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The Hindi Guruji

Author: sapan_agrawal Page 1 of 2

graduate in bio_science from university maharaja's college.jaipur
now pursuing teachers training course .
कुछ ख्वाहिशें मेरी, बर्फ के मकान सी।
जैसे मस्जिद में गीता, मंदिर में कुर-आन सी ।

STOP CHILD ABORTION

STOP CHILD ABORTION

STOP CHILD ABORTION,

वंश की उत्तराधिकारिता की रक्षा हेतु सदियों पूर्व
एक स्त्री के मातृत्व की परीक्षा एवं स्वामिभक्तिता के परिचय को इतिहास के पन्नों में गर्व से संकलित किया गया ,जो कि स्वाभाविक है
लेकिन आज की स्त्री (स्त्री जाति) भी अपने वंश के रक्षार्थ (सामाजिक परम्पराओं के अनुसार)
अपने मातृत्व की परीक्षा देती है
और कुछ इस तरह ही वो अपने ही खून का खून कर देती है और इस खून में संलिप्त होते है कई परिवारों के हाथ ,लेकिन दोषी सिर्फ माँ को ठहराया जाता है ।
धाय माँ आज भी पैदा होती हैं किन्तु
वो पन्ना धाय नहीं होती है ,जिसने वंश रक्षार्थ हेतु
स्वामिभक्तिता का परिचय दिया ।
आज की धाय माँ बलिदान तो देती है
किन्तु इस तरह जो वर्तमान समय के मानकों में अपराध है ।

©सपन अग्रवाल

Bachpan (In Indian Language)

नींदिया परी

माँ

Dear Mummy

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STOP CHILD ABORTION

कुछ ख्वाहिशें

कुछ ख्वाहिशें

कुछ ख्वाहिशें मेरी बर्फ के मकान सी
जैसे मस्जिद में गीता ,मंदिर में कुर-आन सी ।
ख्वाहिश फिर से रोने की,
माँ की गोदी सोने की।
ख्वाहिश ऐसी कि
बन बच्चा किलोल करता फिरूँ,
पापा की पीठ की सवारी करूँ।
दिल करता है यारों के संग,
बेफिक्री से विचरण करूँ।
ख्वाहिश कुछ कर दिखाने की,
बन परिंदा आसमान छू जाने की,
दरख्तों पर घर बनाने की,
ख्वाहिश ऊंचा उड़ जाने की
अधूरी है।
बात दिल की अधूरी है
बिन तेरे न दिन पूरा ,रात भी अधूरी है
तेरे मेरे बीच जो ये फांसला, ये जो दूरी है
मृग ढूंढ़ता कानन में,वो कस्तूरी है
तेरा आलिंगनी पीयूष पिउँ
मर रहा रोज ,जी करता फिर से जिऊँ
जो ये मेरी ख्वाहिश है न? वो अधूरी है ।
हो मुकम्मल ये ख्वाहिशें मेरी
कौनसा ये जरुरी है।
लाचारी ,बेवशी, हालात,परिस्तिथियां लाजमी है
जिंदगी में ।
अधूरी ख्वाहिशों की इक वजह मजबूरी भी है ।।
©सपन अग्रवाल

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Mother

माँ

अरसा हो गया उसके हाथ से निवाला खाये हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान ऐसी जवानी
उस ममता के लिए।
वर्षों हो गए उसकी गोद में सोए हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान सही जवानी
उस ममता के लिए
काश लौटा दे कोई वो बचपन और माँ का ढेर सारा प्यार ,
ऐसी सैकड़ों जवानी कुर्बान
उस ममता के लिए।
©sapan agrawal

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जिंदगी एक गीत है

जिंदगी एक गीत है

जिंदगी एक गीत है
जिसे गुनगुना तो हर कोई रहा है
लेकिन शायद अपनी ही धुन में ।
एक ओर
जो इसे बिना लय और ताल के ,बेतरतीब ढंग से
उतार चढ़ाव से बेसुध हो लापरवाहों की तरह गा रहा है
दर-असल वो जिंदगी जी रहा है।
वहीँ दूसरी ओर
जो मुखड़े और अंतरे को बराबर ध्यान
में रखते हुए पंक्तियों को लयबद्धता से
उतार चढ़ाव के साथ सुर में सुर मिला कर गा रहा है न
वो दर-असल इस गीत को समझ पा रहा है
जिंदगी के मर्म को असली मायनों में समझ पा रहा है
जिसकी उड़ान अनंत है।
भ्रमित वो है जो सुन तो सब कुछ रहा है लेकिन वो न तो इस गीत को गा पा रहा और न ही गुनगुना पा रहा।
वो फंसा हुआ है सही और गलत के द्वन्द्व में ।
वो फंसा हुआ है “जिंदगी को समझा जाये या फिर जिया जाये” के बीच में ।।
मुखड़ा -अंतरा ,उतार-चढ़ाव, लय-ताल
सुर ये सब गीत रूपी जिंदगी के आडंबर ,सुख-दुःख
गम और खुशियां ,अनुभव और मजबूरियां हैं ।
जो इनके साथ सामंजस्य बिठा लेगा सच्चे अर्थों में वही इस गीत को अच्छे से सुन, सुना पायेगा ।
©सपन अग्रवाल

 

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शायरों का अस्तित्व…

sayar_sapan_thehindiguruji

अगर मोहब्बत नाम के मजहब का अस्तित्व होता
तो शायद इस दुनिया में शायरों का अस्तित्व न होता
और न ही मोहब्बत इतनी खूबसूरत होती ।
©सपन अग्रवाल

चाहे जो भी है तू…

Pic Credit: Google

चाहे जो भी है 
मेरा प्यार है तू
आँगन में चहकती चिड़िया है तू
बागों में महकती कालिया है तू
समुन्दर की उठती लहर है तू
लहरों की कतार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
मेरी रातों का महताब है तू 
मेरी सुबह का आफताब है तू
बादल से बरास्ता नीर है तू
पूजूं तुझे मेरा पीर है तू 
कश्ती में पतबार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
अपने पिता की मुस्कान है तू
अपनी माँ का सारा जहां है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू ।
हाथों का कंगन है तू
माथे प' चमकता चन्दन है तू।
मेरे हाथों की लकीर है तू
रहमत खुदा की औ' तकदीर है तू
मेरे लबों का रसपान है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू।।

©piyu_agrawal

तेरा इश्क़ ही तो है…

Pic Credit: Google

तेरा इश्क़ ही तो है,
जो टपकता अश्क़ बन के
बहता मेरे तकिये तले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो रिझाता मुझे ख्वाब बन के,
पाकर जिसे मेरा दिल खिले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो तड़पाता मुझे याद बन के,
सोचकर जिसे मेरा दिन बने।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो महताब सा ठंडा,
निहार कर जिसे मेरी रात बने।
तेरा इश्क़ ही तो है
जिसकी दीवानगी ये दिल सहे,
यादों में जिसकी ये दिल रहे।
हाँ ,हाँ तेरा इश्क़ ही तो है।।

‘इंसान और धर्म’

Pic Credit: Google

मज़हबी ठेकेदारों ने बड़ा बवाल मचा रखा है
धर्म को धर्म नहीं,इल्जाम बना रखा है ।

न इंसान पैदा होते,न इंसानियत जन्म लेती अब
इंसान को हिन्दू और मुसलमान बना रखा है ।

भक्ति,आस्था,अध्यात्म कोई नहीं जानता यहाँ
बस दिखाने को पूजा और अजान बना रखा है ।

असल में बिरले ही मर्म समझते इनका
उनके लिए ही गीता और कुर-आन बना रखा है ।

बेवजह ही पत्थर पूजता है इंसान पत्थर दिल खुद है

फिर भी पूजने को धाम बना रखा है ।



written by:- sapan agrawal.

“आशियाना”

Pic Credit: Google

‘आशियाना ‘
कितना अच्छा होता न ,अगर सबके पास
अपना एक छोटा सा आशियाना होता
जिसमें माँ का ममता भरा आँचल,
और पापा का ढेर सारा दुलार होता ।
न कोई ताना,न कोई फटकार ।
माँ के हाथ का खाना ,
पापा की बनावटी धमकी
और कुछ अपनों का साथ होता ।
कितना अच्छा होता न,अगर सबके पास
अपना एक छोटा सा आशियाना होता ।

written by :- sapan agrawal

“तू चल ,न रुक”

एक राह।
तू राही….
तू चल, न रुक।
होगा क्षत-विक्षत बेशक़ तू,
तू चल, न रुक।
तू कर करम,कर प्रयास तू
होगा विफल,हो उठ खड़ा
तू चल न रुक।
न कर फिक्र अंजाम की ,न जिक्र कोई मुकाम का,
न कर कोई अगर मगर….न कर डगर की तू फ़िकर
गर करनी हो नौका पार तो क्या राह और क्या मंजर?
तू चल,न रुक।
गर पकड़ ही ली है राह तो सोचना क्या  सफर के बारे
रख धैर्य तू,न रह मौन तू,
तू चल,न रुक
रूह से जंग जीतने की तू जिदकर
तू जिद कर कुछ कर गुजरने की।
तू चल,न रुक।।
Written by :-Sapan Agrawal

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