शिद्दत है जिसमे,
उसके होते दिल कभी नहीं रोता है।

उसका होने से पहले कुंडली नहीं मिलाते ,
फिर भी रिश्ता उम्र भर निभाया जाता है,
रास्ते अलग हो जाए फिर भी,
जीत का ख्वाब साथ सजाया जाता है।

– अंजली कश्यप

झूठ और फरेब की दुनिया में

दोस्तीकुछ अंशपरिवार

News

दोस्ती

दोस्ती

दोस्ती की मिसाल हर युग में दी जाती है,
चाहे वो हो कृष्ण सुदामा की दोस्ती या,
हो दुर्योधन कर्ण की दोस्ती,
दोस्ती सिर्फ सुख में नहीं,
दुःख में भी साथ निभाती है,
राह गलत हो या सही ,
अंतिम साँस तक साथ निभाती है,
कर्ण जानकर भी अधर्मी दुर्योधन का साथ देते रहें,
अपने दोस्तीके ऋण को उतारने के लिए अपने प्राण तक अर्पित कर दिए,
कृष्ण ने अपने सखा सुदामा की दरिद्रता पल भर में दूर कर दी,
अर्जुन और कृष्ण जी एक दूसरे के सखा भी थे,
इसलिये हर पग पर कृष्ण ने अर्जुन रक्षा भी की और विजय के पथ का मार्ग दर्शन भी किया।
सच्चा दोस्त वही है जो अपने मित्र की भलाई के बारे में सर्वप्रथम सोचें,
और मित्र को उन्नति और विजय के मंज़िल तक पहुँचाये।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

कुछ अंशपरिवारऐसा परिवार अब कहाँ

News

कुछ अंश

कुछ अंश

कुछ अंश

🌹किसी से बातचीत🍂🍃 के दौरान बातों के कुछ अंश🌹

उसने कहा वो🍂🍃 लोग भी अच्छे हैं,,

मैंने कहा,,,,,

मुझको तुम बुरे भी अच्छे लगते हो,,
झूठ बोलते हो मगर सच्चे लगते हो,,

माना खिले हैं सैंकड़ों फूल शाखों पर,,
मगर मुझमें उलझे तुम गुच्छे लगते हो,,

मुझको सारे जहाँ से क्या लेना देना,,
उन सच्चों में मुझे तुम सच्चे लगते हो,,

दुनिया कहती है बड़े चालबाज हो,,
मगर मुझे तुम नादान बच्चे लगते हो,,

मुझे तुमने तोड़ा बड़ी होशियारी से,,
पर सचिन तुम अक्ल के कच्चे लगते हो,,

कुछ अंश

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
Insta id, burning_tears_797

मेरी स्वंयरचित🍂🍃 एक रचना

परिवारऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्ब

News Updates

परिवार

परिवार

हां वो ही परिवार था

आंखें खुली थी मध्दम-मध्दम,
मध्दम उंगली हिलती थी
दो जने घर में दिखते, जो मेरा संसार था।

कुछ बड़ा हुआ, कुछ होश लिया कभी जगता था,

कभी सो लिया ना दिल पर कोई वार था ।

कुछ और बढ़ा, चलना सीखा गिरते पड़ते, बढ़ना सीखा
गिरने से मेरे जो अक्सर, गिरता कई – कई बार था।

स्कूटर से स्कूल में जाना
मां की गोद में वापस आना
आकर घर में उधम मचाना, ही खुशियों का सार था।

वो कॉलेज के दिनों की मस्ती
कोई फिकर ना दिल में बसती
पिता के ही कंधों पर तब तो घर का सारा भार था।

वो पहली जॉब की खुशी मनाना
वीकेंड्स में घूमने जाना
जीता हुआ महसूस कराया,
ना लगा कभी मुझे हार था।
हां वो ही परिवार था

NAMAN KUMAAR JAIN
@ naman9203

ऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्बकाल का चक्रव्यूहNews

ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

वो भी क्या ज़माना था।
एंटीना चारों तरफ घुमाना था।
छत पे चढ़कर, बाबा चिल्लाते थे
ठीक हुआ या नही, दोहराते थे
हम भी चिल्ला – चिल्ला कर
हाँ या नही बताते थे।
महाभारत, श्रीकृष्ण और चित्रहार
था एक टिवी पर लगता था देख रहा पूरा संसार
दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची या मामा-मामी
देखते थे सब एक साथ रंगोली या मोगली

वक़्त क्या ऐसा बदला बदल गयी सब तस्वीर
फ़िज़ा बदली घर बदला बदल गयी तक़दीर
रिमोट के झगड़े भाई-बहन के बीच सिमट गई
वक़्त के हाथों, फूल सारे एक गमले में लिपट गयी
हम-तुम और टीवी ही घर में रह गए
जो थे रिश्ते सारे वो कहीं बह गए

जो दिल चाहिए हर पल सब टीवी पे मिल जाता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है

ऐसा परिवार अब कहाँ

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

कुटुम्बकाल का चक्रव्यूहघर की चौखटNews

कुटुम्ब

कुटुम्ब

मैं फिर उस कुटुम्ब की कामना करती हूँ
जहाँ मेरी माँ परियों वाली कहानी सुनाकर सुलाती थीं
जहाँ दादी उंगली पकड़कर पार्क में घुमाती थीं
जहाँ पापा जी मेरे कारण सर्वस्व समर्पण करते थे
जहाँ दादा जी हँसते हुए सब कुछ अर्पण करते थे
जहाँ कंधे पर बैठ कर मेले देखे जाते थे
जहाँ झोले में सामान खरीदे जाते थे
जहाँ मिट्टी के बर्तन में पकवान बनते थे
जहाँ उचित बात बोल कर सही इंसान बनते थे।।
मैं उस कुटुम्ब की कामना करती हूँ
जहाँ पुराने लोग मिल जुल कर रहते थे
जहाँ चचेरे ममेरे में फर्क नहीं करते थे
जहाँ प्रतिदिन त्योहार मनाया जाता था
जहाँ परमात्मा को अर्पित कर अन्न खाया जाता था
जहाँ भाई बहन में कोई अंतर नहीं होता था
जहाँ प्रयास करने पर समांतर नहीं होता था
जहाँ संयुक्ता एक ही होती थी
निपुणता एक ही होती थी।।

काश मैं भी वही कुटुम्ब बनाऊँ कि फिर आज मैं अपने कुटुम्बका गुण गाउँ।।

©️Ankita Virendra Shrivastava

काल का चक्रव्यूहघर की चौखटमैं समय हूंNews

काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह
बचपन के मासूमियत में कैसा उतावलापन आया
काल का सार मुझमें ऐसा समाया
समय बदल गया और मैं रोना भूल गया
एक समय आया जब मेरा बचपन शरारत भरा साथ पाया
मेरे साथ रहा मेरे माता पिता का साया
लगा जैसे शैतानियों का हुज़ूम मुझमें समाया
रेत की तरह समय बीत गया
मैं युवा हुआ और मिला काम का रीत गया
जीवन के चक्रव्यूह में समय का काल था
युवावस्था में जिम्मेदारियों का मायाजाल था
माहौल था बुरी संगतों का बुरी विपदाओं का आगाज़ था
वक्त बीता यौवन का वो आपदाओं का रिवाज़ था
अब वृद्ध हो चला हूँ उन्नति के पथ पर
अब पीछे एक ज़माना है
अब पीढ़ियों को लिखा पढ़ा कर पंचतत्व में विलीन हो जाना है।।

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivas

घर की चौखटमैं समय हूंविषय शून्यNews