नारी की इज्जत करने वाला इंसान ही भगवान है

नारी की इज्जत करने वाला इंसान ही भगवान है ।

मसला कुछ यूं है
इलाज करती थी जानवरों का मगर एक बात से अनजान थीं…
जानवर तो सारे सुधर गये,
सुधर ना पायीं गिरीं “सोच” इंसान की।
शेर,चीता,सियार भेड़िया तो नाम के रह गए,
असल में जानवर तो आज इंसान है।
नारी की इज्जत करने वाला इंसान ही भगवान हैं।

अंधविश्वास में तुम भी हो,
सब असलियत से अनजान हैं,
दो दिन बंद रहेगा भारत,
झूठा ये सम्मान हैं,
इतना कुछ हो गया,
अब तो बंद करो ये कहना,
के सबका रखवाला भगवान हैं।
असल में
नारी की इज्जत करने वाला इंसान ही भगवान हैं।

ईश्वर से विश्वास उठ गया अब मेरा
दिन-व-दिन दरिंदगी का माहौल है।
सुना हैं कि सबकी क़िस्मत ऊपरवाला लिखता हैं
फिर जिस्म सर-ए-बाजार
क्यूं बिकता हैं।
किस्मत गर ईश्वर लिखता तो
न लिखता बलात्कार
लड़कियों के नसीब में ।
आंसू बहते लिख रहा हूँ
कुछ फायदा नहीं इस गुणगान का।
बदलेगा कानून देश का
जब जिस्म निचोड़ा जाऐगा
किसी नेता की संतान का।
होता रहा गर रोज ही ऐसा तो बेटी पैदा करना ही अपमान है।
कलियुग के इस दौर में
नारी की इज्जत करने वाला इंसान ही भगवान है
Written by :- Vishal Goad

माँ तू ही सब कुछ हैं

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“आदर्श मानव “

एक जीव मात्र जीवजगत के समस्त जीवों 

को जीना सिखा रहा है ।

खुद को सर्वोपरि और इस सृष्टि 

का सर्वेसर्वा समझने वाला ,

या फिर यूं कहूँ कि

खुद की जान के आगे दूसरों की परवाह न करने वाला जीव ‘मानव’

अब अपने  अस्तित्व के मूल में प्रविष्ट कर रहा है ।

और यह सब भय के कारण संभव हो पाया है 

तो यह भय सही है ।

अपने फायदे के  लिए न जाने कितने ही जीवों को अनायास ही मौत के घाट उतारने में तनिक भी संकोच नहीं  करता ।

आज वो खुद खतरे में है तो बिलख क्यों पड़ा?

शायद अब हो पायेगा उसे अहसास अपनों सेऔर अपनों के बिछड़ जाने का, क्षण भर में जीवन खत्म हो जाने का ,बेमौत मारे जाने का ।

और महसूस कर पायेगा वो बेजुबान जानवरों का दर्द ।

सच्चे अर्थों में यह जीव  मानव को उसके अस्तित्व का प्रयोजन समझाने आया है 

कि उसका विवेक नेक कर्मों और उसका चातुर्य सृष्टि कल्याण में सहायक हो सकने वाले कर्मों को अंजाम तक पहुँचाने के लिए दिया गया है न कि 

किसी दूसरे जीव को सताने के लिए ।

इस भय से मानव अपने मूल्यों सहित कर्तव्य पालन ,

धर्म की परकाष्ठाओं का अनुपालन कर रहा है 

और साथ ही अपने परिवार को समय दे रहा है ।

कुछ देवमानुष जिन्हें अपने मानव होने पर घमंड नहीं है 

ऐसी विपदा की घडी में अपनी जान जोखिम में डालकर सभी की मदद कर रहे है ,असल में ऐसे लोगो का मानव जीवन सार्थक है ।

उन्हें खुद पर फक्र होना चाहिए की वे इस संसार के आदर्श मानव है ।

written by :- sapan agrawal

‘सफर ‘

सफर

सफर, सूखी नदियां, बंजर पहाड़ ,बिन पत्तों के नंगे दरख़्त और बिना परिंदों का आसमान ।

कहते है हर सफ़र हसीं होता है

लेकिन मेरा मन विचलित है इस सफर में ।

माँ की दुआएं,पापा का विश्वास ,जेहन में कुछ कर दिखने का संकल्प, वैसे तो सब कुछ साथ है मेरे

लेकिन कमी है संकल्प में दृढ़ता की,

कमी है आत्मविश्वास की ।

मेरा मन विचलित है इस सफ़र में ।

written by:- sapan agrawal

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©सपन अग्रवाल

माँ तू ही सब कुछ हैं

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