तेरा इश्क़ ही तो है…

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तेरा इश्क़ ही तो है,
जो टपकता अश्क़ बन के
बहता मेरे तकिये तले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो रिझाता मुझे ख्वाब बन के,
पाकर जिसे मेरा दिल खिले।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो तड़पाता मुझे याद बन के,
सोचकर जिसे मेरा दिन बने।
तेरा इश्क़ ही तो है,
जो महताब सा ठंडा,
निहार कर जिसे मेरी रात बने।
तेरा इश्क़ ही तो है
जिसकी दीवानगी ये दिल सहे,
यादों में जिसकी ये दिल रहे।
हाँ ,हाँ तेरा इश्क़ ही तो है।।

‘अकेलापन’ और ‘एकांत’

'अकेलापन' और 'एकांत'
'अकेलापन' और 'एकांत'
‘अकेलापन’ इस संसार में

सबसे बड़ी सज़ा है.!
और ‘एकांत’
सबसे बड़ा वरदान.!

ये दो समानार्थी दिखने वाले
शब्दों के अर्थ में
आकाश पाताल का अंतर है।

अकेलेपन में छटपटाहट है,
एकांत में आराम.!

अकेलेपन में घबराहट है,
एकांत में शांति।

जब तक हमारी नज़र
बाहरकी ओर है
तब तक हम
अकेलापन महसूस करते हैं.!

जैसे ही नज़र
भीतर की ओर मुड़ी,
तो एकांत
अनुभव होने लगता है।

ये जीवन और कुछ नहीं,
वस्तुतः
अकेलेपन से एकांत की ओर
एक यात्रा ही है.!

ऐसी यात्रा जिसमें,
रास्ता भी हम हैं,
राही भी हम हैं और
मंज़िल भी हम ही हैं.!!

घर में अकेलापन नहीं अपनापन है इसका आनंद लीजिए।