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परिवार

हां वो ही परिवार था आंखें खुली थी मध्दम-मध्दम, मध्दम उंगली हिलती थी दो जने घर में दिखते, जो मेरा संसार था। कुछ बड़ा हुआ, कुछ होश लिया कभी जगता...