गया मै भी वहां पर जा ना पाया

गया मै भी वहां पर जा ना पाया

गया मै भी वहां पर जा ना पाया
इच्छा मेरी निहित मिटा न पाया

दरखतों का जहां था रेत सा सूखा
पानी तो बहुत था प्यास बुझा न पाया

चाहता हूं एक जहां ऐसा भी हो
जाऊं वहां जहां कोई जा न पाया

आंखो मे हो हया मानवता रीझती हो
मिटा सकूं हर दर्द जो भुला न पाया

गया मै भी वहां पर जा ना पाया
इच्छा मेरी निहित मिटा न पाया

न वजह हो कोई झूठ की वहां पर
लगाऊं गले सूरज जो लगा न पाया

शीतलता फैली हो चंद्र की शीतल चांदनी सी
सहेजूं खुशियां मिटाकर गम, यादों को मिटा न पाया

डूब जाऊं जहां के इम्तिहान परवाह नहीं मुझको
एक बार तो पाऊं जहां वो जो पा न पाया

रहने को चाहिए जहां मुझे
बाकी किसी की परवाह नहीं
खुशनसीबी फ़ैल जाए दुनिया में इतनी
मुझे अपनी खुशी की परवाह नहीं
Raghav

 

शर्मसार इंसानियत

शर्मसार इंसानियत

ख़ून के आंसु रोया दिल, जब देख हुईं इंसानियत शर्मसार,
जब देखा उस लड़की की इज्ज़त लूट हुऐ वो हैवान फरार॥

नजरें भी झुक जाती, जब होता एक और निर्भया का निर्माण,
ना जाने कितनों को छोड़ देती देश की अदालत हर बार॥

अब सहा नहीं जाता हमसे नारी पर ऐसा अत्याचार,
दिन ब दिन वारदातें बढ़ रही अब कुछ तो करो देश की सरकार।

क्यों ख़ामोश बैठे हो, बांध कर तुम अपने हाथ,
बहन बेटियों की ना परवाह तुम्हे, तुम सब हुए इतने लाचार।।

शर्मसार इंसानियत

Shivam kumar
@Shivam.1076

#WRITEROFTHEMONTH

Entry No. THG019

Date: 27rd Oct 2020

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हालात

हालात
ये कहानी है मुकेश एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का और तमन्ना एक हाई सोसायटी की लडकी।

यूं तो दोनों थे बिल्कुल भी उलट जैसे नदी के दो किनारे। जहां मुकेश बनारस का रहने वाला एक शांत स्वभाव वाला लेकिन चुलबुला लड़का था तो वहीं तमन्ना लखनऊ की रहने वाली एक बेबाक लेकिन शालीन लडकी।
हर जवान प्रेम कहानी की तरह ये कहानी भी शुरू हुई एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से, जहां दोनों साथ पढ़ने आते थे या यूं कहे कि अपने दोस्तो का उनकी प्रेम कहानी में साथ निभाने आते थे।

यूहीं मिलते जुलते दोनों में बाते शुरू हुई और ठीक प्रकृति के नियम की तरह दोनों एक दूसरे के लिए लगाव महसूस करने लगे।


हाय हैलो वाली बातचीत धीरे धीरे देर रात तक होने वाली बातों में बदली और बातें मुलाकातों में।

धीरे धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा और तभी दोनों की ग्रेजुएशन की पढाई खत्म हो गई और तमन्ना आगे की पढ़ाई के लिए कलकत्ता चली गई और मुकेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बनारस में रहा। कुछ इस तरह वो दोनों प्यार करने वाले दूर हो गए। मगर इस दूरी से उनकी मोहब्ब्त कम नहीं हुई बल्कि इस दूरी ने दोनों की मोहब्ब्त को और बढ़ा दिया।


जल्दी ही दोनों के घर वालो को भी उनकी मोहब्बत का पता चल गया और शुरुआत में तमन्ना के घरवाले इस रिश्ते के लिए राज़ी थे मगर मुकेश के घरवाले रिश्ते के लिए राज़ी नहीं थे लेकिन फिर दोनों के मनाने के बाद मुकेश के घर वाले भी उन दोनों की शादी के लिए मान भी गए दोनों की सगाई भी कर दी गई।

तमन्ना की पढ़ाई पूरी होते ही दोनों की सगाई कर दी जाती है और सगाई के कुछ महीनों बाद ही मुकेश की एक अच्छे पद पर नौकरी लग गई। दोनों की शादी का समय पास आ रहा था और दोनों ही अपनी शादी को लेकर बहुत ही उत्साहित थे।

उन दोनों की सगाई के कुछ समय बाद तमन्ना के माता पिता ने उसकी बड़ी बहन श्रुति की भी शादी कर दी थी, लेकिन धीरे धीरे श्रुति के पति के व्यवहार में बदलाव आने लगा और वो उसे रोज मारने पीटने लगा। जिससे की एक दिन अचानक रहस्यमय तरीके से उसकी मौत हो जाती है, या फिर यूं कहे के उसके पति के हाथों ही उसकी मौत हो जाती है।

इस घटना ने तमन्ना के माता पिता को पूरी तरह से हिला दिया था। अब वे लव मैरिज के बिल्कुल खिलाफ हो गए थे क्योंकि उनकी लाडली बेटी की जान उसके ही आशिक़ ने ले ली थी। तमन्ना की सगाई मुकेश के साथ हो गई थी और उन्हें मुकेश अपना सा भी लगता था लेकिन रिश्तेदारों से ये न देखा गया और उन्होंने तमन्ना के माता पिता के मन में मुकेश के लिए जहर भरना शुरू कर दिया।

धीरे धीरे उनकी बातो में तमन्ना के पिता आ गए और मुकेश से तमन्ना की शादी तोड़ने की बात सोचने लगे लेकिन वो अपनी बेटी की खुशी भी चाहते थे मगर जैसे ही तमन्ना को इस बात की भनक लगी कि उसके घरवाले उसकी शादी तोड़ने के बारे में सोच रहे है तो उसने अपने घरवालों के ख़िलाफ़ बगावत कर दी। दोनों का प्यार बिल्कुल सच्चा था और ये बात तमन्ना की मां भी बखूबी जानती थी।


लेकिन अपनी बड़ी बेटी की मौत से वो भी दुःखी थी। तो उन्होंने अपने दिल की बात मुकेश से जा के कह दी और उन्होंने मुकेश से उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी चीज मांग ली। उन्होंने मुकेश से कहा कि वो तमन्ना से खुद ही रिश्ता तोड़ दे लेकिन मुकेश भी ये बात जानता था कि तमन्ना उससे कितना प्यार करती है। वो कभी उसे नहीं छोड़ेगी, तब उसने अपने प्यार का बलिदान देने के लिए एक योजना बनाई जो की उसे तमन्ना की नज़रों में गिरा दे और वो खुद ही उसे छोड़ कर अपने माता पिता की पसन्द के लड़के से शादी कर ले।


उसने अपने एक दोस्त से तमन्ना को ये झूठी खबर दिलवाई की वो उसे धोखा दे रहा है। मगर फिर भी तमन्ना को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ और उसने ये बात खुद मुकेश से पूछी। जिसे मुकेश ने पहले नकार दिया क्योंकि वो जानता था कि तमन्ना इतनी आसानी से उससे दूर नहीं जाएगी। तब मुकेश ने अपने दोस्त पवन की मदद से कुछ ऐसा किया जिसने तमन्ना को उससे दूर कर दिया। उसने अपने घर पर दो लडकियो को बुलवाया और अबकी बार पवन से उसे फोन करवाया के अगर उसे यकीन न हो तो वो उसके घर जाकर देख ले कि उसकी मोहब्ब्त उसका होने वाला जीवनसाथी कैसा है और वो उसकी पीठ पीछे क्या कर रहा है।


जैसे ही तमन्ना मुकेश के घर पहुंचती है तो वो उसे उन लडकियो से साथ बिस्तर में देख कर टूट जाती है और मुकेश को खूब भला बुरा बोलकर और अपनी सगाई तोड़कर अपने घर आती है और अपनी मां से लिपट कर खूब रोती है।

मुकेश अपनी मोहब्बत का बलिदान तो कर देता है लेकिन वो तमन्ना को डोली में बैठकर जाते देख खुद को सम्भाल नहीं पाता है और वो शराब के नशे में रहने लगता है। एक दिन शराब पीकर घर लौटते वक़्त उसकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता है जिसमें उसके सर पर काफी गहरी चोटें आती है और वो पागल हो जाता है मगर इस पागलपन में भी वो अपनी मोहब्ब्त को नहीं भूलता है।

कुछ महीने बाद तमन्ना अपने पिता की पसंद के लड़के से शादी कर लेती है। लेकिन इस बार एक बार फिर से तमन्ना के पिता का फैसला गलत साबित होता है। मुकेश से रिश्ता तोड़कर उन्होंने जिस लड़के से तमन्ना की शादी की थी वो और उसके परिवार वाले दहेज के लालची होते है। वे लोग शादी के कुछ महीनों बाद ही तमन्ना को दहेज के लिए मारने पीटने लगे जिसकी वजह से उसकी मौत हो जाती है। एक बार फिर से उनके गलत फैसले की वजह से उनकी लाडली बेटी की जान चली गई।

तमन्ना की मौत की खबर को अखबार में पढ़ कर मुकेश ठीक हो जाता है और गुस्से में तमन्ना कर पिता को फोन करके खूब अनाप शनाप बोलता है। लेकिन जब उसे अपनी गलती का एहसास होता है तो वो उसके पिता से माफी मांगने की बजाए अस्पताल की बालकनी से कूद कर आत्महत्या कर लेता है।

तमन्ना की मौत के बाद मुकेश की बातों ने तमन्ना के पिता को अंदर तक झकझोड़ दिया था। और जब उन्हें मुकेश की मौत की भी खबर मिली तो उन्हें और गहरा सदमा पहुंचा। इस सदमे से उसके पिता को भी दिल का दौरा पड़ जाता है और उनकी भी मौत हो जाती है।

कुछ इस तरह से हालातो ने एक बार फिर से दो प्यार करने वाले को जुदा तो किया ही लेकिन साथ ही साथ तीन बेकसूर जाने भी ले ली। ©️ Ultimate loser
Ultimate Loser

Entry No. THG017

Date: 27rd Oct 2020

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आत्म चिंतन

आत्म चिंतन

जीवन को सरल रूप और उचित ढंग से व्यवस्थित करने के लिए सबसे उपयोगी कुछ है तो वो आत्म चिंतन है। 
आपकी हर परेशानियों और मुश्किलों का हल आप आत्म चिंतन से कर सकते है। 
बस जरूरी है कि आप आत्म चिंतन में सिर्फ अपने आपको जाँचो और परखो ,
 और यह भी जानो की जो आपने किया वह सही किया या गलत , 
और यह भी की कोई काम उससे बेहतर तरीके से हो सकता था या नहीं, 
कुछ भूल गए या कुछ ज्यादा कह दिया, 
इस पर गौर करने की जरूरत आपको खुद में है। 
हम दूसरों की गलती तो आसानी से बता लेते है, 
मग़र क्या स्वयं की गलती पर भी उतना ही गौर करते है ?
रिश्तों में पनप रही कड़वाहट को आप स्वयं दूर कर सकते है,
 बस आगे आकर दूसरों की गलती माफ कर या 
अपनी गलतियों की माफी मांग कर पहले से बेहतर अच्छा रिश्ता फिर से कायम कर सकते है। 
जो दिल से अपने होते है वे आपको माफी माँगने से पहले ही माफ कर चुके होते है
 बस आपके वापस आने और बोलने का इंतेज़ार करते है। 
कुछ कड़वी याद जो आपको रूलाती थी, 
एक वक्त गुज़र जाने के बाद वह आपके हँसी का कारण भी बन सकती है।
 अपनी गलतियों से सीखकर हमें आगे बढ़ना चाहिए ।
 गलतियां सभी करते है शायद इसीलिए इंसान को गलतियों का पुतला भी कहा गया है। 
जीवन में जब तक कोई गलती नहीं करेगा, गिरेगा नहीं, 
तब तक वह जिंदगी से मिले सबक को कैसे सीख पायेगा और कैसे बुलंदियों पर पहुँच पाएगा।

हमें अपने विचारों का अवलोकन करना चाहिए क्योंकि वे आपके शब्द बनते है।
हमें अपने शब्दों पर निगरानी रखनी चाहिए क्योंकि वे आपकी क्रियाएं बनती है,
हमें अपनी क्रियाएं को प्रतिदिन जांचना चाहिए क्योंकि वे आपकी आदत बनती है,
और हमें अपनी आदतों को परखना चाहिए 
क्योंकि हमारी आदतें ही हमारे चरित्र का निर्माण करती है।


✒️ Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

Entry No. THG014

Date: 23rd Oct 2020

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हिंदी

हिंदी

हिंदी

मेरे संस्कार मेरा दिल मेरी जान हिंदी है,
ये मेरा अहंकार मेरा स्वाभिमान हिंदी है,

मातृभाषा है मेरी गर्व महसूस करते हैं,
मेरे लिए मेरे जीने में मेरी शान हिंदी है,

गंगा,यमुना,सरस्वती नदियों सी पावन,
माँ की ममता सी मेरा सम्मान हिंदी है,

आदर योग्य हैं मेरे लिए सभी भाषाएँ,
सभी भाषाओं में सबसे महान हिंदी है,

संस्कारों के गहनों से सजी संवरी हुई,
स्वर्ग तक सचिन मेरी पहचान हिंदी है,

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
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Newsहिन्दी से हिन्दुस्तान, हिंदी दिवस

हिन्दी से हिन्दुस्तान

हिन्दी से हिन्दुस्तान

हिन्दी से हिन्दुस्तान
वाणी है मधुर ये मधुर भाषाओं का गौरव है
साहित्य समृद्ध है इसका और मंगलकारी वैभव है
राष्ट्र भाषा है हिन्दी इसका वैभव महान है
देश को सशक्त बनाती है हिन्दी
हिन्दी से हिन्दुस्तान है।।

विभिन्न ग्रन्थ हैं रचित इसमें काव्य का इसमें प्रावधान है
अवधि मैथिली संस्कृत का समावेश इसमें विद्यमान है
देश की मधुर वाणी है हिन्दी
हिन्दी से हिन्दुस्तान है।।

निराला रहीम कबीर की बोली
उर्दू के समावेश का ज्ञान है
आधुनिक युग में इंदौरी और विश्वास के नाम का सम्मान है
भाषाओं की भाषा है हिन्दी
इसका वैभव महान है
देश की कार्यशैली अपनाती हिन्दी
हिन्दी से हिन्दुस्तान है।।
है अनंत साहित्य इसका इस भाषा का होता गुणगान है
बच्चन हरिऔध की बोली हिन्दी
हिन्दी से हिन्दुस्तान है ।।
नई पीढ़ी की आदर्श भाषा का गौरव प्राप्त इसको महान है
नई पीढ़ी को ज्ञानवान बनाती
बनाती सबको विद्वान है
विभिन्न राज्यों की विख्यात भाषा हिन्दी
हिन्दी से हिन्दुस्तान है।।

©️अंकिता वीरेंद्र नारायण
श्रीवास्तव
अयोध्या

Newsहिंदी दिवसशिक्षा

हिंदी दिवस

हिंदी दिवस

हिंदी दिवस

हिंदी सिर्फ़ एक भाषा नहीं,
देश का सम्मान है,
हमें गर्व है अपनी मातृभाषा पर,
जिसने हमें एक पहचान दिलाई,
अपने भाव व्यक्त करने में सहायता पहुँचाई,
दिलों को दिलों से जोड़ती है हिंदी,
हर भारतवासी का अभिमान है हिंदी,
वतन की मिट्टी में ख़ुशबू है हिंदी,
ज्ञान का सागर है हिंदी,
संस्कार का प्रारूप है हिंदी,
अभिवादन में नमस्कार है हिंदी,
हिंदुस्तान के कण-कण में है हिंदी।

✒️ आलोक संतोष राठौर

@ehsaas_ki_awaaz

Newशिक्षागरीब

गरीब

गरीब

क़िस्मत गरीब की भी एक दिन खुदा बदल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,
क़िस्मत गरीब की भी,,,,,

(1) पूरी उम्र गुजारी रहकर के छप्पर छाते,,
राहें बनाई हमने नित महल हम बनाते,,
खुशियाँ मिले जहां बस कोई ऐसा पल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,

(2) रुपयों वाला आके हमकों ये भिक्षा देता,,
करनी पड़े गुलामी हमकों ये शिक्षा देता,,
दुखों का हो निवारण कोई तो हमकों हल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

(3) मर जाये यूँ ही एक दिन राहों में हम तड़पकर,,
फ़िर देख लेना आके तू भी तमाशा जी भर,,
सचिन खुदा के दर पर मुझे साथ लेके चल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
Insta id,, burning_tears_797

ग़रीबीझूठ और फरेब की दुनियादोस्तीNews

कचरे का अंबार

कचरे का अंबार

कचरे का अंबार

–◆◆–◆◆–◆◆–
चारों ओर तूने क्या हाल बना दिया ?
देखते ही देखते, कचरे का अंबार लगा दिया।

खुशबू की फ़िज़ाओं से महकाया था गुलशन को
मानव ने देखो, बदबू फैला दिया।

जानते हैं सभी, के ख़तरा मोल रहा है,
हर बार हाँ बार बार, प्रकर्ति से खेल रहा है
भाषण और काग़ज़ से दबी है ज़ुबान
जान कर खुद ज़हर पी रहा है।

जल , थल, वायु सब मटमैला कर दिया
बीमारियों से देखो घर भर गया
घर की सफाई कर बाहर फेंकता है
फिर रुमाल रखकर वही से गुजरता है।

अब न समझे तो कभी न समझ पाओगे
प्रकर्ति से खेले तो मौत ही पाओगे
मिटना है एक दिन, जानते हैं सब
हाल एहि रहा, तो वक़्त से पहले सिमट जाओगे
हाँ जी हाँ…
अब न समझे तो कभी न समझ पाओगे
प्रकर्ति से खेले तो मौत ही पाओगे

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

मेरी डायरीजीवन में जल का महत्वराधाNews Updates

कोरोना

कोरोना

कोरोना

हम हर एक परिस्थिति से कुछ ना कुछ सीख सकते हैं, कोरोना से हम पहचान किस तरह की होनी चाहिए, यह सीख सकते

कोरोना
इतिहास बना दें ऐसे, जैसे कर दिखलाया कोरोना।
अपने भीतर जितने दुश्मन, है उनका अब नहीं होना।।

झूठ, कपट, आलस्य त्यागकर, हम अधिकारिक विजयी बनें।
किस पथ पर कितना चलना है, ये भी अब हम स्वयं चुनें।।

मंजिल तक जो रस्ता जाता, हम उस रस्ते के हो लें।
अपने हक का हर एक मंज़र, खुद से लूट सके तो लें।।

जो कहता है क्या, क्यों, कितना, खुद प्रतिकारित हो जाएगा।
खुद को, खुद से, खुद में देखें, सब परकाशित हो जाएगा।।

जाना वहां, जहां जाने को निकले कल से कल खातिर।
कर दिखलाना, है हमको कुछ भाषण में तो जग माहिर।।

(एन. के. जैन)
@naman9203

बारिश

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