गरीब

गरीब

क़िस्मत गरीब की भी एक दिन खुदा बदल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,
क़िस्मत गरीब की भी,,,,,

(1) पूरी उम्र गुजारी रहकर के छप्पर छाते,,
राहें बनाई हमने नित महल हम बनाते,,
खुशियाँ मिले जहां बस कोई ऐसा पल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन कोई कभी तो फ़ल दे,,

(2) रुपयों वाला आके हमकों ये भिक्षा देता,,
करनी पड़े गुलामी हमकों ये शिक्षा देता,,
दुखों का हो निवारण कोई तो हमकों हल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

(3) मर जाये यूँ ही एक दिन राहों में हम तड़पकर,,
फ़िर देख लेना आके तू भी तमाशा जी भर,,
सचिन खुदा के दर पर मुझे साथ लेके चल दे,,
बरसों से सूखा गुलशन,,,,,

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
Insta id,, burning_tears_797

ग़रीबीझूठ और फरेब की दुनियादोस्तीNews

ज़िंदगी

ज़िंदगी

ज़िंदगी

किसी को तकलीफ़ हज़ार देती है,
तो किसी को खुशियाँ परोसती है ज़िंदगी।

माना कदम डगमगा जाते हैं अक्सर,
पर आगे बढ़ने से कहाँ रोकती हैं ज़िंदगी।

जो कहते हैं खुश रहा करो, उनसे पूछो,
क्यों खुश होने की कम वजह देती है ज़िंदगी।

रो लिया करो जब मन उदास हो,
क्योंकि आँसुओं में तकलीफ़ बहा लेती है ज़िंदगी।

किसी के लिये मोहब्बत लिखती है,
किसी के हक़ में दोस्ती रखती है ज़िंदगी।

जो साथ चल सके उम्र भर,
ऐसा कोई हमसफ़र ज़रूर देती है ज़िंदगी।

अपने ही उसूलों पे चलती रहती है,
किसी के दर पे कहाँ ठहरती है ज़िंदगी।

ख़्वाहिशें तो सब रखते हैं,पर सच बताओ,
महज़ ख़्वाहिशों से बनती है क्या ज़िंदगी।

– अंजली कश्यप
@scribbling_writer

माँ की परवाह-

ज़िंदगी

खुद्दारी

भावना एहसास

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