Dear Jindagi

Dear Jindagi
Dear Jindagi

तुम भी बहुत थक जाती होगी ऐसे नाकारात्मकता का बोझा उठा जो तुम्हे हमेशा कोसते हैं कि उनके न चाहने पर भी तुम उन्हें वो चीज दे रही जो बहुतों के पास है ही नहीं। तुम्हें नही समझ पाते बहुत लोग , आखिर तुम भी तो कितनी दर्दों की पराकाष्ठा से गुजर रोज खुद को थोड़ा-थोड़ा कम करके हमारे साथ जी रही हो। सुख और दुःख (किसी व्यक्ति का आना जाना ) तो प्रकृति का नियम है, हम किसी के अनुचित व्यवहारों की सजा तुमको क्यों दे। तुम्हारा भी तो ह्रदय टूट कर बिखर जाता होगा ये सब जब तुम पर आरोपित करते होंगे वो गलतियों का बोझ जो तुमने कभी की ही नहीं होती हैं । हाँ मुझे तुमसे कोई शिकायत नही। तुम जैसी हो बस वैसी ही रहना। तुम्हारा होना और बस होने का एहसास मात्र काफी है मेरे लिए। तुम एकमात्र हो जो सोचती हो मेरे लिए, जो जीती है मेरे लिए । वरना कभी सुना है किसी के मर जाने पर कोई मरा हो उसके साथ फिर चाहे कोई किसी की सम्पूर्ण दुनिया ही क्यों ना हो। पर हाँ तुम तो खुद को भी खतम कर देती हो हमारे ही साथ। अब मेरा या किसी का ये कहना कि ( इस जिन्दगी से बेहतर है कि ये ना होती) उतना ही गलत है जितना किसी का दिल दुखाना और हम चाहकर भी ये पाप कभी नहीं कर सकते। आखिर तुम हो मेरी अपनी ही। और “अपने” बचे ही कहाँ है इन परायों की दुनिया में। तुम कभी खुद को किसी से कम मत समझना और कभी मत समझाना किसी को अपनी अहमियत। जिन्दगी में लोगों के आने और चले जाने से थोड़ी ना सब खतम हो जाता है। तुमने तो और भी बहुत कुछ दे रखा है ना। खैर तुम भी खुश रहा करो और छोड़ दिया करो लोगों को उनके हाल पर। तुम सच में बहुत खूबसूरत हो, इतनी कि शब्द ही नहीं तुम्हे बयां कर पाने को। और तुमसे बस इतना ही कहना है…. 🅸 🅻🅾️🆅🅴 🆈🅾️🆄… 💟

✍🏻 साक्षी😊

Dear Zindagi@_sakku_writes

 

Entry No. THG015

Date: 23rd Oct 2020

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मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती।

ये कैसी अँधेरी दुनिया है,
जहाँ मैं क़ैद हूँ?
अच्छा-अच्छा तो मैं अभी,
अपने माँ के गर्भ में हूँ।
जहाँ अभी मेरे अँगों का,
निर्माण हो रहा है,
मुझे इस दुनिया में,
लाने के लिए सज किया जा रहा है।

ये बाहर की दुनिया,
कितनी प्यारी होगी ना?
रोशनी होगी,
नए-नए लोग होंगे,
मुझे बहुत सारा प्यार देंगे,
मेरी इस दुनिया से पहचान कराएँगे।

अरे-अरे ये माँ को क्या हो रहा है?
उन्हें इतना दर्द क्यों हो रहा है?
माँ तुम इतना क्यों चिल्ला रही हो, इतना क्यों रो रही हो?

ये आदमी कौन है?
माँ यह आपको दर्द दे रहा है।
माँ क्यों कुछ बोल नहीं रही?

अरे ये तुम क्या बोल रहे?
मैं माँ को दर्द दे रहा हूँ?
मेरी वजह से माँ को दर्द हो रहा है?

माँ मैं कभी तुझसे यह नहीं बोल पाऊँगा,
तेरे समक्ष अपने भाव ना रख
पाऊँगा,
मन मेरा तुझे दर्द में देख होता है उदास,
सोचने लगता हूँ गर्भ में कि क्यों लगाई तूने मुझसे आस,
कि तेरे सारे दुख हर पाऊँगा,
तुझे मैं ढेरों खुशियाँ दे पाऊँगा?
जब अभी ही इतना दर्द दे रहा हूँ,
दुनिया में आने, मैं तुझे कष्ट दे रहा हूँ।

जानता हूँ,
सुन मेरी बात तू बस यही कहेगी कि मुझसे तू है,
तो दर्द कैसा,
पर तुझे थोड़े भी दर्द में देख,
सहम जाता हूँ, डरे हुए बच्चे जैसा।

माँ मेरा अस्तित्व तुझसे है,
मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा, मेरा हर किस्सा तुझ से है।

मैं आँख, तो मेरी आँखों का नूर हो तुम।
मैं सजदा, तो मेरा खुदा हो तुम।
मैं नदी, तो मेरा बहाव हो तुम।
मैं आफताब, तो मेरा प्रकाश हो तुम।
मैं चाँद, तो मेरी चाँदनी हो तुम।
मेरी ज़िन्दगी के ज़र्रे-ज़र्रे में हो तुम।

माँ मैं तुझसे बस एक ही बात कहना चाहता हूँ,
मेरा जीवन मैं तेरे लिए सजाता
हूँ,
तुझसे निर्मित, मैं तुझे समर्पित होता हूँ,
मेरा ज़र्रा जर्रा तुझ पर अर्पित करता हूँ।

मैं दर्द देता, तू खुशियां लेती

©️रूपेश गुप्ता
/silentpoetrytrails

Entry No. THG013

Date: 23rd Oct 2020

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Dear Zindagi

Dear Zindagi

Dear Zindagi,

तुम भी बहुत थक जाती होगी ऐसे नाकारात्मकता का बोझा उठा जो तुम्हे हमेशा कोसते हैं कि उनके न चाहने पर भी तुम उन्हें वो चीज दे रही जो बहुतों के पास है ही नहीं। तुम्हें नही समझ पाते बहुत लोग , आखिर तुम भी तो कितनी दर्दों की पराकाष्ठा से गुजर रोज खुद को थोड़ा-थोड़ा कम करके हमारे साथ जी रही हो। सुख और दुःख (किसी व्यक्ति का आना जाना ) तो प्रकृति का नियम है, हम किसी के अनुचित व्यवहारों की सजा तुमको क्यों दे। तुम्हारा भी तो ह्रदय टूट कर बिखर जाता होगा ये सब जब तुम पर आरोपित करते होंगे वो गलतियों का बोझ जो तुमने कभी की ही नहीं होती हैं । हाँ मुझे तुमसे कोई शिकायत नही। तुम जैसी हो बस वैसी ही रहना। तुम्हारा होना और बस होने का एहसास मात्र काफी है मेरे लिए। तुम एकमात्र हो जो सोचती हो मेरे लिए, जो जीती है मेरे लिए । वरना कभी सुना है किसी के मर जाने पर कोई मरा हो उसके साथ फिर चाहे कोई किसी की सम्पूर्ण दुनिया ही क्यों ना हो। पर हाँ तुम तो खुद को भी खतम कर देती हो हमारे ही साथ। अब मेरा या किसी का ये कहना कि ( इस जिन्दगी से बेहतर है कि ये ना होती) उतना ही गलत है जितना किसी का दिल दुखाना और हम चाहकर भी ये पाप कभी नहीं कर सकते। आखिर तुम हो मेरी अपनी ही। और “अपने” बचे ही कहाँ है इन परायों की दुनिया में। तुम कभी खुद को किसी से कम मत समझना और कभी मत समझाना किसी को अपनी अहमियत। जिन्दगी में लोगों के आने और चले जाने से थोड़ी ना सब खतम हो जाता है। तुमने तो और भी बहुत कुछ दे रखा है ना। खैर तुम भी खुश रहा करो और छोड़ दिया करो लोगों को उनके हाल पर। तुम सच में बहुत खूबसूरत हो, इतनी कि शब्द ही नहीं तुम्हे बयां कर पाने को। और तुमसे बस इतना ही कहना है…. 🅸 🅻🅾️🆅🅴 🆈🅾️🆄… 💟

✍🏻साक्षी😊
@_sakku_writes

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