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Category: Monologues Page 1 of 4

monologues

ख़तरा

ख़तरा

ख़तरा

इंसानों की वजह से इंसानियत अब ख़तरे में है,
जहाँ देखों वहाँ अत्यचार हो रहा है,

कहीं भ्रष्टाचार, जालसाजी , रेप और अनेकों उत्पीड़न हर रोज हो रहे है,
लोग इनको सुनकर अनसुना सा कर देते है,

जो आवाज भी उठाता है तो उसे पैसों की ताकत या धमकियों से दबा दिया जाता है,
या हमेशा के लिए ख़ामोश कर दिया जाता है,

इंसान तो क्या लोग जानवर को भी नहीं बक्श रहे है,
आये दिन रोज नए कत्ल-ए-आम हो रहे है,

लालच लोगों के दिलों में घर कर गयी है,
ईर्ष्या कहें या जलन इसकी आग से हर कोई जल रहा है,

और जल कर ख़ुद के साथ दुसरो को ख़ाक कर रहा है,
उसको अपनी खुशी में खुशी नहीं होती,

बल्कि दूसरों के दुःख और कष्ट देखकर उसे ख़ुशी मिलती है,
पता नहीं लोगों को सताकर लोग कैसे सुकून पाते है,

नारीयों के साथ हो रहें अनेकों अट्टाचार का जिम्मेदार न जानें कौन कौन है,
कभी कभी कुछ नारी ही नारी की स्वयं दुश्मन है जो उसे शिक्षा से रोकती है,

आगे बढ़ने का मार्ग रोकती है,
अशिक्षा से लोग अपने जीवन का महत्व नहीं जान पाएंगे,

कहीं गरीबी है तो कही लाचारी फिर कैसे अपने देश को भविष्य में विशाल बनाएंगे,
किसी के पास खाने को रोटी नहीं,

तो कोई महलों में आराम से सो रहा है,
क्या कुछ नहीं कर सकता था वो,

मग़र अब इसकी जिम्मेदारी भी हर एक आम इंसान को उठानी होगी,
मदद जहाँ हो मुक़म्मल उसे वहाँ पहुँचानी होंगी,

ख़ुद की बुराइयों से लड़कर पहले खुद को स्वच्छ बनाना होगा,
फिर समाज की स्वच्छता की जिम्मेदारी भी उठानी होगी,

नारियों को उचित सम्मान एवं हक भी दिलाना होगा,
उनकी सुरक्षा का भार प्रत्येक व्यक्ति को फ़र्ज़ समझकर निभाना होगा,

बेहतर कल के सपने के लिए हमे आज का वर्तमान सही बनाना होंगा।

ख़तरा

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

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माँ की परवाह

माँ की परवाह

माँ की परवाह, देखों माँ कितनी परवाह करती है हमारी,
एक हम है कि उनके बताएं काम भी लापरवाही से करते है,
वो माँ जो बीमारी में भी बच्चों के लिए खाना बनाकर परोसती है,
हाथ में सबकों पानी भी देती है,
घर का हर काम और जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाती है,
अपने लालन पालन से बच्चों को बड़ा भी करती है,
और बच्चें अपने माँ बाप का ख़याल भी ठीक से नहीं कर पाते,
लापरवाह होकर कभी अधुरा छोड़ देते है तो कभी पूरा कर देते है,
माँ जब पूछ दे बच्चों से एक ग्लास पानी का,
तब उस बच्चें को मोबाइल छोड़ माँ की आवाज़ सुनना भी आफत नज़र आती है,
समय के साथ आज हर कोई लापरवाह होता जा रहा है,
कुछ संशाधन का भी गलत प्रयोग किया जा रहा है,
जो काम हम स्वयं से कर सकते है,
उसके लिए भी कभी न कभी, कहीं न कहीं दूसरों से करवाकर खुद लापरवाह हो जाते हैं ।

@ehsaas_ki_awaaz
✒️Alok Santosh Rathaur

माँ की परवाह

बधाई एवं शुभकामनाएं

विषय मैं निहारती

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बधाई एवं शुभकामनाएं

बधाई एवं शुभकामनाएं

माता पिता जी के वैवाहिक वर्षगांठ पर उनको बधाई एवं शुभकामनाएं

अपने माता पिता जी के वैवाहिक वर्षगांठ पर उनको बधाई एवं शुभकामनाएं देकर उनके व्यक्तित्व को बतलातें है,
उनकें आदर्शों के पद चिह्नों पर चलकर अपना जीवन सफलता की ओर बढ़ाते है,
सूर्योदय से पूर्व उठकर योगाभ्यास एवं अन्य क्रियाएं वे करते है,
तत्पश्चात स्नान कर नित्य प्रतिदिन वैदिक विधि से देवयज्ञ सम्पन्न करते है,
हवन में खीर की आहुति के पश्चात उस खीर का थोड़ा सा अंश भाग पंछियों के लिए रख देते है,
हवन के बाद ही अन्न को ग्रहण करते है,
फिर अपने व्यवसाय पर ध्यान दिया करते है,
अनेकों चिंताओं के बावजूद वह घर का अच्छे से ख़याल रखते है,
माँ खाना बनाकर बच्चों को खिलाती है,
फ़िर घर के अन्य कार्यो में व्यस्त हो जाती है,
थक हारकर कभी कभी कुछ पल के लिए थकान उतार पाती है,
माँ हमेशा ईश्वर का गुणगान कर उनकी इस्तुति में लीन रह कर अपने कार्य सम्पन्न करती है,
पिता जी व्यवसाय के अलावा समय समय पर समाज में भी अपना योगदान देते है,
वृद्धाश्रम, बालकों का छात्रावास एवं अन्य संस्थानों पर आर्थिक और शारिरिक रूप से हर मदद पहुँचाते है,
कैसी भी संकट की घड़ी हो ईश्वर पर अटूट विश्वास रखते है,
अपने माँ बाप का वह ससम्मान आदर सत्कार कर अपने कर्तव्य का हर पालन बख़ूबी से निभाते है।
मेरे माता पिता जी ने हर पल संघर्ष कर अपने परिवार को संभाला है,
अपने प्रेम के अटूट बंधन से सभी संबंधों को जोड़े रखा है।
बस ईश्वर से हम बस यही मनोकामना करते है,
मेरे माता पिता के आशीर्वाद का साया सदैव मुझपर यूँही बना रहे,
उनकी सेवा कर मैं भी उनके जैसा बनकर अपने कर्त्तव्यों का निरंतर पालन करने में सक्षम हो पाऊँ।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

विषय मैं निहारती

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Coffee - A Love Symbol

Coffee – A Love Symbol

Coffee – A Love Symbol, Coffee is a symbol of love when words are scanty. It’s more intimate than I think. Sharing Coffee with you is a cherishing act that should not be indulged in lightly. All I just need is your love. But now a little bit of hot chocolate, cappuccino, whipped cream, or some distinctive milk froth on the top with Peanut Butter Snickerdoodle Tart with Cinnamon Peanut Crust is also enough for me. Furthermore with your Smack on my lips are also there. Finally Over and above we had a perfect Mocha for us.

@her_scribbled_stories
Amruta_Patil

STRIVE

किन्नर

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किन्नर

किन्नर

किन्नर ये शब्द सुनकर ही अनेक लोग विभिन्न प्रकार के ख़याल सोचने लगतें है,
शायद वे उन्हें अपने समाज में कोई स्थान ही नहीं देना चाहतें,
आखिर समाज के लोग क्यों नहीं सोचते कि वे भी तो एक इंसान है,
उसे इंसान की तरह दर्जा क्यों नहीं देते,
समाज ने इतनी ख़राब छवि बनाकर रखी है,
कि लोग इनसे बात करना और देखना भी पसंद नहीं करते,
क्या वे ईश्वर की संतान नहीं है,
जो उन पर ऐसा अत्याचार हर रोज होता है,
इसमें गलती हम सबकी ही है,
हमनें उनको आगें बढ़ने का मौका ही नहीं दिया,
शिक्षा से लेकर हर कार्य तक उनकों उस काम से वंचित रखा,
क्या वह देश के नागरिक नहीं है,
क्या वह देश की उप्लाब्धि में भागीदारी नहीं देते,
उनकों मौका मिलने पर उन्होंने हमसें बेहतर कर के दिखलाया है,
वकील , जज, प्रधान अध्यापक बनकर समाज में अपना नाम गौरव करके भी दिखलाया है।
आज भी बहुत लोगों के अंदर यह गलत अवधारणा बैठी है,
कि किन्नर काम नहीं कर सकतें शिक्षा पर उनका हक नहीं,
केवल कुछ लोग ही उनका साथ देने को आते है,
हम सबकों मिलकर इस गलत अवधारणा को मिटाना है,
सभी कार्यो के लिये उनको हक भी दिलाना होगा,
वो छोटे है या हम बड़े इस भेद को समाज में पूरी तरह से मिटाना होगा,
सबकों बराबरी का दर्जा देकर अपने देश को मिलकर आगे बढ़ाना होगा।

जातिवाद

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✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

एक फौजी के अल्फाज

एक फौजी के अल्फाज……

एक फौजी के अल्फाज……

के लड़कर आया हूँ निभाया हैं धरती माँ के बेटे का फर्ज,
अब जिस कोख से जन्मा उस माँ के बेटे का फर्ज निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना…
मरते दम तक रक्षा की हैं, चुका दिया हैं धरती माँ का कर्ज,
अब मेरी उस माँ का थोड़ा सा दूध का कर्ज निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……..
बहोत साल गुजर गए अपनी प्यारी सी बहन से मिले,
सुनी सी पड़ी इस कलाई में उसके प्यारे से हाथो से राखी बंधवाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना….
मेरी एक साथी भी हैं नीचे, मुझसे दूर रहते हुए भी पत्नी का धर्म निभाया हैं,
बंदूको से तो सारे धर्म निभा लिए ,
अब पति का धर्म निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना…..
उसकी कोख मे पल रही एक नन्ही सी कली जिसके आने का कब से इंतज़ार कर रहा था,
उसे मुझे एक बार पापा कहके बुलाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……..

सन्नी रोहिला

@its_sunnyrohila

एक फौजी के अल्फाज……

शहीद

ह्रदय की पीड़ा

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In the Battlefield

In the Battlefield

In the Battlefield, Standing Lionhearted, Even if the foe is mercy less.
But their Gallantry remains ready for every mess.
The thought of the families comes later on the battlefield.
Expelling the intruders makes their hearts of steel.
The one who even holds kindness for those who destroy.
The one who serves our motherland before families are Indian sepoys.
Destruction is never their job.
Establishing peace around in every heart whoever sob.
Some have old parents to look for.
Some have little angels, neoteric out in the shore.
But they stand United, yet distant with their families on the border.
Their courage, their zeal for our nation can even shrill down a thunder.
Each one of them can kill a hundred with his fortitude.
Their bravery is void of solitude.
Any pain they can swallow, but a single remark over our nation is illegitimate.
Stating this over the enemies’ faces, they don’t hesitate.
Their strength may be taken by the enemies as totally absurd.
But when they kill hundreds of intruders & martyrs themselves pleasantly of our nation, even foes astonishes & says our words

|| Vande Matram ||

– Anshul Jain –

Martyr

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Martyr

Martyr

Martyr,

The best ever person is in the world is an army man and his family
Never lose hope never seen hopeless
Every time having a encourage mindset
Funeral of that is sad
But he not died he called a martyr
A man is an honor who erase herself
To save the county reputation and our life’s
A great salute to that man from the heart
Who sacrifices his whole life for honour of the country

Shubham Shrivastava
@shrivastavas2151

Yours

I Missed You The Other Day

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हम इंसान हैं

हम इंसान हैं

क्योंकि हम इंसान हैं हमें बोलना अच्छा लगता है सुनना नहीं। भगवान ने हमें दो कान और मुंह एक दिया है और हमें याद भी नहीं क्योंकि हम इंसान हैं, खुद गलत होकर भी दूसरों को जज करना हमारी आदत है, गलतियां करके सॉरी बोल देना हमारे लिए बहुत आसान है, क्योंकि हम इंसान हैं ।
जबरदस्ती दूसरों पर अपनी मर्जी थोपना उनकी जिंदगी को वश में करना हमें अच्छा लगता है क्योंकि हम इंसान हैं।
क्यों हम कभी किसी को थोड़ा सा प्यार थोड़ी सी इज्जत थोड़ा सी प्रशंसा नहीं दे सकते ?

क्यों हम लोगों की नहीं सुनते क्यों सिर्फ हमारी ही सुनाते रहते हैं? कभी स्वार्थी न बनकर हम सामने वाले को नहीं सुन सकते ?
आखिर वह भी तो इंसान हैं!

आज एक वीडियो देखकर ऐसा लगा कि सिर्फ एक इंसान को ही नहीं हम सबको किसी के साथ की जरूरत है आज भारत में हर दूसरी मौत का कारण तनाव और अवसाद ही है पर हम उसे नियंत्रित कर सकते हैं उसे कम किया जा सकता है।

सिर्फ थोड़ा सा प्यार और थोड़ा सी प्रशंसा के साथ अपनों को सुनकर तो देखो क्योंकि हम इंसान हैं आज हर कोई परेशान है कि हमारी कोई नहीं सुनता माँ बाप परेशान है कि बच्चे उनकी नहीं सुनते और वही बच्चों को लगता है कि माँ बाप उन्हें नहीं समझते, बॉस को लगता है एंप्लॉय उसको फॉलो नहीं करते तो एंप्लॉय समझते हैं कि बॉस उनकी नहीं सुनते ।

मतलब कहीं अगर सुनने वालों की कमी है तो शायद सुनाना भी लोग पसंद नहीं करते हैं उन सभी से निवेदन है कि वह लोग अपनों से बात करें और अपने आपको जाहिर करना सीखें क्योंकि कुछ चीजें कोई सिखाता नहीं हमें खुद सीखनी पड़ती हैं क्योंकि हम इंसान है।

अक्षय कुमार जी की वीडियो में मैंने सुना था कि दिल औजार से खोलने से अच्छा है कि अपने दोस्तों के साथ खोल लिया जाए तो प्लीज आज ही अपने दोस्तों से बात करें और जाने की उनकी लाइफ कैसी चल रही है शायद आपके किसी दोस्त को इसकी जरूरत हो और यह ना सिर्फ आपके दोस्त की बल्कि आपको अपने आपको जानने में भी हेल्प करेंगी क्योंकि हम इंसान हैं

मुझे उम्मीद है आप लोग कोई अच्छा लगा होगा और आप इसे हर उस इंसान के साथ शेयर जरूर करना चाहेंगे जिसे इस वीडियो की जरूरत है ताकि दोबारा कोई भी अवसाद और नेगेटिविटी की वजह से ख़ुदकुशी जैसा पाप करने के लिए मजबूर ना हो क्योंकि हम इंसान है क्योंकि हम इंसान है।
©️ रजनी अग्रवाल

 

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं

जिंदगी कुछ कमाल कर

From Flesh to Soul

From Flesh to Soul

From Flesh to Soul, Writing about you is not an easy task, but it will put ample sway on your heart that will be everlast. My words are meek to express your appearance, but I can feel every time of your existence.

You are beautiful like roses, and as well as virtuous like muses. When my eyes captured your face first time, your beauty was dazzling but its impact was sublime. Some days had passed very quickly away, now the charm of your face had left the seat and your soul had put on my heart an everlasting sway.

Your face had lost its charm for my eyes, I started to listen to your heart’s silent cries. I found in you that beauty was smiling, but your soul was aching and crying. You opened your burdened heart before me like pages, I read the pages and found a suppressed desire which was waiting for fulfillment for ages.

Since the day you had secured a corner in my empty heart, I made a promise that this was the hand that I would never leave and discard. My meeting was with you as a journey from face to heart, from the heart to soul, from soul to almighty. This was the journey from physical to spiritual. “From the deepest corners of my heart to one of the most concerned person of my life”.

CRY OF SURPRISE

Just Confusion All Around

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