जिंदगी की परिक्षा…

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एक उम्र बीत जाती हैं जिंदगी की परिक्षा देते

एक उम्र बीत जाती हैं,
नाम कमातें, मान कमातें!
अपनों का जीवन संवारने में,
एक उम्र निकल जाती हैं!
जब तक कमाया,
खुब लुटाया!
अब करतें-करतें,
बुढ़ापा आया!
जिंदगी निकाली,
सबका किया!
तब जाकर यें,
खुशनुमा बुढ़ापा आया!
जाने क्या दिन थें वो,
मुंह से निकालने से पहले,
सबकुछ हाज़िर किया था कभी!
अब खट्तें-खट्तें,
दिल भर आया!
उम्र निकल जाती हैं,
इज्ज़त कमाने में!
एक फावड़ा, एक करची,
बस इतना ही था मेरे पास!
और आज देखों जीवन में,
कुछ भी ना खोया हैं!
बस उम्र निकल गई,
और बुढ़ापा आया हैं!
बुढ़ें हो गए तो क्या,
दिल तो आज भी ज़वान हैं!
बुढ़ापा आया हैं,
संग ढेर सारी खुशीयां लाया!
बच्चों का प्यार,
पोते-पोतीयों का सरकार!
एक भरा-पूरा परिवार,
खुशीयों से भरा मेरा सुखी संसार!
उम्र भर न रखी खवाहिश कोई,
बस करता रहा प्रयास कई!
जीता रहा उम्र भर अपनों के लिए,
अब मैं जीऊँगा अपने लिए!
आई हैं अब बारी मेरी,
मिलकर जीयेंगे उम्रभर!
बस बहुत हुआ सहना,
अब हैं खुलकर जीना!
उम्र निकल गई तो क्या,
अब भी आग बाकी हैं!
बस जीयेंगे खुलकर,
उम्र तो बस एक कहनें की बात हैं!
खुद भी हंसों और हंसाऔ,
उम्र तो बितनी हैं बीत ही जाती हैं जिंदगी की परिक्षाएं देने में!

©दीपशीखा अग्रवाल!

गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…

चारो ओर है अंधेरा न हुआ अभी सवेरा,
बस यूँही ढलते जा रही, गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…..
न हमे खबर उसकी,न उसे खबर हमारी,
बस यूँही चलते जा रही गुमनाम सी ये ज़िन्दगी…..
न तपन आग की हैं, न धूप सावेर की है,
न जाने फिर भी क्यों जलते जा रही गुमनाम सी ये ज़िन्दगी….

-सन्नी रोहिला

मंजिल एक रास्ते अनेक…

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मंज़िल एक रास्ते अनेक
गुजरना है या गुजर जाना है

रिश्ता एक अंजाम अनेक
निभाना है या निकल जाना है

दोस्त एक दुश्मन अनेक
डरना है या डरा जाना है

परिवार एक रिश्तेदार अनेक
सुन्ना है या सुना जाना है

प्यार एक धोके अनेक
जीना है या मर जाना है

मजिल एक रास्ते अनेक
तुझे चलना है आगे बढ जाना है

Written by :-नितिन मंगल ( रूहानी मोहब्बतें)

मैं तुमसे बेहतर हूँ मगर….

मैं तुमसे बेहतर लिखता हूँ, पर जज्बात तुम्हारे अच्छे है
मैं तुमसे बेहतर दिखता हूँ, पर अड़ा तुम्हारी अच्छी है
मैं खुश हरदम रहता हूँ, पर मुस्कान तुम्हारी अच्छी है
मैं अपने उसूलों पर चलता हूँ,पर जिद तुम्हारी अच्छी है
मैं एक बेहतर शख्सियत हूँ,पर सीरत तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बहुत बहस करता हूँ, पर दलीले तुम्हारी अच्छी है
मैं तुमसे बेहतर गाता हूँ,पर धुन तुम्हारी अच्छी है
मैं जितना कुछ भी कहता हूं, पर हर बात तुम्हारी अच्छी है

Written by :- सखा

चाहे जो भी है तू…

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चाहे जो भी है 
मेरा प्यार है तू
आँगन में चहकती चिड़िया है तू
बागों में महकती कालिया है तू
समुन्दर की उठती लहर है तू
लहरों की कतार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
मेरी रातों का महताब है तू 
मेरी सुबह का आफताब है तू
बादल से बरास्ता नीर है तू
पूजूं तुझे मेरा पीर है तू 
कश्ती में पतबार है तू
मेरा यार है तू
जो भी है मेरा प्यार है तू ।
अपने पिता की मुस्कान है तू
अपनी माँ का सारा जहां है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू ।
हाथों का कंगन है तू
माथे प' चमकता चन्दन है तू।
मेरे हाथों की लकीर है तू
रहमत खुदा की औ' तकदीर है तू
मेरे लबों का रसपान है तू
अच्छा सुन, मेरी जान है तू।।

©piyu_agrawal

तेरा इश्क़ ही तो है…

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तेरा इश्क़ ही तो है,
जो टपकता अश्क़ बन के
बहता मेरे तकिये तले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो रिझाता मुझे ख्वाब बन के,
पाकर जिसे मेरा दिल खिले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो तड़पाता मुझे याद बन के,
सोचकर जिसे मेरा दिन बने।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो महताब सा ठंडा,
निहार कर जिसे मेरी रात बने।
तेरा इश्क़ ही तो है
जिसकी दीवानगी ये दिल सहे,
यादों में जिसकी ये दिल रहे।
हाँ ,हाँ तेरा इश्क़ ही तो है।।

‘अकेलापन’ और ‘एकांत’

'अकेलापन' और 'एकांत'
'अकेलापन' और 'एकांत'
‘अकेलापन’ इस संसार में

सबसे बड़ी सज़ा है.!
और ‘एकांत’
सबसे बड़ा वरदान.!

ये दो समानार्थी दिखने वाले
शब्दों के अर्थ में
आकाश पाताल का अंतर है।

अकेलेपन में छटपटाहट है,
एकांत में आराम.!

अकेलेपन में घबराहट है,
एकांत में शांति।

जब तक हमारी नज़र
बाहरकी ओर है
तब तक हम
अकेलापन महसूस करते हैं.!

जैसे ही नज़र
भीतर की ओर मुड़ी,
तो एकांत
अनुभव होने लगता है।

ये जीवन और कुछ नहीं,
वस्तुतः
अकेलेपन से एकांत की ओर
एक यात्रा ही है.!

ऐसी यात्रा जिसमें,
रास्ता भी हम हैं,
राही भी हम हैं और
मंज़िल भी हम ही हैं.!!

घर में अकेलापन नहीं अपनापन है इसका आनंद लीजिए।