परिवार

परिवार

हां वो ही परिवार था

आंखें खुली थी मध्दम-मध्दम,
मध्दम उंगली हिलती थी
दो जने घर में दिखते, जो मेरा संसार था।

कुछ बड़ा हुआ, कुछ होश लिया कभी जगता था,

कभी सो लिया ना दिल पर कोई वार था ।

कुछ और बढ़ा, चलना सीखा गिरते पड़ते, बढ़ना सीखा
गिरने से मेरे जो अक्सर, गिरता कई – कई बार था।

स्कूटर से स्कूल में जाना
मां की गोद में वापस आना
आकर घर में उधम मचाना, ही खुशियों का सार था।

वो कॉलेज के दिनों की मस्ती
कोई फिकर ना दिल में बसती
पिता के ही कंधों पर तब तो घर का सारा भार था।

वो पहली जॉब की खुशी मनाना
वीकेंड्स में घूमने जाना
जीता हुआ महसूस कराया,
ना लगा कभी मुझे हार था।
हां वो ही परिवार था

NAMAN KUMAAR JAIN
@ naman9203

ऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्बकाल का चक्रव्यूहNews

आईना

आईना

आईना

तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं
तेरी सांसे न कर सकी वफ़ा, जिनसे मैंने कुछ भी छिपाया नहीं
हां तेरी यादें हुई वो आइना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं
यादों का असर कुछ ऐसा हुआ, मैंने खुद को कभी खुद में पाया नहीं।
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।

मेरे मन में समाया, मेरे दिल में समाया, नस-नस में समाया सा रहता है तू ,
कुछ तुमने कहा कुछ हमने सुना, हर पल बस सच सा ही कहता है तू ,
हां तू है वही जिसने बदली मेरी मंज़िल, मगर रस्ता है वही,
अब ना है मुझे कुछ तेरी ख़बर, और है तेरा कोई साया नहीं,
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।

जिस तरह से जुड़ा था यह तुझसे मेरा दिल , मैंने कभी ना सच को है जाना,
ना चाहत बची थी झुका था ज़माना, बस सपना था एक मुझे तुझमें समाना,
अब आया ये ज़िगर, तुझपे ओ हमसफ़र, कहीं और मुझे अब तो जाना नहीं,
मुझे तो बदला है तूने बेखबर, पर खुद को बदल तू पाया नहीं,
तेरी यादें हुई वो आईना, जिसने कभी सच को दिखाया नहीं ।।

Naman Jain
@ naman9203

पृथ्वी माँकचरे का अंबारमेरी डायरीNews Updates

 

विचार

विचार

हर सपना सच कर जाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।
जो चाहोगे पाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।

कर भरोसा कर्मों का जो आगे बढ़ता जाता है,
मील का पत्थर धीरे-धीरे विस्तृत होता जाता है,
ना देना तुम कष्ट किसी को सभी की तुम पीड़ा हरना,
हर दिल खुश हो जाएगा, बस प्यार को तुम हथियार बना लो।
जो चाहोगे पाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।
हर सपना सच कर जाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।

इच्छाओं पर काबू रखना, रस्ते फिर हाथ मिलाते हैं,
दौड़ के हर एक मोड़ हमारी मंज़िल पास में लाते हैं,
एहसास सदा परिवर्तन का हो, हो खुद पर विश्वास सदा,
तुम बोलो जग सुने तुम्हारी, ऐसी इक पहचान बना लो।
जो चाहोगे पाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।
हर सपना सच कर जाओगे, बस मन में एक विचार बना लो।

Naman Kumar Jain
@naman9203

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