Complete Blogger Platform

The Hindi Guruji

Category: Hindi Page 2 of 10

Poetry Hindi

गिनती के यार

गिनती के यार

गिनती के यार,

तुम्हारी जिंदगी में ठहर जाए ,
भले वो बहता हुआ दरिया हो,
जिसके दायरे में तकलीफें न हो,
जो तुम्हारी खुशियों का जरिया हो।

जिनपे जान वार सको,
जिनसे प्यार कर सको,
जायज़ जिनका इंतजार हो,
जिनका तुमपे तुमसे
पहले अधिकार हो।

बस अपनी मुट्ठी में समेट लो,
इनके होते इतने ही गम बचेंगे ,
बेगरज़ जो तुम्हारे होंगे,
ऐसे बस गिनती के यार मिलेंगे।

जिनपे पूरा हक़ हो,
जिनका होना गुड लक हो,
जिनकी सीधी हरकत पे भी,
हर बार बेमतलब का शक़ हो।

खुद के आँसू छिपा ले भले,
तेरी शिकन का भी हिसाब रखते हैं,
वो तेरे लिये लड़ ले दुनिया से भी,
जो चेहरे पे
मासूमियत का नकाब रखते हैं ।

हम उम्र भर धागे बांधकर ,
कितनी ख्वाईशों के लिये सजदे करते हैं,
जिन्हे नसीब से मिले हैं उन्हे पूछो,
वो हर दुआ में बस दोस्ती रखते हैं।

-अंजली कश्यप

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं

मोहजाल में फंसी राधिका

जिंदगी कुछ कमाल कर

Real Time News Updates

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं

प्रकृति की सुरक्षा अनावश्यक हैं, लंबे सुंदर पेड़,
पर्यावरण के सुंदर दृश्य।
उन खूबसूरत झीलों के मनोरम दृश्य,
बहने वाले झरने और नदियाँ।
उन अजीब रंगीन फूल,
वे नेत्र-सुखदायक सूर्योदय और सूर्यास्त।
सर्दियों के दौरान कि बर्फबारी,
कि बारिश की बारिश से मंत्रमुग्ध।
माउथवॉटरिंग फलों की वह खुशी,
फूल चूसने वाले अमृत का वह आनंद।
सब कुछ इतना अद्भुत,
सब कुछ इतना सुंदर।
सब कुछ इतना शुद्ध,
सब कुछ इतना उदार।
सब कुछ इतना आकर्षक,
सब कुछ इतना उड़ाने वाला मन।
कुछ भी नहीं बर्दाश्त क्षति,
मौत को कभी बर्दाश्त नहीं किया।
लेकिन अब हम कई पौधों, जानवरों और सभी जीवित प्राणियों की मृत्यु को देखते हैं,
नहीं, हम उनके निर्माता नहीं थे और इसलिए हमें उन्हें मारने का अधिकार भी नहीं है।
वे इस खूबसूरत वातावरण का एक हिस्सा हैं,
वे इस ईश्वर की बनाई दुनिया का हिस्सा हैं।
लेकिन अब इंसान बदल गया है,
उसने अपने लाभ के लिए प्राकृतिक वातावरण को मारना शुरू कर दिया है।
सूर्य की किरणें जो लंबे समय तक खेलने में असीम आनंद देती हैं,
जीवन को नष्ट करने वाले में बदल गए हैं।
चाँद और तारे बहुत दूर,
चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण ब्रीफिंग हम पर श्राप देता हैं।
अब पर्यावरण टुकड़ों में बिखर गया है,
समय बीतने के साथ वहां की प्राकृतिक सुंदरता विलुप्त हो रही हैं।
लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाएं कठोर मौसम की वजह से होती हैं,
लेकिन हम इंसान पीड़ित हैं।
यहाँ भी वे शिकायत कर रहे हैं,
उनकी गलतियों को छोड़कर नहीं।
इस खूबसूरत स्वर्गीय जगह को बनाते हुए,
प्राकृतिक अंतिम संस्कार का घर और इससे ज्यादा कुछ नहीं।
पानी बर्बाद हो रहा है,
वायु प्रदूषित हो रही है।
नदियों की हत्या की जा रही है,
शांति की आशाओं के साथ धरती को पाला जा रहा है।
इस तरह प्राकृतिक वातावरण का क्रूर अंत हो रहा है,
इसे रोक! यह आपके लिए ही है।
यह था, यह है और यह आपको और हमेशा के लिए लाभान्वित करता रहेगा,
जरा ध्यान रखना।
ज़्यादा पेड़ लगाओ,
पानी बर्बाद करना बंद करो।
हाथ मिलाएं और इसे बचाने के प्रयास शुरू करें,
इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

दिन अब आश्चर्यजनक लग रहे हैं,
अब केवल शुद्ध वातावरण हैं कोई प्रदूषण नहीं।
प्रकृति को मनुष्यों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा हैं,
अब प्रकृति भी अपना बदला इंसानों से लेगी।
सतर्क रहें और इसे नुकसान न पहुंचाएं,
सुरक्षा करें एवं सुरक्षा पाएं।
क्योंकि जहां यह पोषण करना जानती हैं,
वहीं वह तबाही मचाना भी जानती हैं।

©️दीपशिखा अग्रवाल! 😍

विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💚

जिंदगी कुछ कमाल कर

मोहजाल में फंसी राधिका

Real Time News Updates

ऐ जिंदगी कुछ कमाल कर

जिंदगी कुछ कमाल कर

ऐ जिंदगी कुछ कमाल कर
बची हिम्मत को जुगाड़ कर

हो न जाय यहाँ बेकार सब
तेरी हस्ती की देखभाल कर

ये मुसीबते आना लाज़मी है
तेरे पथ के हर एक पड़ाव पर

यूँ न बैठ वक्त पर हाथ धरे
जरा ग़ोर कर तेरे हाल पर

ये दरिया है दलदल से भरा
ज़रा जाना इस पर सम्भाल कर

लक्ष्य मुक्कमल हो तेरा
अब कुछ ऐसा चमत्कार कर

मेहनत की इस फ़ेहरिश्त में
तेरा नाम हो पहले स्थान पर

BY Vishvajeet singh Rathore

मोहजाल में फंसी राधिका

बेवज़ह

Real Time News Updates

मोहजाल में फंसी राधिका

मोहजाल में फंसी राधिका

मोहजाल में फंसी राधिका,
कृष्ण को जग‌ भर में ढुंढे।

कृष्ण के पीछे भागे,
बस कृष्ण कृष्ण की ही माला जपे।

मोहन तो ठिठोली करें,
राधे को परेशान करें।

ना जाने सत्य – असत्य,
बस कृष्ण कृष्ण का‌ ही नाम जपे।

लागे कान्हा‌ एक महान और प्यारी,
बाकी दुनिया तुच्छ लगें।

खुद ही ना‌ जाने क्या वो चाहें,
खुद ही ना‌ जाने क्यों वो चाहें।

भय की बाधा दूर हो गई,
मोह रूपी बाधा संग अब भेंट हुई।

जग का मोह छुट गया,
बस कृष्ण रंग एक राधिका पर चढ़ गया।

सुध-बुध खो मोहन रंग जाई,
सुध-बुध खो अब‌ राधिका तो जग से भी बिसराई।

मोहन मोह का बंधन तोड़े,
राधा रानी तो मोह को ही प्रेम समझे।

ना जाने कृष्ण लीला,
बस रंगी उसके रंग में और करें प्रेम रासलीला।

जग से बैरी हुई,
जब से कृष्ण मोह से मित्रता भई।

मोह बंधन में बंधी राधिका,
बस कृष्ण कृष्ण करें राधिका।

मोहजाल में फंसी राधिका,
बस एक कृष्ण को ही अपना माने राधिका।

मोह जाल में फंसी राधिका,
अपने अंदर समाए कृष्ण को सारे जग में हैं ढुंढ रहीं।

मोह जाल में फंसी राधिका,
मोह को ही प्रेम समझ रहीं।

नहीं समझती बात कृष्ण की,
कृष्ण के खातिर कृष्ण से ही लड़ रहीं।

अपने तो सब मगर,
राधिका केवल कृष्ण को ही एक अपना मान रहीं।

मोहजाल में फंसी राधिका,
बस कान्हा को ही एक अपना मान रहीं।

मोह जाल में फंसी राधिका,
अपनी सुध-बुध ही खो‌ बैठी हैं राधिका।

कृष्ण तो समझाना‌ चाहें,
मगर वृषभान दुलारी को तो कुछ भी समझ नहीं आए।

©️दीपशिखा अग्रवाल!

 

Also Read

Real Time News Updates

बेवज़ह

बेवज़ह

बेवज़ह, न जाने क्यों
आज दुःख गायब है भीतर से

न जाने क्यों
आज मै खुदको समय से पहले पा रहा हूँ

न जाने क्यों
आज ये आसमां बड़ा नज़र आ रहा है

न जाने क्यों
आज सब कुछ नया सा लग रहा है

न जाने क्यों
आज वो हो रहा है जो बरसो से नही हुआ

न जाने क्यों
आज संतोष सा है मन में

न जाने क्यों
आज मै खुश हूँ बेवज़ह

Vishvajeet Singh Rathore✨

Unconditional Love of Shepherd

गौरैया

News Updates

नादान इश्क़

नादान इश्क़

नादान इश्क़, उनके इश्क़ के किस्से खुब मशहूर हुए,
कभी लैला-मजनू तो कभी शीरिन-फरहाद कहलाए गए।
और किसमत तो देखो उनकी,
वक़्त ने भी उनका बहुत साथ दिया।
जितने मशहूर उनके इश्क़ के चर्चे थें,
जातीं के नाम पर उतनी ही दर्दनाक मौत उन्हें नसीब हुई।
इश्क़ तेरे भी अजीब ढंग हैं,
कभी हंसाती हैं तो कभी रूलाती हैं।
कभी-कभी तो सचमुच जान ही ले लेतीं हैं,
कभी-कभी तो सचमुच जान ही ले लेतीं हैं।

©दीपशीखा अग्रवाल!

तुम हो या ना हो

खुशी परिवार था

24X7 News Updates

गौरैया

गौरैया

गौरैया, 
छत पर बैठी गौरैया,
हर्षित करती मैन का कोना,
चंचलता को देखने उसकी,
ले जाता गोंदी दोना।।

गेंहू के कुछ दाने जो,
बिखर रहे हैं इधर उधर,
चीं चीं करते रहकर चुगती,
फुदक फुदक कर इधर उधर।।

आकस्मिक एक शैतान जगा,
न जाने क्या मन में आया,
न देख सका उसकी चंचलता,
पड़ा एक कुदृष्टि का साया।।

लगा घात था बैठा कोई,
उसे सभी अनभिज्ञ लगा,
हो गए प्राण त्वरित छू मंतर,
कंकर ज्यों छूट गुलेल लगा।।

कितने निष्ठुर हो गए हैं हम,
न कुछ मात्र दया का भाव रहा,
इस मानव के मन के कारण,
किस किसने है घाव सहा।।

जब कोई प्यारी गौरैया देखो,
थोड़ा स्नेह जता देना,
होकर इन्द्रिय बशीभूत,
न कोई घाव लगा देना।।

✍✍© Mohit

तुम हो या ना हो

तुम ही आना

माँ तू ही सब कुछ हैं

Also visit our tech blog

तुम ही आना

तुम ही आना

तुम ही आना

बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।
ईरादे फिर से जाने के,
नहीं लाना तुम्हीं आना।

एक खुबसूरत रिश्ता हैं हमारा,
एक अनोखा बंधन हैं हमारें दरमियाँ।
इश्क़ हैं यह जान गए हैं हम,
बस तेरी यादों के सहारे जी रहें हैं हम
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

आज फिर बरसों बाद उसकी याद आ गई,
रातभर रोने के बाद एक मुस्कान लौट आई।
नहीं जानती थीं के खुदा फिर एक बार,
उसके पास ला रहा था मुझे।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

एक उदास दिल को सुकून मिल गया,
हाँ एक बार फिर सिर्फ उसी की वजह से मैं जी गई।
शायद उसकी याद न आती अगर,
तो खुद को कोस-कोसकर मर जाती मैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर फिर उसकी याद आई,
और मेरी आत्मा को छु गई।
प्यार अधूरा था मगर सच्चा था,
शायद इसीलिए तो खुद खुदा ने भी उसकी याद दिलाई।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

बरसों पहले एक बार जीना भूल गई थी मैं,
तब उसीने आस बांधी थीं।
आज जब फिर ऐसा लगा के मर रहीं हूँ मैं,
सब मेरी ही गलती हैं और सब मैनें ही बिगाड़ा हैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

तब फिर वो याद आ गया,
और मुझे मरने से बचा लिया।
इश्क़ हैं या ईबादत या कुछ और मैं नहीं जानती,
ना आज तक समझ पाई हूँ और शायद न कभी पाऊँ।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर जब भी जिंदगी बोझ लगने लगती हैं,
वो हमेशा याद आ जाता हैं।
उसके बिना जी रहीं हूँ मैं,
और जीते रहूँगी ये जिंदगी भला कभी रुकीं हैं क्या किसी के लिए।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

मगर फिर भी यही सोचतीं रहतीं हूँ मैं,
के बिना उसे जाने बिना पहचानें कैसे हमेशा वो ही याद आ जाता हैं मुझे।
न कोई नाता ना कोई संबंध,
फिर भी क्यों वो ही याद आता है मुझे।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

जब भी उसे याद करु हंस पड़तीं हूँ मैं,
फिर खुदको एक नन्हा सा बच्चा पातीं हूँ मैं।
पाना नहीं चाहतीं उसे शायद न पाकर भी पा चुकीं हूँ उसे,
मगर ये कैसा अद्भुत अद्वितीय नाता हैं यहीं सोचतीं रह जाती हूँ मैं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

एक नन्हा बालक जाग उठता हैं मेरे अंदर,
और बस उसी बालपन में मग्न होकर सभी चिंताएँ भूल जातीं हूँ मैं।
क्या हैं ये पता नहीं,
क्यों हैं ये पता नहीं।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम्हीं आना।

कभी उससे कहाँ नहीं,
कभी उससे सुना नहीं।
मगर फिर भी न जाने क्यों,
जब खुद को खो देतीं हूँ उसे पा जातीं हूँ।
बहुत आई गई यादें,
मगर इस बार तुम ही आना।

तुम ही आना

©DEEPSHIKHA AGARWAL!

माँ तू ही सब कुछ हैं

मसान

Also Visit Our Tech Site

माँ तू ही सब कुछ हैं

माँ तू ही सब कुछ हैं

माँ तू ही सब कुछ हैं

शिव की शक्ति तू,
विष्णु की लक्षमी तू।

ब्रह्मा की सरस्वती तू,
इंद्र की इंद्राणी भी तू।

काली तू,
महाकाली तू।

अंत भी तू,
आरंभ भी तू।

अश्रु भी तू,
आनंद भी तू।

जगतजन्नी तू,
जगतमाता भी तू।

माता तू,
विधाता तू।

प्राण भी तू,
स्वांस भी तू।

जीवन तू,
मृत्यु भी तू।

जीवन का आधार भी तू,
जीवन का संहार भी तू।

काल भी तू,
महाकाल भी तू।

जिंदगी की डोर भी तू,
जिंदगी की आखिरी उम्मीद भी तू।

कृष्ण की राधिका प्यारी भी तू,
कृष्ण की रूकमणी भी तू।

राजकुमारी भी तू,
रानी भी तू।

श्राप भी तू,
आशीर्वाद भी तू।

कर्म भी तू,
धर्म भी तू।

इच्छा भी तू,
अनी इच्छा भी तू।

भकित भी तू,
शक्ति भी तू।

आशा भी तू,
निराशा भी तू।

विचार भी तू,
निष्कर्ष भी तू।

ज्ञान भी तू,
अज्ञान भी तू।

माँ तू ही धनवान हैं,
माँ तू ही सब कुछ हैं।

©DEEPSHIKHA AGARWAL!

STOP CHILD ABORTION

Bachpan (In Indian Language)

Dear Mummy

5 Best Books to Read…

छलीया छल कर गया

छलीया छल कर गया

छलीया छल कर गया

प्रतिबंधित हैं इश्क़ मेरा,
कोई बंधन नहीं अब हमारें दरमियाँ!

नाराज़ हैं वो मुझसें,
के तानें मारतें हैं रहतें!

कहते तुम बदल गए,
और खुद खफ़ा रहतें!

ज्यादा कुछ नहीं,
एक दोस्त की ख़वाईश थीं मेरी, वो भी अब न रहीं!

याद हर रात सता जाती हैं,
सवेरा आईना दिखाती हैं!

कहती हैं ओ पगली,
वो छलीया था तुझे छल गया!

दर्द जिंदगी में भर गया,
वो तो गया अब तु भी आगे बढ़!

इस जिंदगी में सिर्फ तो एक नहीं था,
कई आए कई गए!

फिर वो ही तुझे क्यों इतना याद आए?
पता नहीं क्या रिश्ता हैं उससे?

ना जाने क्या अलौकिक बंधन हैं उससे,
के कुछ न होते हुए भी सबकुछ हैं उससे!

उससे और सिर्फ उसीसे,
उसीका होना चाहें मन पर फिर भी हो ना पाएं हम!

एक जुनून सा सर पे सवार था मेरे,
आज भी हैं और कल भी रहेगा!

कुछ यूँ दूर हुए वो हमसे,
के हमारा सब लें गए वो हमसे!

बस अपना और सिर्फ अपना,
बना गए वो हमको!

कुछ अपना छोड़ गए,
कुछ हमारा लें गए!

न जाने क्या रिश्ता था उनसे,
के अपने न होकर भी सिर्फ़ अपना बना गए वो हमको!

कुछ पता नहीं क्या आलम- ए- जिंदगी होती,
शायद खुश शायद नाखुश!

मगर बेज़ार होती यें जिंदगी,
मगर बेज़ार होती यें जिंदगी!

©दीपशीखा अग्रवाल! 😍

खुशी परिवार था

परिवार एकता और प्यार से बनता हैं

Also Visit our Tech News Site…

Page 2 of 10

Powered by Create a website or blog at WordPress.com