कुटुम्ब

कुटुम्ब

मैं फिर उस कुटुम्ब की कामना करती हूँ
जहाँ मेरी माँ परियों वाली कहानी सुनाकर सुलाती थीं
जहाँ दादी उंगली पकड़कर पार्क में घुमाती थीं
जहाँ पापा जी मेरे कारण सर्वस्व समर्पण करते थे
जहाँ दादा जी हँसते हुए सब कुछ अर्पण करते थे
जहाँ कंधे पर बैठ कर मेले देखे जाते थे
जहाँ झोले में सामान खरीदे जाते थे
जहाँ मिट्टी के बर्तन में पकवान बनते थे
जहाँ उचित बात बोल कर सही इंसान बनते थे।।
मैं उस कुटुम्ब की कामना करती हूँ
जहाँ पुराने लोग मिल जुल कर रहते थे
जहाँ चचेरे ममेरे में फर्क नहीं करते थे
जहाँ प्रतिदिन त्योहार मनाया जाता था
जहाँ परमात्मा को अर्पित कर अन्न खाया जाता था
जहाँ भाई बहन में कोई अंतर नहीं होता था
जहाँ प्रयास करने पर समांतर नहीं होता था
जहाँ संयुक्ता एक ही होती थी
निपुणता एक ही होती थी।।

काश मैं भी वही कुटुम्ब बनाऊँ कि फिर आज मैं अपने कुटुम्बका गुण गाउँ।।

©️Ankita Virendra Shrivastava

काल का चक्रव्यूहघर की चौखटमैं समय हूंNews

समय

समय

समय/वक्त
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वक़्त ही है, जो हर आईना दिखा देता है।
वक़्त ही है, जो पत्थरों को भी खुदा बता देता है।

डर है गर ज़िंदगी में, तो वक़्त से डरकर ही रहना,
यही वो लहर है, जो दरिया को भी समन्दर बना देता है।

साया भी छोड़ता है साथ, वक़्त के बुरे साये में,
इंसान क्या चीज़ है, वक़्त को वक्त ही हरा देता है।

सम्भल जाओ ज़रा, वक़्त से पहले ऐ दुनिया वालो,
ये वही है, जो रूह निकलते ही,इंसान को जला देता है।

मेरी नाकामी पे, बहुत हँसती है ये दुनिया नीलोफर,
बता दो, कामयाबी ही नाकामी का लफ्ज़ मिटा देता है।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

आईनापृथ्वी माँकचरे का अंबारNews Updates, समय

किन्नर

किन्नर

किन्नर ये शब्द सुनकर ही अनेक लोग विभिन्न प्रकार के ख़याल सोचने लगतें है,
शायद वे उन्हें अपने समाज में कोई स्थान ही नहीं देना चाहतें,
आखिर समाज के लोग क्यों नहीं सोचते कि वे भी तो एक इंसान है,
उसे इंसान की तरह दर्जा क्यों नहीं देते,
समाज ने इतनी ख़राब छवि बनाकर रखी है,
कि लोग इनसे बात करना और देखना भी पसंद नहीं करते,
क्या वे ईश्वर की संतान नहीं है,
जो उन पर ऐसा अत्याचार हर रोज होता है,
इसमें गलती हम सबकी ही है,
हमनें उनको आगें बढ़ने का मौका ही नहीं दिया,
शिक्षा से लेकर हर कार्य तक उनकों उस काम से वंचित रखा,
क्या वह देश के नागरिक नहीं है,
क्या वह देश की उप्लाब्धि में भागीदारी नहीं देते,
उनकों मौका मिलने पर उन्होंने हमसें बेहतर कर के दिखलाया है,
वकील , जज, प्रधान अध्यापक बनकर समाज में अपना नाम गौरव करके भी दिखलाया है।
आज भी बहुत लोगों के अंदर यह गलत अवधारणा बैठी है,
कि किन्नर काम नहीं कर सकतें शिक्षा पर उनका हक नहीं,
केवल कुछ लोग ही उनका साथ देने को आते है,
हम सबकों मिलकर इस गलत अवधारणा को मिटाना है,
सभी कार्यो के लिये उनको हक भी दिलाना होगा,
वो छोटे है या हम बड़े इस भेद को समाज में पूरी तरह से मिटाना होगा,
सबकों बराबरी का दर्जा देकर अपने देश को मिलकर आगे बढ़ाना होगा।

जातिवाद

News Updates

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

क्योंकि हम इंसान हैं

क्योंकि हम इंसान हैं

क्योंकि हम इंसान हैं, हमें बोलना अच्छा लगता है सुनना नहीं। भगवान ने हमें दो कान और मुंह एक दिया है और हमें याद भी नहीं क्योंकि हम इंसान हैं, खुद गलत होकर भी दूसरों को जज करना हमारी आदत है, गलतियां करके सॉरी बोल देना हमारे लिए बहुत आसान है, क्योंकि हम इंसान हैं ।

जबरदस्ती दूसरों पर अपनी मर्जी थोपना उनकी जिंदगी को वश में करना हमें अच्छा लगता है क्योंकि हम इंसान हैं।
क्यों हम कभी किसी को थोड़ा सा प्यार थोड़ी सी इज्जत थोड़ा सी प्रशंसा नहीं दे सकते ?
क्यों हम लोगों की नहीं सुनते क्यों सिर्फ हमारी ही सुनाते रहते हैं? कभी स्वार्थी न बनकर हम सामने वाले को नहीं सुन सकते ? आखिर वह भी तो इंसान हैं!

आज एक वीडियो https://youtu.be/hpWB4A4Pm9I देखकर ऐसा लगा कि सिर्फ एक इंसान को ही नहीं हम सबको किसी के साथ की जरूरत है आज भारत में हर दूसरी मौत का कारण तनाव और अवसाद ही है पर हम उसे नियंत्रित कर सकते हैं उसे कम किया जा सकता है।

सिर्फ थोड़ा सा प्यार और थोड़ा सी प्रशंसा के साथ अपनों को सुनकर तो देखो “please learn to listen or appreciate the people and help them by giving new hope or reason to live their life with smile”

क्योंकि हम इंसान हैं

आज हर कोई परेशान है कि हमारी कोई नहीं सुनता माँ बाप परेशान है कि बच्चे उनकी नहीं सुनते और वही बच्चों को लगता है कि माँ बाप उन्हें नहीं समझते, बॉस को लगता है एंप्लॉय उसको फॉलो नहीं करते तो एंप्लॉय समझते हैं कि बॉस उनकी नहीं सुनते ।

मतलब कहीं अगर सुनने वालों की कमी है तो शायद सुनाना भी लोग पसंद नहीं करते है उन सभी से निवेदन है कि वह लोग अपनों से बात करें और अपने आपको जाहिर करना सीखें क्योंकि कुछ चीजें कोई सिखाता नहीं हमें खुद सीखनी पड़ती हैं क्योंकि हम इंसान है।

अक्षय कुमार जी की वीडियो में मैंने सुना था कि दिल औजार से खोलने से अच्छा है कि अपने दोस्तों के साथ खोल लिया जाए तो प्लीज आज ही अपने दोस्तों से बात करें और जाने की उनकी लाइफ कैसी चल रही है शायद आपके किसी दोस्त को इसकी जरूरत हो और यह ना सिर्फ आपके दोस्त की बल्कि आपको अपने आपको जानने में भी हेल्प करेंगी क्योंकि हम इंसान हैं ।

मुझे उम्मीद है आप लोग कोई अच्छा लगा होगा और आप इसे हर उस इंसान के साथ शेयर जरूर करना चाहेंगे जिसे इस वीडियो की जरूरत है ताकि दोबारा कोई भी अवसाद और नेगेटिविटी की वजह से ख़ुदकुशी जैसा पाप करने के लिए मजबूर ना हो क्योंकि-हम-इंसान है क्योंकि-हम-इंसान है। चलो आज कुछ अच्छा करते हैं हम हमारे अपनों से कुछ दिल की बात करते हैं

©️ रजनी अग्रवाल

 

वो‌ चला‌ गया

एक वादा ऐसा भी

दर्द ऐ मोहब्बत

हम इंसान हैं

News Updates

तुम हो या ना हो

तुम हो या हो ना हो

तुम हो या ना हो….

तुम हो
या हो ना हो
पर मेरे साथ
तुम्हारा अहसास तो है 

— सखा 🍁

मिले थे अजनबी बनकर
आज जिंदगी की जररूत हो तुम 

— सखा 🍁

बहुत से सवाल अधूरे रह गये
जिनके जवाब ………तुम थे 

— सखा 🍁

 

हर कोई अभीमन्यू नहीं,
जो अपनीं माता के गर्भ में सब सीख जाएं।

हर कोई इंसान तो हैं,
जीवन हैं चाहें तो सबकुछ वरना कुछ भी न सीख पाएं। 

— ©दीपशीखा अग्रवाल!

कहतें हैं आंखे बोलतीं हैं,
सच ही तो हैं यहीं दिल के सारे राज़ खोलतीं हैं।

–©दीपशीखा अग्रवाल!

 

मैंने पूछा कि ‘तबाही’ क्या है!

उन्होंने हाथ छोड़ के पैगाम दिया।

–Topiwala🤠

 

मैंने पूछा”वादा” क्या है ?
उन्होंने मेरे हाथों को अपने हाथों में थाम लिया

— सखा 🍁

 

मैंने पूछा उनसे ‘फरेब’ क्या है।

उन्होंने हर वादे को झुठला दिया।

–Topiwala🤠

मैंने पूछा उनसे ” रिश्ता ” क्या है
उन्होंने माँग में सिंदूर दिखा दिया

— सखा🍁

मैंने पूछा कुछ बताओ ‘विरह’ पर उन्होंने बिन बताये रिश्ता तोड़ दिया

–Topiwala🤠

 

उन्होंने कहा कुछ लिखो ” प्रेम ” पर
मेने उनका ” नाम ” लिखकर छोड़ दिया

— सखा🍁

 

उसकी तस्वीर देख आज भी खुशी से झुम उठती हूँ,
फ़िर याद आता हैं हम साथ नहीं और दुखी होकर रो पड़ती हूँ |
क्या करू इश्क़ आज भी करती हूँ,
उसे याद हर रोज़ करती हूँ |

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

ये अपने और पराए का खेल मेरे संग ना खेलना,
मेंने अक्सर लोगों को झूठ के नकाब में सच छुपातें देखा हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

दूरीया तुमने बढ़ाई,
हम तो आज भी तुम्हारा इंतज़ार करतें हैं|
दोस्ती निभाने में चुक तुमसे हुई,
हम तो आज भी खुद को ही गुनहगार मानतें हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

वो मेरा गुरूर था तुम कहतें थें,
वो मेरी खुद्दारी थीं यह जग कहता हैं|
क्या सच क्या झूठ अब यह सब जानतें हैं,
सच हैं समय सबको जवाब देता हैं|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

तुम्हें बदनाम करने की मेरी इच्छा न थीं,
मगर तुमने ही मेरी सच्चाई और अच्छाई की कदर न की|
और मजबूरन मुझे,
सच्चाई जग ज़ाहिर करनी पड़ी|

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

अब अपने बारे में हम खुद क्या कहें,
दुनिया को यकीन हैं के हम बेवफा नहीं |

— ©DEEPSHIKHA AGARWAL!

 

बंदगी नहीं वो सिर्फ बंदे को चाहता
पूजता हर कोई पर हर कोई न उसे पाता
जो पंडा मौलीवियो से दूर जाने पर मिल पाता
कुछ ऐसा है जी खुदा मेरा

— Arjun

 

मंज़र भी इश्क़ का बड़ा अजीबो गरीब था
वो आग से जला जो नदी के करीब था

— Ruhani_mohabbate

जब अंदाजा हुआ हमे उनकी मोहब्बत का
तो हमने खुद को बेगाना बना दिया

और जब देखा उन्हे किसी और की बाहो मे
तो आंखें भीगी और हमने तिनके का बहाना बना दिया

— ruhani_mohabbate

 

गर हम कभी मिले तो पढ़ियेगा जरूर मुझे।
मैं नायाब गलतियों की मुक्कमल किताब हूँ।
— Topiwala🤠

 

गर तुम जवाब हो तो सवाल मैं हूँ।
जो तुम शांत हो तो बवाल मैं हूँ।
गर हो गुरुर तुम तो मलाल मैं हूँ।
जो हो तिलिस्म कोई तो कमाल मैं हूँ।
— Topiwala🤠

 

तुम्हारा प्रेम,
जैसे नीला आसमान,
उसमें मैं हूँ जैसे एक पंछी,
जो छूने की चाह रखता है,
निकट समझता है हर पल जिसे,
पर है नहीं,
नहीं जान पाऊँगा तुम्हारे प्रेम का विस्तार,
और वो अनंत सीमाएँ,
जिन्हें समेटने की चाह लिए उड़ रहा हूँ।।
— ✍✍ Mohit

 

इस दौर की हवा का
रुख ही हवा हो गया
अपना कहते कहते ही वो
जाने कहाँ दफा हो गया
— Vishvajeet✨

 

हमने तुम्हें दिल से देखा है,
हमें शक्ल से क्या करना,
मुहब्बत हमारी गणित का सवाल नहीं,
हमें तुम्हारी अक्ल से क्या करना।।
— ✍✍ Mohit

 

तमाम तमन्ना ऐ तस्सवूर की तासीर ले चुका है तहरीक ऐ तकल्लुफ तेरा
मुअय्यन के मुहाने से मुआयना कर रहा है मुख्तसर माशूक ये दिल मेरा

— Topiwala🤠

 

तेरे विरह की तपिश में दहक़ रहा है ये दिल
और इस विरह अग्नि से विद्रोह करने पलकों तले से निकल पड़े है कुछ नादान अश्क़ ।
— © सपन अग्रवाल

 

कीमती हूं बहुत पर मै हीरे जवाहरात नहीं….!!!
महंगा हूं बहुत पर मै सोने की खान नहीं….!!!
और क्या कहूं किसने क्या बोला है मुझे….!!!!
दुखी हूं बहुत पर मै दुखो का सरताज नहीं…!!!

— Anshu Agrawal

 

संम्भाले नही संम्भलेगा,
जो कर रहा हैं करने दो….
इश्क़ किये बैठा हैं जालिम,
मरने दो….

— सन्नी रोहिला

 

मैं लिखता हूँ तितली
तुम उन्हें हथेलियों पर बिठा देती हो

मैं लिखता हूँ वसंत
तुम रंगों में डूबने लगती हो

मैं लिखता हूँ बादल
बिन बरसात तुम भीगने लगती हो

मैं लिखता हूँ प्रेम
तुम न जाने क्या महसूस करने लगती हो

— सखा🍁

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