माँ की परवाह-

माँ की परवाह

माँ की परवाह-

देखों माँ कितनी परवाह करती है हमारी,
एक हम है कि उनके बताएं काम भी लापरवाही से करते है,
वो माँ जो बीमारी में भी बच्चों के लिए खाना बनाकर परोसती है,
हाथ में सबकों पानी भी देती है,
घर का हर काम और जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाती है,
अपने लालन पालन से बच्चों को बड़ा भी करती है,
और बच्चें अपने माँ बाप का ख़याल भी ठीक से नहीं कर पाते,
लापरवाह होकर कभी अधुरा छोड़ देते है तो कभी पूरा कर देते है,
माँ जब पूछ दे बच्चों से एक ग्लास पानी का,
तब उस बच्चें को मोबाइल छोड़ माँ की आवाज़ सुनना भी आफत नज़र आती है,
समय के साथ आज हर कोई लापरवाह होता जा रहा है,
कुछ संशाधन का भी गलत प्रयोग किया जा रहा है,
जो काम हम स्वयं से कर सकते है,
उसके लिए भी कभी न कभी, कहीं न कहीं दूसरों से करवाकर खुद लापरवाह हो जाते हैं ।

@ehsaas_ki_awaaz
✒️Alok Santosh Rathaur

भावना एहसास

फर्ज़

माँ की परवाह-

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खुद्दारी

खुद्दारी

इस जहाँ में खुद्दारी ना होती,
हम ना होते वफादारी ना होती।

अगर इन्सानियत का यही उसूल है,
तो बड़ी बातें करना फिजूल है।

हैवान जब तुम्हारे अन्दर खड़ा है,
मेरी मानो जानवर तुमसे बड़ा है।

फर्ज और कर्म दोस्तों वाली करता हूँ,
चोरों से घर बचा पर्व दिवाली करता हूँ।

खुद भले तुम्हारी गालियों से रोता हूँ,
तुम्हारे घर की हर पल रखवाली करता हूँ।

हैवानियत के चक्रव्यूह में फस जाते हो,
नाग बन आकर मुझे ही डस जाते हो।

जख्म देकर मुझे आखिर क्या करते हो,
खुद से ही तुम क्यों दगा करते हो।

मैनें मालिक के आगे हमेशा सिर झुकाया है,
तुम्हारे नमक का मैंने ऋण भी चुकाया है।

तुमको वो सब तो दे दिया है मैंने,
अंश भोजन का जितने तुम्हारा खाया है।

हमारे बिना तुम्हारे वाली कौन करेगा,
मार खाकर भी घर की रखवाली कौन करेगा।

✍🏻साक्षी😊
@_sakku_writes

खुद्दारी

भावना एहसासख़तराफर्ज़, News-Updates

भावना एहसास

भावना एहसास

भावना एहसास

इन आँख की बारिश को, जो पानी कहता है,
एहसास के मंज़र है, जो झूम के बरसता है।
कोहराम जो दिल में मची रहती है अक्सर
वही फुटकर तो ज्वालामुखी बनता है।

जिस रोज़ ये दिल को एहसास न होगा
याद रख, तू भी कभी पास न होगा
दुआ भी तेरे , कभी काम न आएगी,
तू भी खातिर मेरे, कोई खास न होगा।

नाज़ुक से दिल को, कभी दर्द न पहुंचाना।
वरना आंसुओं की, बरसात नज़र आएगी।
सराबोर हो जाएगी, ये रूह भी तेरी,
ये बवंडर फिर एक दिन, तुझे बहा ले जाएगी।

बंजर सी ज़मीन, बन कर रह जायेगी।
उजड़े चमन में, कली भी न आएगी
तड़प तड़प कर निकल जायेगी रूह
एहसास जब तेरे दिल से निकल जायेगी
दुनिया तुझे सिर्फ, देखते रह जायेगी।
तड़प तड़प कर निकल जायेगी रूह
दुनिया तुझे सिर्फ, देखते रह जायेगी।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

भावना एहसास

ख़तरा,फर्ज़ , News Updates

फर्ज़

फर्ज़

फर्ज़

हमें अपनी ज़िम्मेदारियाँ भी बोझ लगती हैं,
उनको निभाने में हमें हर्ज होता है,
सोचो कैसे वो कंधे कभी नहीं झुकते,
जिनपे पूरे मुल्क का फ़र्ज़ होता है।

जन्म बेशक नहीं देती वो मगर,
अपने सीने पे पाँव रख, चलना सिखाती है।
सुकून कितना है उसके लिए मर मिटने में,
ये एक फौजी की शहादत दिखाती है।

हम तो हर लम्हा अपने हिसाब से जीते हैं,
उन्हें शायद ही उनके मन की चीजें भी मिलती होंगी।
सोचो दहशत का क्या आलम होता होगा,
जब दोनों ही ओर अनगिनत लाशें गिरती होंगी।

जब शरहद से किसी की शहादत की ख़बर आती है,
तो वो अखबारों और समाचारों में नवाब हो जाते हैं।
उस शहादत की कीमत कोई उस माँ से पूछो,
जिसके सारे अरमान, अब महज़ ख़्वाब हो जाते हैं।

वो पिता जो अपने बेटे को कन्धा देता है,
उसका पूरा आसमान ज़मीं पे होता है।
वो गर्व से सर भले ही ऊँचा रखता हो,
पर अंदर ही अंदर बिलख के रोता है।

किसी के सिर का साया,
किसी के बुढ़ापे का सहारा।
किसी के लिए बेगरज़ यार,
किसी के लिये जश्न-ए-बहारा।

‘हम जल्दी ही फिर मिलेंगे’ ,
ये हम सभी के लिये महज़ एक वादा है।
इसमें कितना दर्द है, ये उस फौजी से पूछो,
जिसे मालूम ही नहीं कि तकदीर का क्या इरादा है।

-अंजली कश्यप
@scribbling_writer

फर्ज़

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विषय मैं निहारती

विषय मैं निहारती
वसुंधरा के पावन पथ पर मैं निहारती आम के पल्लव को
मैं समीर के झोंकों में मंत्रमुग्ध हो निहारती खग के कलरव को
मैं पावक की गर्माहट सेक कर मारुत के वेग को साधती
मैं आनंदमय हो निहारती जलधि के जल को।।

सूरज के उष्म को देख कर मैं निहारती शशि के शीतल को
मैं दसों दिशाओं का अभिवादन कर निहारती वन और उपवन को।।

मैं देखती मयूर का नृत्य
मैं देखती संसार का कृत्य
मैं निहारती गुलमोहर के तरुवर को।।

मैं देखती देवदार के बाग
मैं देखती वाद्ययंत्र का राग
मैं निहारती विशाल सागर को।।

हिमालय की वादियों का चिंतन कर मैं निहारती जीवन के उत्सव को
अम्बर के सानिध्य में मैं निहारती काल के गौरव को।।

©️Ankita Shrivastava Ayodhya Uttar Pradesh

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivast

करें क्या ???

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करें क्या ???

करें क्या

करें क्या ???
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ऐ वक़्त तू बता, आखिर करें क्या?
डरने लगी है ज़िन्दगी, तो डरे क्या?

कुछ काँच के टुकड़े, चुभे हैं पाऊं में
सहारा बैसाखी का लेकर, बढ़ें क्या?

तूफान भी अक्सर , टकराने लगी है।
हौंसलों की उम्मीद के साथ, अड़े क्या?

पर्वत ऊंचा है, तो ऊंचा ही सही।
कमर में बांन्ध कर रस्सी, चल चढ़ें क्या?

मिटा दे हस्ती, इतना आसान नही नीलोफ़र
गद्दार खड़ा है सामने, तो चल लड़ें क्या?

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

किन्नर

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जातिवाद

जातिवाद

जातिवाद

बाँटते-बाँटते इतना बंट गए,
अब और कितना बांटोगे।
बीज लगाकर बबूल का
आम तो नहीं काटोगे।

इस रूढ़िवादी ने,
कितने का घर बर्बाद किया।
ऊंच-नीच, जात-पात कहकर
जीवन नरक वास किया।

नमक की बात है क्या?
पानी को भी तरसाता है।
औकात में रहकर बात कर
हर बात पे, जताता है।

आज़ाद भी है, कानून भी है
फिर भी रोज़ छपता है अखबारों में।
जान लेकर रूढ़िवाद ने
लटकाया है पेड़ों में।

भगवान ने तो बांटा नही
तुम अब कोई आग न लगाओ।
दिमाग से भी दिल से भी
जातिवाद का फ़र्क़ मिटाओ।
हम एक है , यह सोचकर।
उम्मीद का दीया जलाओ।
उम्मीद का दीया जलाओ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

क्योंकि हम इंसान हैं

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सेना का जवान

सेना का जवान

सेना का जवान शहीद हुआ देश ही उसका छिन गया
छिन गया माँ की ममता का आँचल पिता का साया छिन गया
जो वर्दी पहनकर वो इतराता वो काया छिन गया
शहीद हुआ आज एक जवान दुनिया का सितारा छिन गया।।

सरहद पार सिपाही था उसकी शहादत साफ़ थी
नेक दिल व्यक्तित्व था
इबादत उसकी माफ़ थी
उसका व्यक्तित्व ही समाज का आईना था
उसका अस्तित्व ही खुशकिस्मत नगीना था
वो जो शहीद हुआ उसका वापस आना छिन गया
उसके न आने से देश का एक खज़ाना छिन गया।।

©️अंकिता वीरेंद्र नारायण श्रीवास्तव

सेना का जवान

एक फौजी के अल्फाज……

शहीद

ह्रदय की पीड़ा

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शहीद

शहीद

शहीद,

धरती पीली, अम्बर नीला,
तुझको शीष झुकाऊं माँ।
तेरी ही माटी का मैं गुड्डा,
तुझपे जान लुटाऊं माँ।

जन्म दिया जिस माँ ने,
उसका भी कर्तव्य निभाऊं माँ।
आँख करे जो तिरछी तुझपे,
उसको चीर के आऊँ माँ।

तेरी आन की खातिर मैं,
शहीद भी हो जाऊं माँ।
लिपट कर आऊँ तिरंगा में,
तेरी मिट्टी से लिपट जाऊँ माँ।

गद्दारों को निकाल देश से,
चुनर तेरी धानी कर जाऊँ माँ।
आन , बान, शान है तू मेरी
कैसे तुझे भुलाऊं माँ।

पापी का नाश कर मैं
तेरी गंगा में नहाऊं माँ
बांध चलूं मैं कफ़न सर पे
दुश्मन से टकरा जाऊँ माँ

नमन करूँ शीष झुकाऊं
जान अर्पित कर जाऊँ माँ
तेरी ही माटी का मैं गुड्डा,
तुझपे जान लुटाऊं माँ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

ह्रदय की पीड़ा

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ह्रदय की पीड़ा

ह्रदय की पीड़ा

शहीदों के माँ के ह्रदय की पीड़ा गाना चाहती है,
बधिर हैं जो लोग उनको भी सुनाना चाहती है।
राजनीति की दिवारें देश खोखला कर रही,
आज कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

गलियों और चौबारों में जिनके आज ताले हैं,
जिन्होनें अपने घरो में देशद्रोहियों को पाले हैं।
आओ आज उसका अंजाम दिखाना चाहती है,
जड़ से मिटा देने का उनको एक बहाना चाहती है।।
आज कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

जो जाकर वापस फिर लौट पाया नहीं,
जो पुत्र है माँ भारती का है पराया नहीं।
लाल के कातिल को शूली पर चढ़ाना चाहती है,
हाँ उन्हें जड़ से मिटाने का एक बहाना चाहती है।।
मेरी कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।
कैसे रोकूं अगर वो चिल्लाना चाहती है,
देशद्रोही को मारने का एक बहाना चाहती है।
मेरी कलम तलवार बन सबको बताना चाहती है।।

शहीदों के माँ के ह्रदय की पीड़ा गाना चाहती है,

✍🏻 sakshee🙂
@_sakku_writes

From Footpath, The Warrior

मुस्कान

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