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The Hindi Guruji

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Poetry

खुद्दारी

खुद्दारी

इस जहाँ में खुद्दारी ना होती,
हम ना होते वफादारी ना होती।

अगर इन्सानियत का यही उसूल है,
तो बड़ी बातें करना फिजूल है।

हैवान जब तुम्हारे अन्दर खड़ा है,
मेरी मानो जानवर तुमसे बड़ा है।

फर्ज और कर्म दोस्तों वाली करता हूँ,
चोरों से घर बचा पर्व दिवाली करता हूँ।

खुद भले तुम्हारी गालियों से रोता हूँ,
तुम्हारे घर की हर पल रखवाली करता हूँ।

हैवानियत के चक्रव्यूह में फस जाते हो,
नाग बन आकर मुझे ही डस जाते हो।

जख्म देकर मुझे आखिर क्या करते हो,
खुद से ही तुम क्यों दगा करते हो।

मैनें मालिक के आगे हमेशा सिर झुकाया है,
तुम्हारे नमक का मैंने ऋण भी चुकाया है।

तुमको वो सब तो दे दिया है मैंने,
अंश भोजन का जितने तुम्हारा खाया है।

हमारे बिना तुम्हारे वाली कौन करेगा,
मार खाकर भी घर की रखवाली कौन करेगा।

✍🏻साक्षी😊
@_sakku_writes

खुद्दारी

भावना एहसासख़तराफर्ज़, News-Updates

भावना एहसास

भावना एहसास

भावना एहसास

इन आँख की बारिश को, जो पानी कहता है,
एहसास के मंज़र है, जो झूम के बरसता है।
कोहराम जो दिल में मची रहती है अक्सर
वही फुटकर तो ज्वालामुखी बनता है।

जिस रोज़ ये दिल को एहसास न होगा
याद रख, तू भी कभी पास न होगा
दुआ भी तेरे , कभी काम न आएगी,
तू भी खातिर मेरे, कोई खास न होगा।

नाज़ुक से दिल को, कभी दर्द न पहुंचाना।
वरना आंसुओं की, बरसात नज़र आएगी।
सराबोर हो जाएगी, ये रूह भी तेरी,
ये बवंडर फिर एक दिन, तुझे बहा ले जाएगी।

बंजर सी ज़मीन, बन कर रह जायेगी।
उजड़े चमन में, कली भी न आएगी
तड़प तड़प कर निकल जायेगी रूह
एहसास जब तेरे दिल से निकल जायेगी
दुनिया तुझे सिर्फ, देखते रह जायेगी।
तड़प तड़प कर निकल जायेगी रूह
दुनिया तुझे सिर्फ, देखते रह जायेगी।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

भावना एहसास

ख़तरा,फर्ज़ , News Updates

फर्ज़

फर्ज़

फर्ज़

हमें अपनी ज़िम्मेदारियाँ भी बोझ लगती हैं,
उनको निभाने में हमें हर्ज होता है,
सोचो कैसे वो कंधे कभी नहीं झुकते,
जिनपे पूरे मुल्क का फ़र्ज़ होता है।

जन्म बेशक नहीं देती वो मगर,
अपने सीने पे पाँव रख, चलना सिखाती है।
सुकून कितना है उसके लिए मर मिटने में,
ये एक फौजी की शहादत दिखाती है।

हम तो हर लम्हा अपने हिसाब से जीते हैं,
उन्हें शायद ही उनके मन की चीजें भी मिलती होंगी।
सोचो दहशत का क्या आलम होता होगा,
जब दोनों ही ओर अनगिनत लाशें गिरती होंगी।

जब शरहद से किसी की शहादत की ख़बर आती है,
तो वो अखबारों और समाचारों में नवाब हो जाते हैं।
उस शहादत की कीमत कोई उस माँ से पूछो,
जिसके सारे अरमान, अब महज़ ख़्वाब हो जाते हैं।

वो पिता जो अपने बेटे को कन्धा देता है,
उसका पूरा आसमान ज़मीं पे होता है।
वो गर्व से सर भले ही ऊँचा रखता हो,
पर अंदर ही अंदर बिलख के रोता है।

किसी के सिर का साया,
किसी के बुढ़ापे का सहारा।
किसी के लिए बेगरज़ यार,
किसी के लिये जश्न-ए-बहारा।

‘हम जल्दी ही फिर मिलेंगे’ ,
ये हम सभी के लिये महज़ एक वादा है।
इसमें कितना दर्द है, ये उस फौजी से पूछो,
जिसे मालूम ही नहीं कि तकदीर का क्या इरादा है।

कई बार अज़ीम ख्वाइशों का अधूरा रहना लाज़िम है।
यही बतलाता है की वोह मालिक ओर तू मुलाज़िम है।

वो इस तरह से तेरे बुलंद हौसलों में हुआ शामिल है।
के जहां तूने इशारा किया वही इरादा हुआ कामिल है।

तू खुद एक मंजिल है ओर तुझे हो रही सफर की तलाश है।
अरे देख तो सही मंजिलों के लिए चल रही कितनी
ज़िन्दालाश है।

न जाने कितनी ही मिन्नतें की ओर कितने ही विफल प्रयास है।
पर जब मिली है मुरादबक्श होने की शफा तो क्यों लगाने क़यास है।

ज़ेहन में तेरे अभी भी बेराहमो से रहम की आस है।
मगर खुद तो सुकून भरी रहमत की बरसात है।

-अंजली कश्यप
@scribbling_writer

फर्ज़

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विषय मैं निहारती

विषय मैं निहारती
वसुंधरा के पावन पथ पर मैं निहारती आम के पल्लव को
मैं समीर के झोंकों में मंत्रमुग्ध हो निहारती खग के कलरव को
मैं पावक की गर्माहट सेक कर मारुत के वेग को साधती
मैं आनंदमय हो निहारती जलधि के जल को।।

सूरज के उष्म को देख कर मैं निहारती शशि के शीतल को
मैं दसों दिशाओं का अभिवादन कर निहारती वन और उपवन को।।

मैं देखती मयूर का नृत्य
मैं देखती संसार का कृत्य
मैं निहारती गुलमोहर के तरुवर को।।

मैं देखती देवदार के बाग
मैं देखती वाद्ययंत्र का राग
मैं निहारती विशाल सागर को।।

हिमालय की वादियों का चिंतन कर मैं निहारती जीवन के उत्सव को
अम्बर के सानिध्य में मैं निहारती काल के गौरव को।।

©️Ankita Shrivastava Ayodhya Uttar Pradesh

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivast

करें क्या ???

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करें क्या

करें क्या ???

करें क्या ???
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ऐ वक़्त तू बता, आखिर करें क्या?
डरने लगी है ज़िन्दगी, तो डरे क्या?

कुछ काँच के टुकड़े, चुभे हैं पाऊं में
सहारा बैसाखी का लेकर, बढ़ें क्या?

तूफान भी अक्सर , टकराने लगी है।
हौंसलों की उम्मीद के साथ, अड़े क्या?

पर्वत ऊंचा है, तो ऊंचा ही सही।
कमर में बांन्ध कर रस्सी, चल चढ़ें क्या?

मिटा दे हस्ती, इतना आसान नही नीलोफ़र
गद्दार खड़ा है सामने, तो चल लड़ें क्या?

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

किन्नर

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STRIVE

STRIVE

STRIVE

Every time I strive to live life with a positive vibe

Instead, to left situation, I strive to face and solve it

Strive to cross the difficult part of life

Strive to live in the order of word of god

It’s a part of life till the dead-end come of life

We will strive in every hard and soft part to get a happy and healthy life

Shubham Shrivastava

@shrivastavas2151

जातिवाद

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Affogato - Coffee And You

Affogato – Coffee And You

Affogato – Coffee And You

A shot of espresso and Frangelico this combination of affogato reminds me that you love to Smack me intensely but instead of that you choose to graze me gently.

#microfiction

@her_scribbled_stories
Amruta_Patil

 

Connection

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Connection

Connection

Connection, He Connected himself to her breath and Slowly started Discovering what he loved the most. Finally, he embraced her light in the darkness and loved her like a Goddess.

@her_scribbled_stories
Amruta_Patil

Way of Thinking

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Way of thinking

Way of Thinking

Thought of the miracle won’t do for you,
Thought of the hard work is all about you
Way of thinking makes a difference,
The confidence in you is the only sixth sense’

A thought of easy-going won’t go with your fame,
A thought of struggle will cure every tame
Way of thinking makes a difference,
The confidence in you is the only sixth sense’

Thought of taking is not the worth doing of you,
Thought of giving is the art of the real person in you
Way of thinking makes a difference,
The confidence in you is the only sixth sense’

A thought of atheist will never help you on the land,
Thought of the spiritual will get you the pace in the heaven world.
Way of thinking makes a difference,
The confidence in you is the only sixth sense’

Insta- @kabiryashhh

The Man in a Cage

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The Man in a Cage

The Man in a Cage

The Man in a Cage

Sitting in here, I wonder.
Feeling the stare at me, I shudder.
Why the monkey is laughing at me.
Is that because I am clogged, & he is free?
I look at another side.
There, some bears were having laughter tide.
Birds were also laughing & chirping.
Child animals were being taught about me while snuggling.
There were being all around me.
But still, I was the only one with me.
I wanted to come out but couldn’t, so only throbbing.
Deep down my heart was envying them, & sobbing.
I was missing my family, my heart was agonizing for them.
I was their only elm.
I don’t know how I ended up in a cage.
With each passing second I fume in rage.
I just couldn’t understand what was happening or what to do.
Just then I read the board at the end, which says Welcome to the Human Zoo.

– Anshul Jain –

The Man in a Cage

My Motherland

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