तन से नर ह्रदय से नारी

तन से नर ह्रदय से नारी

यह कहानी है प्रिया जो नोएडा में एक अच्छी कंपनी में मैनेजर के पोस्ट पर काम कर रही है और उसके 16 साल के भाई की

प्रिया कुछ दिन के लिए अपने घर आई हुई है, और आज उसे कहीं जाना है।
उस सुनहरी शाम, बच्चे खेल रहे थे सूरज ढल रहा था कि तभी एक जोर से आवाज आई
प्रिया : मम्मी………. आज मेरी ब्लैक ड्रेस नहीं मिल रही है।
मम्मी : क्या? तुम अपनी चीजें संभाल कर नहीं रखती हो इसलिए नहीं मिलती ।
प्रिया : लेकिन मम्मी, मैंने तो कल ही अपनी ब्लैक ड्रेस आयरन करके कबर्ड में रखी थी आज जो मुझे उसे पहना था।
(मम्मी और प्रिया उसे ढूंढती हैं मगर वह नहीं मिलती)
मम्मी : ऐसा कर प्रिया कि तुम कोई दूसरी ड्रेस पहन लो जल्दी तैयार हो वरना लेट हो जाएगा। प्रिया : मगर मम्मी….
मम्मी : अब ज्यादा अगर मगर मत करो लौटकर आएंगे तब देखेंगे और देख जाकर वासु तैयार हुआ कि नहीं……

प्रिया : ठीक है (गुस्से से)

प्रिया : वासु तू तैयार है?
वासु : मैं नहीं जा रहा दीदी…
प्रिया : मगर क्यों ? आज तो तेरा बेस्ट भाई हिमांशु भी आ रहा है फिर क्यों?
वासू : नहीं, दीदी मुझे पढ़ना है कल मेरा अकाउंट का टेस्ट है।

प्रिया : पक्का तू नहीं जा रहा है?
वासू : हां, मैं नहीं जा रहा है।
प्रिया : अच्छा ठीक है, क्या तूने मेरी ब्लैक ड्रेस देखी है?
वासू : (और फिर शांति)
प्रिया : अरे तू इतनी सोच में क्यों पड़ गया कहीं तूने हीं तो……….
वासू : नहीं नहीं, मैं नहीं जानता अब आप जाओ यहां से….

(वासु प्रिया को कमरे से निकाल के दरवाजा बंद कर लेता है)

प्रिया : अरे वासु मैं तो मजाक कर रही थी और तुम क्या करोगे मेरी ड्रेस का……

कुछ देर बाद…

प्रिया : वासू हम जा रहे हैं खाना बनाकर रख दिया है खा लेना और अपने साथ एक्स्ट्रा की ले जा रहे हैं। ठीक दरवाजा बंद कर लो।

करीब 2:00 बजे प्रिया और उसकी माँ घर लौटते हैं।

प्रिया : वासू को देख कर आती हूं.. माँ।

प्रिया : वासु तू कमरे में है, ही नहीं। चलो अच्छा है, अब मैं उसके गिफ्ट्स यहां रख दूंगी। जैसे ही प्रिया अलमीरा खोलती है। उसकी ब्लैक ड्रेस, बैंगल्स, लिपस्टिक और भी कई चीज है जो कई दिनों से गायब हो चुकी थी, वो सब दिखती है। फिर प्रिया उसका मोबाइल चेक कर दिया जिसमें वासू की कई पिक्चर्स थी उसकी ब्लैक ड्रेस और कई कपड़ों में……

तभी बासु के आने की आवाज सुनाई देती है प्रिया जल्दी से कबर्ड बंद करती है और वहां से भाग जाती है।

पूरी रात प्रिया सो नहीं पाती है और सिर्फ वासु के बारे में सोचती है। क्या सच में मेरा वासु………

वासु की हाव-भाव के बारे में सोचती है और फिर……..

अगले दिन प्रिया, मां मैं मार्केट जा रही हूं। अभी 1 घंटे में आ जाऊंगी।
माँ : ठीक है बेटा मगर जल्दी आना।
प्रिया लौट कर सीधे, बासु के कमरे में जाती है। (जहां वासु अपनी फोटो को निहार रहा होता है)
कि तभी प्रिया कहती है, तू मुझसे भी ज्यादा अच्छा लग रहा है इस ड्रेस में….।।

वासू जल्दी से अपना मोबाइल बंद कर देता है और कहता है आपको दरवाजा खटखटाकर आना चाहिए था ऐसे किसी के कमरे में नहीं आते।

प्रिया : अरे, तो क्या हुआ मैं अपने भाई के कमरे में तो आई हूं।
वासू : पर दीदी, दीदी वो, मैं – मैं।
प्रिया : अरे,पागल मैं मैं क्या कर रहा है। सच में तुम मुझसे भी ज्यादा अच्छा लग रहा है और सिर्फ इसी में नहीं सारी ड्रेसेस में।

वासू : दीदी यह क्या कह रही हो आप…
(प्रिया उसको अपने पास बिठाती है और शांत कराती है)

प्रिया : वासू मैं सब जान चुकी हूं, कल मैंने सब देख लिया।

वासू : दीदी प्लीज आप यह किसी को मत बताना। आप जो भी कहोगी, मैं वह सब करूंगा बस आप किसी को कुछ मत बोलना।

प्रिया : वासु वासु जस्ट रिलैक्स, देख मैं तेरे लिए क्या लाई हूं।
वासू : क्या लाई हो दीदी?
प्रिया : तू खुद देख।
(वाशु आश्चर्य में पड़ जाता है) वासू : दीदी यह क्या!
प्रिया : तुझे पसंद नहीं आई।
वासू : नहीं दीदी आई ना, बहुत पसंद आई मगर क्या सच में यह मेरे लिए ही है?

प्रिया : हां, पागल तुम्हारे लिए यह और खबरदार आगे से मेरी ड्रेस पहनी तो। तू बहुत मोटा है और मेरी ड्रेस फट जाएगी।
(वासु प्रिया को गले लगा लेता है और उसकी आंखों से बराबर आंसू निकल रहे होते हैं।)

प्रिया : वासु छोड़ मुझे वरना मैं मर जाऊंगी।
(दोनों खूब हंसते हैं और बराबर उनकी आंखों से आंसू बह रहे होते हैं)
वासू : थैंक्यू दीदी मुझे लगा था कि आप……..
प्रिया : अरे, पागल तू मेरा भाई है और शायद मैं बहुत लकी हूं कि तू मेरा भाई है।

वासू : आई लव यू दीदी।
प्रिया : आई लव यू टू वासु।

वासू : दीदी मगर मां पापा?
प्रिया : हम दोनों साथ चलकर मां पापा को सब बताएंगे और वो समझेंगे। चल तू मेरे साथ।

वासू : नहीं दीदी जैसा चल रहा है, चलने दो पापा नहीं समझेंगे।
प्रिया : अरे तू चल तो।

(दोनों सब साथ में वासू के बारे में मां पापा को बताते हैं। जैसा की वासु ने बोला था वैसा ही हुआ पापा नहीं समझे उन्होंने तुरंत अपने सारे रिश्ते नाते वासू से तोड़ लिए)

मगर मां तो मां होती है उसका दिल तो वहीं पसीज गया। मगर वह कुछ ना कर सकी।

आज वासू प्रिया के साथ नोएडा में ही रह रहा है। जैसे जीना चाहता था वैसे अपनी जिंदगी जी रहा है। आज एक अच्छे इंस्टिट्यूट में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रहा है।
दोनों भाई बहन बहुत खुश है।
मां रोज बात करती है फोन पर मगर पापा आज भी नाराज़ है। मगर वासु और प्रिया दोनों को उम्मीद है कि शायद एक ना एक दिन पापा भी जरूर मान जाएंगे और वो वासु को अपना लेंगे……….।

तन से नर ह्रदय से नारी

सिमरन (प्रतिष्ठा दीक्षित)
Words_by_simran

 

Entry No. THG024

Date 29-10-2020

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खिलौना

खिलौना

इस ज़िन्दगी के खेल में
मेरा बस एक ही खिलौना है,
बहुत प्यारा है वो मुझे
सबसे सलोना है।

वो मेरा राजा बेटा है
वो मेरी रानी गुड़िया है,
मेरे आँगन की बस
वो ही एक चिड़िया है।

वो शाम की ठंडक है
वो धूप सलेनी है,
अच्छे तो बहुत हैं दुनिया में
पर वह सबसे सोणी है।

जो शिकन मेरी दूर करे वो
वह माथे की बिंदिया है,
जो सुकून देती मुझे वो
वह आँखों कि निंदिया है।

जो मेरी ज़िन्दगी को महकाए
वह फूल वो है,
उसके कदमों में पड़कर को मखमल सी हो जाए
वह धूल हूँ मैं।

फूल से गिरते हैं
जब वह मुस्कुराती है,
पतझड़ हो जाता है
जब वह रोने लग जाती है।

मन लगता नहीं कहीं फिर
जब भी वह मुझे बुलाती है,
मैं आ नहीं पाती बेटा
पर याद तेरी बहुत आती है।

तेरी अलमारी तो खिलौनों से भरी है
पर मेरे पास बस एक ही खिलौना है,
मेरी ज़िंदगी की खूबसूरती की वजह
तेरा ज़िन्दगी में होना है।

खिलौना

~ संस्कृति

 

Entry No. THG023

Date 29-10-2020

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कोई पूछे मेरे दिल से

कोई पूछे मेरे दिल से

कोई पूछे मेरे दिल से कैसे ये जहर पिया है,
मरना किसको कहते हैं जीते जी ये जान लिया है,
कौन किसका है ये वक्त ने बता दिया है,
सबने दुख देकर अन्दर से तोड दिया है,
ऐसा कौन सा गुनाह किया है,
अपनो ने ही पराया किया है,
अब कहने को रह ही क्या गया है,
सब कुछ तो बिखर गया है,
सबने दिल को तोड दिया है,
शायद ये मेरी अच्छाई का सिला मिला है,
किस्मत ने ऐसे कैसै खेल लिया है,
सब कुछ अन्दर ही अन्दर सह लिया है,
मन अन्दर ही अन्दर रो लिया है,
सब कुछ अकेले ही सह लिया है,
इतना कुछ मेरे दिल ने कैसै बरदाश कर लिया है,
किसी ने मेरा दर्द जान ने का प्रयास तक नही किया है,
मेरी खुशियो ने ही मुझे खुद से दूर किया है,
मुझको किसी भी राह मे वफा नही मिली है ,
हर मोड पर सिर्फ रूसवाई मिली है,
मेरे अन्दर बसी अब सिर्फ तनहाई है

कोई पूछे मेरे दिल से

आशिमा जैन
ashima3766

 

Entry No. THG022

Date 29-10-2020

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इतने सवाल क्यूं है 

क्यूं है

इतने सवाल क्यूं है 

हर शख़्स इतना
कमज़ोर क्यूं है

जीवन जब वरदान है फिर 

झुल फंदें में

खुद के हत्या का अपराधी खुद ही क्यूं है

मोहबत के इस जहां में

झुलसे  नफरत में हर शख़्स  क्यूं है

जलाते जब हर वर्ष रावण धूमधाम से 

फिर इतने हैवान क्यूं है 

लबों पे मर्यादा पुरुषोत्तम राम राम 

फिर होता इतना नारी का शोषण क्यूं

पढ़ते  पवित्र क़ुरान, गीता ,रामायण बाइबल

फिर मजहब के लिए लहूलुहान क्यूं है

मिट्टी में ही मिलना है एक दिन सब को

फिर इतने अहंकार क्यूं है?

क्यूं है

कुणाल कंठ 

Instagram
@kunal_ki_kavita214

 

Entry No. THG021

Date 29-10-2020

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In Reality

In Reality

It looks like you are in the seventh heaven
with a smile that never ends,
but in reality, you are tired of being sad, moreover, no tear is left.

you think you want to hide your feelings
from this world
but in reality, you are out of the word,
moreover, you are well enlightened
that they will not understand.

I know sometimes you want to have a break and
to just disappear from this society
but in reality, you need to be found and brought back in reality.

you always use to frame your happiness over
some particulars
and easily get failures.
whereas in reality, this is the only phantom
the happiness that has no particular form.

In Reality

Ashif Jamal
Instagram I’d -@ashif4767

 

Entry No. THG020

Date 29-10-2020

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I Dreamt

I Dreamt

“I dreamt……
I dreamt of a place…….
A place in the world……
A world where there are no electronic gadgets……..
Gadgets such as televisions, desktops, laptops
Nor any cellphone
No cellphone tucked in……..
In between those tiny hands
Which were meant to create something…….
Something rather extraordinary or unimaginable
No wires
Connected to the power socket…
Nor one connected to the ears
Blocking those sounds of the harmonica of nature
And allowing only those sh**s to enter
All that was present were books
And books and books
Stuffed in those huge bookshelves
Waiting to be read…….
Read to imagine…….
Imagine creating something…….
Create something worth extraordinary
But then……
I opened my eyes
Discovered my cellphone buzzing for that morning alarm
On that table beside my bed
And I realized
That it was a place of fantasy
Was living only in my dreams
And dead in this century…….”

©️ Rahul Sen
@rahulsen0504

Writer Friends:
1. Sanskriti Parmar (@writeursunshine)
2. Deepali Maurya (@silent_truth00)

Entry No. THG018

Date: 27rd Oct 2020

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पास तेरे अब किनारा है

पास तेरे अब किनारा है

पास तेरे अब किनारा है

क्या है वह जो तुझे सताता है,
क्यों नहीं तू भी आसमान की तरफ अपना सर उठाता है,
क्यों नहीं लोगों को अपनी तकलीफ तू बताता है,
क्या है वह जो तुझे सताता है…

किस बात का तुझे दर है,
एक तू है और मिलों तक फैला यह अंबर है,
हिम्मत तो कर, उड़ने को तेरे पास भी पर है,
फिर भला किस बात का तुझे दर है…

तुझे किस बात की अब राह है,
हासिल कर जो भी तेरी चाह है,
हर कदम पर अल्लाह की तुझपर निगाह है,
तो फिर किस बात की तुझे अब राह है…

मुस्कुरा थोड़ा के पास अब किनारा है,
दुखों का हट चुका कोहरा है,
खुल चुका खुशियों पतारा है,
की अब तो थोड़ा मुस्कुरा और देख कितना पास तेरे किनारा है…
❣️❣️
– Rishit Parekh

पास तेरे अब किनारा है
@rishit_rocks

#WRITEROFTHEMONTH

Entry No. THG016

Date: 23rd Oct 2020

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Dear Jindagi

Dear Jindagi
Dear Jindagi

तुम भी बहुत थक जाती होगी ऐसे नाकारात्मकता का बोझा उठा जो तुम्हे हमेशा कोसते हैं कि उनके न चाहने पर भी तुम उन्हें वो चीज दे रही जो बहुतों के पास है ही नहीं। तुम्हें नही समझ पाते बहुत लोग , आखिर तुम भी तो कितनी दर्दों की पराकाष्ठा से गुजर रोज खुद को थोड़ा-थोड़ा कम करके हमारे साथ जी रही हो। सुख और दुःख (किसी व्यक्ति का आना जाना ) तो प्रकृति का नियम है, हम किसी के अनुचित व्यवहारों की सजा तुमको क्यों दे। तुम्हारा भी तो ह्रदय टूट कर बिखर जाता होगा ये सब जब तुम पर आरोपित करते होंगे वो गलतियों का बोझ जो तुमने कभी की ही नहीं होती हैं । हाँ मुझे तुमसे कोई शिकायत नही। तुम जैसी हो बस वैसी ही रहना। तुम्हारा होना और बस होने का एहसास मात्र काफी है मेरे लिए। तुम एकमात्र हो जो सोचती हो मेरे लिए, जो जीती है मेरे लिए । वरना कभी सुना है किसी के मर जाने पर कोई मरा हो उसके साथ फिर चाहे कोई किसी की सम्पूर्ण दुनिया ही क्यों ना हो। पर हाँ तुम तो खुद को भी खतम कर देती हो हमारे ही साथ। अब मेरा या किसी का ये कहना कि ( इस जिन्दगी से बेहतर है कि ये ना होती) उतना ही गलत है जितना किसी का दिल दुखाना और हम चाहकर भी ये पाप कभी नहीं कर सकते। आखिर तुम हो मेरी अपनी ही। और “अपने” बचे ही कहाँ है इन परायों की दुनिया में। तुम कभी खुद को किसी से कम मत समझना और कभी मत समझाना किसी को अपनी अहमियत। जिन्दगी में लोगों के आने और चले जाने से थोड़ी ना सब खतम हो जाता है। तुमने तो और भी बहुत कुछ दे रखा है ना। खैर तुम भी खुश रहा करो और छोड़ दिया करो लोगों को उनके हाल पर। तुम सच में बहुत खूबसूरत हो, इतनी कि शब्द ही नहीं तुम्हे बयां कर पाने को। और तुमसे बस इतना ही कहना है…. 🅸 🅻🅾️🆅🅴 🆈🅾️🆄… 💟

✍🏻 साक्षी😊

Dear Zindagi@_sakku_writes

 

Entry No. THG015

Date: 23rd Oct 2020

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मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती।

ये कैसी अँधेरी दुनिया है,
जहाँ मैं क़ैद हूँ?
अच्छा-अच्छा तो मैं अभी,
अपने माँ के गर्भ में हूँ।
जहाँ अभी मेरे अँगों का,
निर्माण हो रहा है,
मुझे इस दुनिया में,
लाने के लिए सज किया जा रहा है।

ये बाहर की दुनिया,
कितनी प्यारी होगी ना?
रोशनी होगी,
नए-नए लोग होंगे,
मुझे बहुत सारा प्यार देंगे,
मेरी इस दुनिया से पहचान कराएँगे।

अरे-अरे ये माँ को क्या हो रहा है?
उन्हें इतना दर्द क्यों हो रहा है?
माँ तुम इतना क्यों चिल्ला रही हो, इतना क्यों रो रही हो?

ये आदमी कौन है?
माँ यह आपको दर्द दे रहा है।
माँ क्यों कुछ बोल नहीं रही?

अरे ये तुम क्या बोल रहे?
मैं माँ को दर्द दे रहा हूँ?
मेरी वजह से माँ को दर्द हो रहा है?

माँ मैं कभी तुझसे यह नहीं बोल पाऊँगा,
तेरे समक्ष अपने भाव ना रख
पाऊँगा,
मन मेरा तुझे दर्द में देख होता है उदास,
सोचने लगता हूँ गर्भ में कि क्यों लगाई तूने मुझसे आस,
कि तेरे सारे दुख हर पाऊँगा,
तुझे मैं ढेरों खुशियाँ दे पाऊँगा?
जब अभी ही इतना दर्द दे रहा हूँ,
दुनिया में आने, मैं तुझे कष्ट दे रहा हूँ।

जानता हूँ,
सुन मेरी बात तू बस यही कहेगी कि मुझसे तू है,
तो दर्द कैसा,
पर तुझे थोड़े भी दर्द में देख,
सहम जाता हूँ, डरे हुए बच्चे जैसा।

माँ मेरा अस्तित्व तुझसे है,
मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा, मेरा हर किस्सा तुझ से है।

मैं आँख, तो मेरी आँखों का नूर हो तुम।
मैं सजदा, तो मेरा खुदा हो तुम।
मैं नदी, तो मेरा बहाव हो तुम।
मैं आफताब, तो मेरा प्रकाश हो तुम।
मैं चाँद, तो मेरी चाँदनी हो तुम।
मेरी ज़िन्दगी के ज़र्रे-ज़र्रे में हो तुम।

माँ मैं तुझसे बस एक ही बात कहना चाहता हूँ,
मेरा जीवन मैं तेरे लिए सजाता
हूँ,
तुझसे निर्मित, मैं तुझे समर्पित होता हूँ,
मेरा ज़र्रा जर्रा तुझ पर अर्पित करता हूँ।

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

©️रूपेश गुप्ता
/silentpoetrytrails

Entry No. THG013

Date: 23rd Oct 2020

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एक तरफ़ा प्यार

एक तरफ़ा प्यार

एक तरफ़ा प्यार है मेरा
इसका न जाने क्या होगा
दूर हु मैं उससे इतना
की उसका रास्ता भी खफा होगा
बस कह दे आज जो कहना है
कल पता नही मेरा क्या होगा
की शायद तेरी डोली उठेगी
पर हमें मौत का सज़ा होगा।
पूछ रहा हूँ तेरी दिल मे मेरे लिए कुछ जगह होगा
या फिर ये मेरा प्यार भी यूँ ही फना होगा।

🥺Some random word🥺

एक तरफ़ा प्यार

Pranav Anand
(NAV)

Entry No. THG012

Date: 23rd Oct 2020

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