रूठा प्रेम…

pexels-photo-3998369 रूठा प्रेम

जब नजर ही मिलाना नहीं चाहते
हर दफा सामने से न आया करो
चंद पल में बनाते हो रिश्ते यहाँ
चंद पल तो उन्हें तुम निभाया करो
सोच कर तुम तो हर बात कहती रही
बात कह कर यहाँ सोचते हम रहे
तुम ज़हन में मेरे हम सड़क पर यहाँ
उम्र भर साथ हम-तुम टहलते रहे
बात जो भी चुभी वो बताया करो
यूँ न हँसकर सदा तुम छिपाया करो
जब नज़र ही………
पास आकर बही तुम नदी की तरह
हम किनारे के जैसे तरसते रहे
जब भी सँवरी यहाँ मेनका तुम लगीं
विश्वरथ की तरह हम बहकते रहे
साथ छोड़ा अभी तक नहीं स्वप्न में
साथ छोड़ो तो वापस न आया करो
जब नज़र ही……
पूछते जब रहे प्रश्न हम प्रेम के
तुम ने हर प्रश्न पे सर झुका क्यों लिया
हम समझना नहीं चाहते थे मगर
कुछ नहीं है बचा तुम ने समझा दिया
मन हमारा भी भयभीत रहता यहाँ
तुम न हर बात पे सर झुकाया करो
जब नज़र ही…..
तुम चली क्या गई साथ सब कुछ गया
उम्र घटती रही साँस चलती रही
हम कहानी को गढ़ने चले थे यहाँ
गीत में ये कहानी बदलती रही
आँसुओं से बने तुम इसी गीत को
यूँ न हँसकर सड़क पर सुनाया करो
जब नज़र ही मिलाना नहीं चाहते
हर दफा सामने से न आया करो
– केशव भार्गव ©
भोपाल, मध्यप्रदेश

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प्रेम गीत…

 

pexels-photo-240514 प्रेम

- बैठो इस कदर प्रियतम के पास,
भुल जाओ कहीं आना-जाना....

--हो जाओ इक दुसरे के एहसास,
वो कोमल सी राधा बन जाये
तुम बन जाओ चित्चोर कान्हा....

- मोह नहीं प्रेम करो-यही जग की रीत है,
मोह इक दिन उड़ जाएगा 
प्रेम रहे सदा मनमीत है....

- पावन मन है- है ये सावन का रूप,
यह प्रेम तुम्हे सिख्लाएगा....

-- बूँद पड़े हृदय पर खुब,
कण-कण द्वेष मिट जाएगा....

- रस-नीरस से ना परखो प्रेम को,
स्वच्छ-निर्मल सदा से है.... 

-- वाद-विवाद मे ना खोजो इसको,
हृदय धरातल मे सदा से है....

- प्रेम मोहन - प्रेम राधा है,
प्रेम मन की अविरल धारा है.... 

-- प्रेम कृष्ण - प्रेम राधिका है,
प्रेम का खेल का न्यारा है....

✍✍kabiryashhh✍✍

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एक वक़्त ऐसा भी…

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युद्ध का बिगुल बज चुका है
अकल्पनीय मगर सत्य
सारी मानव जाति अपने बनाए
पिंजरे में है क़ैद बेबस
कभी सोचा न था
वक़्त का पहिया ऐसे धमेगा
हाँ कभी चाहा था
काश एक दिन के लिए ही सही
वक़्त ठहर जाए
ज़िंदगी की आपाधापी से सभी मुक्त हो
सारी दौड़ समाप्त हो
हर दिन एक जैसा हो
मगर इतना ना सोचा था
ये युद्ध प्रकृति का है
मानव के विरुद्ध
धरती-माँ ने किए है सारे मार्ग अवरुद्ध
आज बादल दिखने लगे है
पेड़-पोधे भी नाच-गा रहे है
पशु-पक्षी है हैरान
क्यूँ है ये इंसान परेशान
मानव ने सोचा था
अवतार पर एकधिकार क्या सिर्फ़ उसका है
नहीं, यहाँ सब को हक़ है बराबर
हे इंसान तू सुधर जा
अन्यथा कुछ भी हो सकता है
विकास की ये अंधी दौड़ तेरी
तुझे ही ले डूबेगी।

Written By: CA Sunita Agrawal

मंजिल एक रास्ते अनेक…

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मंज़िल एक रास्ते अनेक
गुजरना है या गुजर जाना है

रिश्ता एक अंजाम अनेक
निभाना है या निकल जाना है

दोस्त एक दुश्मन अनेक
डरना है या डरा जाना है

परिवार एक रिश्तेदार अनेक
सुन्ना है या सुना जाना है

प्यार एक धोके अनेक
जीना है या मर जाना है

मजिल एक रास्ते अनेक
तुझे चलना है आगे बढ जाना है

Written by :-नितिन मंगल ( रूहानी मोहब्बतें)

मैं तुमसे बेहतर हूँ मगर….

मैं तुमसे बेहतर लिखता हूँ, पर जज्बात तुम्हारे अच्छे है
मैं तुमसे बेहतर दिखता हूँ, पर अड़ा तुम्हारी अच्छी है
मैं खुश हरदम रहता हूँ, पर मुस्कान तुम्हारी अच्छी है
मैं अपने उसूलों पर चलता हूँ,पर जिद तुम्हारी अच्छी है
मैं एक बेहतर शख्सियत हूँ,पर सीरत तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बहुत बहस करता हूँ, पर दलीले तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बेहतर गाता हूँ,पर धुन तुम्हारी अच्छी है
मैं जितना कुछ भी कहता हूं, पर हर बात तुम्हारी अच्छी है

Written by :- सखा