मैं समय हूं

मैं समय हूं

मैंने दक्ष के द्वारा होते, सती का अपमान देखा है ।
मैंने एक मां के द्वारा होते, ध्रुव का तिरस्कार देखा है।
मैंने समुद्र मंथन से विष निकलते और अमृत बंटते देखा है।
मैंने पिता के द्वारा होते, पहलाद पर अत्याचार देखा है।
मैं समय हूं ।

मैंने त्रेता युग में, दशरथ का पुत्र वियोग देखा है,
मैंने सीता की अग्निपरीक्षा होते देखा है।
मैंने द्वापर युग में, भीष्म की प्रतिज्ञा,
द्रौपदी का चीर हरण देखा है।
मैं समय हूं।

मैंने बुद्ध का मोह माया से त्याग देखा है।
मैंने साईं का विश्वास देखा है।
मैंने रज़िया को बनते सुल्तान देखा है।
मैंने लक्ष्मी बाई का बलिदान देखा है।
मैं समय हूं ।

मैंने देश को होते गुलाम देखा है।
मैंने आजाद की निडरता देख,
भगत को फांसी चढ़ते देखा है।
मैंने भारत को होते, आज़ाद देखा है।
मैंने राष्ट्रपिता गांधी को छल से मरते देखा है।
मैं समय हूं।

मैंने प्राचीन युग देखा है,
मैं आधुनिक युग देख रहा हूं
मैं समय हूं।

मैंने कल्पना की उड़ान देखी है।
मैंने मंगल पर यान देखा है।
मेरे निर्भया कांड देखा है।
मैंने जवानों को शहीद होते देखा है।
मैं समय हूं।

मैंने प्रकृति का तांडव देखा है।
केदारनाथ में प्रलय देख,
मैंने 2020 का कोरोना काल देखा है।
मैं समय हूं।

मैं समय हूं,
मैंने बहुत कुछ देखा है।
देख मैं और क्या-क्या देखूंगा।

मैं समय हूं।
मुझसे ना कोई आगे निकल पाता है
और न मुझ में कोई पीछे लौट पाता है
जो साथ-साथ चलता मेरे,
वो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है
मैं समय हूं।
मैं समय हूं।

Original name – Pratishtha Dixit
Pen name – Simran
Insta I’d – @quote_shyri_point
@simplicity_luvs_simran

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समय

समय

समय/वक्त
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वक़्त ही है, जो हर आईना दिखा देता है।
वक़्त ही है, जो पत्थरों को भी खुदा बता देता है।

डर है गर ज़िंदगी में, तो वक़्त से डरकर ही रहना,
यही वो लहर है, जो दरिया को भी समन्दर बना देता है।

साया भी छोड़ता है साथ, वक़्त के बुरे साये में,
इंसान क्या चीज़ है, वक़्त को वक्त ही हरा देता है।

सम्भल जाओ ज़रा, वक़्त से पहले ऐ दुनिया वालो,
ये वही है, जो रूह निकलते ही,इंसान को जला देता है।

मेरी नाकामी पे, बहुत हँसती है ये दुनिया नीलोफर,
बता दो, कामयाबी ही नाकामी का लफ्ज़ मिटा देता है।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

आईनापृथ्वी माँकचरे का अंबारNews Updates, समय

पृथ्वी माँ

पृथ्वी माँ

एक खत हम सबकी सर्वश्रेष्ठ माँ के लिए……… ( पृथ्वी माँ )

माँ…… मैंने सबको कहते हुए सुना है कि माँ हमेशा हम बच्चों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है। माँ स्वयं से भी ज्यादा अपने बच्चों का ख्याल करती है फिर वो बच्चे चाहे कितनी भी गलतियाँ क्यों ना करें। माँ क्षमा और प्रेम की सक्षात मूर्ति होती है।

माँ….. मैं मानती हूँ कि तेरे बच्चों ने तुझे हमेशा इतने कष्ट दिये हैं कि वो अगणनीय हैं। तेरे बच्चों ने तेरे व्यक्तित्व को अपने स्वार्थ के कारण धूमिल कर दिया। ये भी जानती हूँ कि तुझे बहुत बुरा लगा होगा और ये भी कि जब तू रो रही होगी तो तुझे सम्भालने वाला कोई नहीं रहा होगा। तू अपने ही आंचल से अपना अश्रु नहीं पोंछ पायी होगी, क्योंकि शायद अगर तू ऐसा करती तो हमारा सन्तुलन बिगड़ जाता और शायद हमारा कहीं दूर-दूर तक मनुष्य का अस्तित्व ना रह जाता।

माँ……. मुझे ये भी पता है कि हमने तेरा दिल तोड़ा ही नहीं अपितु चकनाचूर कर दिया।
माँ……. हम सब तेरे अपराधी हैं और अपराध इतना बड़ा है कि क्षमा किस मुँह से माँगी जाए समझ नहीं आ रहा।
माँ…… तू तो अपने बच्चों की विवशता जानती थी ना कि वो विज्ञान पर इतना आश्रित था कि तेरे ह्रदय पर कब आघात पर आघात किया उसे स्वयं नहीं मालूम है। पर माँ तू तो माँ हैं ना और शास्त्रों में माँ को ईश्वर से सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। माँ हम जानते हैं कि ईश्वर भी हमारी इस गलती को क्षमा नहीं करता पर हम तुझसे हक से क्षमा मांग सकते हैं। अपने हर उस गलती कि जो हमने की है और मुझे पता है तूने बिना कहे ही क्षमा कर दिया होगा।

क्योंकि तू माँ है ना और हम तेरे नादान बच्चे…..

✍🏻साक्षी🙂
@_sakku_writes

कचरे का अंबारमेरी डायरीजीवन में जल का महत्वNews Updates

मेरी डायरी

मेरी डायरी

मेरी डायरी में मैंने लिखा एक नया पैगाम
जो कमाया मेहनत से बस वही एक नाम
अंकित किए कुछ शब्द अपनी ख्वाइशों के
एक लड़की की दास्ताँ एक इकलौती संतान का काम।।

एक शरारती लड़की की उम्र
अंकिता के दिल का हाल
कभी खुशियाँ और गम
कभी अपनी नासमझी की मिसाल।।

मैंने लिखा दुनिया का सितम
किसी की आँखें जो थी नम
कभी हौसलों की कहानी
कभी किस्सों में सुने राजा और रानी
कभी दोस्तों की बातों को
कभी पापा जी के संवादों को
कभी घर के राशन का सामान
कभी अखबार की सुर्खियों का निशान
कभी मिली कोई उपलब्धि
कभी कहीं मिली कोई प्रसिद्धि
कभी किसी किताब का वर्णन
कभी जीवन का चिंतन।।

©️Ankita Virendra Narayan Shrivastava

IG ankitavshrivas or virendraankita

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन का प्रारंभ जल से हुआ,
जल के द्वारा ही वनस्पतियों आदि का निर्माण हुआ,
प्रकृति को सुंदर हरा भरा बनाये रखने के लिए जल की ही आवश्यकता होती है,
जीव जंतु भी जल से अपनी प्यास बुझाते है,
मानव के लिए जल बिन जीवन एक असंभव सा कार्य है,
हर वस्तु हर जगह जल की आवश्यकता है,
फसल उगाने से लेकर, बीज आरोपण ,
खाना बनाने से लेकर, मकान बनने तक,
बिजली से लेकर अनेकों संसाधनों का स्रोत जल है,
शरीर को स्वच्छ बनाने और किसी नई चीज़ का निर्माण के लिए आवश्यकता जल है,
जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है,
अतः हमें जल को संरक्षित कर हमेशा जल का सदुपयोग करना चाहिए,
और जल को व्यर्थ में बर्बाद होने से बचाना भी चाहिए।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

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किसानविचारआखिर क्यों?News Updates,

राधा

राधा

राधा

मंत्रमुग्ध करती कर कमलो को,
अर्पण कर अपना शृंगार,
बलखाती बेलो सी चंचल,
लायी वो प्रेम का उपहार।

मृग से सुन्दर नैना जिसके,
मानो शृष्टी का हो सार,
बातो में जो बल है उसके,
आगे फीके है तलवार।

पता ठिकाना कोई न जाने,
बसती है कान्हा के मन में ,
पावन प्रेम की धारा बनके,
बहती है वृन्दावन में।

यमुना के तट बैठी होगी,
तकते राह वो कान्हा की,
जग ढूँढे भी न मिलेगी,
प्रियसी कोई राधा सी।

-अंजली कश्यप

किसानविचारNews Updates

किसान

किसान

किसान

मैं कहने को तो एक किसान हूँ,
जो खेतों खलियानों में बीज बो कर फ़सल उगाए,
तपती धूप में भी जो खेतों में हल चलाये,
रूखी सूखी खाकर अपना और अपने परिवार का पोषण करें,
साहूकारों औऱ सरकारों के कर में अपनी ज़िंदगी बिताए,
पसीनें के साथ खून की बूंद तक गिरवीं रखवाए,
कृषि प्रधान कहें जाने वाले इस देश में किसानों का दर्द जानें कौन,
हर संकट की घड़ी में भी अनाज का उत्पादन करते है,
फिर भी कई बार भस्टाचार का शिकार बनते हैं,
जो दर्द सह नहीं पाते वे आत्महत्या के शिकार होते है,
जो जीवित रह जाते है वह भी मज़बूरी में अपना जीवन व्यतीत कर लेते है,
अनेकों कवियों की आवाज़ हूं मैं जो तालियों के शोर में कहीं गुम हो जाती है।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

विचारआखिर क्यों?विषय शून्यNews Updates

आखिर क्यों?

आखिर क्यों

आखिर क्यों इंसानियत खोने लगी है?
वफ़ा के नाम पे, बेवफाई होने लगी है।

आखिर-क्यूँ, दिलों में शक की दीवार आ गईं
ज़ख़्म एक नही, पूरी बौछार आ गई।

आखिर क्यूँ, हर ज़ुल्म पे तमाशाबीन हो गए
झूठे अफसोस जता कर, ग़मगीन हो गए।

आखिर-क्यूँ, बिन मुंह के जानवर पे अत्याचार किया
दो चार अफसोस जताकर फिर नया समाचार किया।

आखिर-क्यूँ, फिर इश्क़ को बदनाम किया
पेड़ से लटकाकर, फिर एक किस्सा तमाम किया।

आखिर-क्यूँ, किलकारी की गूंज, कचरे से आई है
फिर मुहब्ब्त के नाम पे तबाही मचायी है।

आखिर क्यों खुद को सवालों का ढेर बना दिया
जवाब दिया नहीं फिर एक सवाल बना दिया।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

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विषय शून्यबारिशज़िंदगीNews Updates

विषय शून्य

विषय शून्य

विषय शून्य
विधा कविता

शून्य ही है ज़िन्दगी में शून्य से मुलाकात है
मैं अनंत अवतरण मेरी शून्य से ही बात है
शून्य से शुरुआत है और शून्य ही तो अंत है
शून्य ही है ज़िन्दगी और
शून्य ही अनंत है।।

शून्य परिधि का सूचक शून्य ही उदार है
लाखों की गडणा का शून्य ही आधार है।।

शून्य मुझमें है कभी वो शून्य ही विद्यमान है
शून्य को ही सोचकर आर्यभट्ट बनता महान है।।

शून्य का है मोल नहीं और शून्य ही अनमोल है
शून्य ही गिनती का सूचक शून्य ही तो मोल है।।

शून्य मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा राज़ है
शून्य ही दुनिया मेरी करोड़ों का रिवाज़ है।।

शून्य ही ले जाता उन्नति पर शून्य ही तो आस है
दस बीस बनता शून्य से
शून्य करोड़ों की आवाज़ है।।

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivas

Ayodhya Uttar Pradesh

विषय शून्य

बारिशज़िंदगीमाँ की परवाह-News Updates

DEAR HISTORY

Dear History

Dear History,

There’s a historical authenticity in your presence. You are thought with your methodical record of our past events. You are a glimmer of hope for mankind.

You are carrying the burden of humanities cussed and hideous history hifalutin sometimes. Your words are high strung for us. And sometimes they are homiletic.

You are a world within the world. The incense of your incorruptible indefatigable work of keeping years of events together and showing it to the world is just meritorious.

Thank you so much for your revitalization of memories. Thank you so much for revivifying human history.

@her_scribbled_stories
Dear History By Amruta_Patil

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