मन मेरे, अब ठहर जा…

मन मेरे अब ठहर

बेमतलब की इन बातों के घरौंदों को,
अब तु फ़िर से ना एक रूप दिला।
माना बहुत शौक़ है, तुझे ऊँची उड़ानों को भरने का,
पर सुन, अभी वक़्त नहीं मेरे पास,उन्हें पूरी करने का ।
अब बार बार दलीलें दे कर के,मुझे ना भटका,
कुछ पल के लिये ही सही,
पर समझ
मन मेरे ,अब ठहर जा…।

कुछ सपने है मेरे,
उन्हें करने दे पूरा अभी,
देख ,वक्त नहीं है तेरी इन बेतरकीब नुमाइशो का मेरे पास,
कुछ समय बाद सोचूँगी फिर कभी।
अब इन ख़यालो की जंजीरों में,मुझे फ़िर ना उलझा,
कुछ पल के लिये ही सही,
पर समझ
मन मेरे , अब ठहर जा…. ।

रास्ते को अपने अब एक नई दिशा में मोड़,
बीते पलों में आना जाना ,
अब तो छोड़,
जानती हूं, खोया है कुछ तूने,
तो है बहुत कुछ पाया भी,
किसी ने दिल दुखाया तो
याद रख,
किसी ने है हसाया भी,
देख, अब उन यादों में फ़िर ना मुझे ले जा,
कुछ पल के लिये ही सही, पर समझ
मन मेरे , अब ठहर जा…. ।

By- Aayushi sharma

Post No. THG009

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बेइंतेहाँ मोहब्बत.. Click Here for Read

Lockdown and You

Lockdown and you

Lockdown and You, तन्हा हुए तो पता चला कि ।
बहुत घंटे होते है एक दिन में।

साथ नही है तो पता चला कि।
बहुत टंटे होते है इस जीवन में।

गर न होते सखा तुम, तो हो जाता खिन्न मैं।
साथी हो इसी कारण औरों से हु भिन्न मैं ।

हारा हुआ सा लगता अपना वजूद इस क्षण में।
प्यासे को दरिया जैसे हो तुम मेरे संघर्ष के रण में।

साथ ही तुम्हारा पलट देता है पासे एक पल में।
मौका ए मौजूदगी से तुम्हारी, बन जाता हूं अटल मैं।. Insta @kalam ki kalakari @topiwalavaibhav

Post No. THG008 (Lockdown and You)

बेइंतेहाँ मोहब्बत

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बेइंतेहाँ मोहब्बत

बेइंतेहाँ मोहब्बत

तुझसे होकर अलग,न तन्हा मैं रह पाया था,
दोस्तो से मुलाक़ात पर तू,याद हर बार आया था।

सौ बात बनायी थी सब ने,दस मुझे भी सुनाया था,
वाक़िफ़ था तुझसे क़रीब से,यक़ीन न मुझको आया था।

तुझे पूछा और तलाश किया,फिर अँधेरों में मैं खोया था
तेरी एक-एक यादों में मैं,सिसक-सिसक कर रोया था।

तुझे खोकर बड़ी मुश्किल से,मैंने तुझे भुलाया था,
मैं झूठा था,दिल को बुद्धू यूँ ही बनाया था।

तू आया वापस,तो तुझे फिर से अपनाया है,
फिर से मरि आत्मा को,तेरे लिए जिलाया है।

तेरी खुशी के लिए फिर से,तुझसे मैं जुड़ूगा,
जानता हुँ,फिर से,टुटूँगा,बिखरूँगा।

आधे हो तुम मेरे,और आधे ही रहोगे,
जाओगे मुझे छोड़कर,एक दिन रूलाओगे।

तेरा हूँ मैं सदा,और तेरा ही रहूँगा,
न किसी को अपनाया,न अपना ही सकूँगा।

करना ही है अलग,तो मेरी सुध क्यूँ लेता है
सह न पाऊँगा ख़ुदा,तू दर्द-ए-ग़म क्यूँ देता है।

तू मोहब्बत है ग़ैर का,ये लफ़्ज़ गर सुन लेता हूँ,
विकल हो जाऊँ वहीं पर,मैं फूट कर रो देता हूँ।

तुझे खोने के मात्र ख़्याल से,मैं खौफ़ खाता हूँ,
तू होगा कभी किसी ग़ैर का,फिर भी मै तुझसे बेइंतेहाँ मोहब्बत करता हुँ।

©उज्ज्वल शुक्ला

Post No. THG007

इंतज़ार खामोशी अहसास

इंतज़ार खामोशी अहसास

इंतज़ार खामोशी अहसास

आंखें बेतरतीब प्यासी हैं मुद्दतों से दीदार की,
पता नहीं कब नज़र फरमाओगे,
अब बस भी करो खफ़ा हो तो कहो तो सही,
अब कब तक इंतज़ार करवाओगे।।

बड़ा अच्छा तरीका खोज रखा है तुमने,
खुद को न अलग होने देते हो कभी न पास आते हो,
हम तो बस तुम्हारी आवाज़ में घुलने को बेताब हैं,
पर तुम न जाने कब खामोशी से पर्दा हटाओगे।।

हाल-ए-दिल एक तुम ही हो जो समझते हो,
ग़र तुम ही न पढ़ो इन ख़ामोश लफ़्ज़ों को,
तो वो वक्त मुक़र्रर कर दो हमें अब,
जब तुम हमारी रूह को दफ़नाओगे।।

ज़माने भर की खुशियां अधूरी हैं तुम्हारे बिना,
कभी तो समझने की कोशिश करो जज्बातों को,
अब हम तुम्हें सौदागर कहते हैं तो बताओ,
कब हमारे अहसासों की सही कीमत लगाओगे।।
✍✍Mohit Tiwari

Post No. THG006

जब तुम इशारे से चाँद दिखाओगे

हम बादशाह हमारी सल्तनत के

हम बादशाह हमारी सल्तनत के

हम बादशाह हमारी सल्तनत के,क्यों रहे किसी के ख़ौफ़ में
तुम खूब करो सौदा भले,हाँ! सौदा हमारे ईमान का
मोल लगा न पाओगे,है रौब हमारा बख़ुब यहाँ
जो देखो हमारा ज़लज़ला,तुम त्राहि-त्राहि ख़ुद करो
इमां हमारा यूँ सस्ता नही,जो बोरे अशर्फियों से भरो
शागिर्द हमारे भी कम कहाँ,बस कहने पर ही मर मिटे
नही करना चाहते खर्च हम,वो क्यों इस दलदल में मरे
मोल लगाने जो आये है,है बेहतर उन सबके लिए
जो करना था वो कर लिया,तख़लिया! तख़लिया!

~ विश्वजीत सिंह राठौड़
~Insta:- anant vishv

हम बादशाह हमारी सल्तनत के

Post No. THG005

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जब तुम इशारे से चाँद दिखाओगे

जब तुम इशारे से चाँद दिखाओगे

जब तुम इशारे से चाँद दिखाओगे
मैं तुम्हारी अँगुलियों को देखूँगा

जब तुम पिछले रातों के ख़्वाब सुनाओगे
मैं तुम्हारी आँखों को देखूँगा

जब तुम बताओगे, कल शाम बादल का क्या शेड था
मैं तुम्हारे होंठों की ओर देखूँगा

ओर इस तरह आँखों ही आँखों मे
कुदरत से बगावत कर लूँगा ।

🍁सखा

Insta : sakhaquotes
जोधपुर राजस्थान

Post No. THG004

भगवान मुझे फिर से धरती पर जाने देना..Click Here for Read

Travelling through Feminine

Travelling through Feminine

From the unbearable Labor
Pain- to the unconditional
Maternal gain,
The travelers of the Feminine
Certifies the strength-
The travelers of the Feminine
Justifies the faith length….

From the heights of the Pure
Love- To the affection of the
Marital Dove,
The travelers of the Feminine
Gains the beauty-
The travelers of the Feminine
Performs the fluty….

From the tiny toddler on the
Chest- To the careful nymph
at the her best,
The travelers of the Feminine
Shows the lovely sparkle-
The travelers of the Feminine
Grows in trickles….

From making a man perfect-
To the protection of all wrath,
The travelers of the Feminine
Takes the challenges-
The travelers of the Feminine
Fakes the revenges….

✍kabiryashhh ✍
Insta- @kabiryashhh

Post No. THG003

Thee Amor me…Click Here for Read

Thee Amor me

Thee Amor me

Thee Amor me
It’s sometimes intricate
Made up with many complicated parts
And sometimes it compile with complacency

Thee Amor me
Like sometimes readiness to please
Sometimes it’s beyond to liken
Sometimes it’s a a commutator
And sometimes it’s a total companionship

Thee Amor me
Like crumple in creases up
Or its sometimes crucial
And sometimes it’s cuddly

Thee Amor me
Like he delimitate to set free
Thee Amor me
Like he defrost my seasons to seek

#multilingualpoetry

@her_scribbled_stories
By: Amruta_Patil

Post No. THG002

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भगवान मुझे फिर से धरती पर जाने देना

Sunny_THG001

के लड़कर आया हूँ निभाया हैं धरती माँ के बेटे का फर्ज,
अब जिस कोख से जन्मा उस माँ के बेटे का फर्ज निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना…
मरते दम तक रक्षा की हैं, चुका दिया हैं धरती माँ का कर्ज,
अब मेरी उस माँ का थोड़ा सा दूध का कर्ज निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……..
बहोत साल गुजर गए अपनी प्यारी सी बहन से मिले,
सुनी सी पड़ी इस कलाई में उसके प्यारे से हाथो से राखी बंधवाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना….
मेरी एक साथी भी हैं नीचे, मुझसे दूर रहते हुए भी पत्नी का धर्म निभाया हैं,
बंदूको से तो सारे धर्म निभा लिए ,
अब पति का धर्म निभाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना…..
उसकी कोख मे पल रही एक नन्ही सी कली जिसके आने का कब से इंतज़ार कर रहा था,
उसे मुझे एक बार पापा कहके बुलाने दे ना,
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……
भगवान मुझे फिरसे धरती पर जाने दे ना……..

सन्नी रोहिला।

Post No. THG001

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