काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह
बचपन के मासूमियत में कैसा उतावलापन आया
काल का सार मुझमें ऐसा समाया
समय बदल गया और मैं रोना भूल गया
एक समय आया जब मेरा बचपन शरारत भरा साथ पाया
मेरे साथ रहा मेरे माता पिता का साया
लगा जैसे शैतानियों का हुज़ूम मुझमें समाया
रेत की तरह समय बीत गया
मैं युवा हुआ और मिला काम का रीत गया
जीवन के चक्रव्यूह में समय का काल था
युवावस्था में जिम्मेदारियों का मायाजाल था
माहौल था बुरी संगतों का बुरी विपदाओं का आगाज़ था
वक्त बीता यौवन का वो आपदाओं का रिवाज़ था
अब वृद्ध हो चला हूँ उन्नति के पथ पर
अब पीछे एक ज़माना है
अब पीढ़ियों को लिखा पढ़ा कर पंचतत्व में विलीन हो जाना है।।

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivas

घर की चौखटमैं समय हूंविषय शून्यNews

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन का प्रारंभ जल से हुआ,
जल के द्वारा ही वनस्पतियों आदि का निर्माण हुआ,
प्रकृति को सुंदर हरा भरा बनाये रखने के लिए जल की ही आवश्यकता होती है,
जीव जंतु भी जल से अपनी प्यास बुझाते है,
मानव के लिए जल बिन जीवन एक असंभव सा कार्य है,
हर वस्तु हर जगह जल की आवश्यकता है,
फसल उगाने से लेकर, बीज आरोपण ,
खाना बनाने से लेकर, मकान बनने तक,
बिजली से लेकर अनेकों संसाधनों का स्रोत जल है,
शरीर को स्वच्छ बनाने और किसी नई चीज़ का निर्माण के लिए आवश्यकता जल है,
जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है,
अतः हमें जल को संरक्षित कर हमेशा जल का सदुपयोग करना चाहिए,
और जल को व्यर्थ में बर्बाद होने से बचाना भी चाहिए।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

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किसान

किसान

किसान

मैं कहने को तो एक किसान हूँ,
जो खेतों खलियानों में बीज बो कर फ़सल उगाए,
तपती धूप में भी जो खेतों में हल चलाये,
रूखी सूखी खाकर अपना और अपने परिवार का पोषण करें,
साहूकारों औऱ सरकारों के कर में अपनी ज़िंदगी बिताए,
पसीनें के साथ खून की बूंद तक गिरवीं रखवाए,
कृषि प्रधान कहें जाने वाले इस देश में किसानों का दर्द जानें कौन,
हर संकट की घड़ी में भी अनाज का उत्पादन करते है,
फिर भी कई बार भस्टाचार का शिकार बनते हैं,
जो दर्द सह नहीं पाते वे आत्महत्या के शिकार होते है,
जो जीवित रह जाते है वह भी मज़बूरी में अपना जीवन व्यतीत कर लेते है,
अनेकों कवियों की आवाज़ हूं मैं जो तालियों के शोर में कहीं गुम हो जाती है।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

विचारआखिर क्यों?विषय शून्यNews Updates

जातिवाद

जातिवाद

जातिवाद

बाँटते-बाँटते इतना बंट गए,
अब और कितना बांटोगे।
बीज लगाकर बबूल का
आम तो नहीं काटोगे।

इस रूढ़िवादी ने,
कितने का घर बर्बाद किया।
ऊंच-नीच, जात-पात कहकर
जीवन नरक वास किया।

नमक की बात है क्या?
पानी को भी तरसाता है।
औकात में रहकर बात कर
हर बात पे, जताता है।

आज़ाद भी है, कानून भी है
फिर भी रोज़ छपता है अखबारों में।
जान लेकर रूढ़िवाद ने
लटकाया है पेड़ों में।

भगवान ने तो बांटा नही
तुम अब कोई आग न लगाओ।
दिमाग से भी दिल से भी
जातिवाद का फ़र्क़ मिटाओ।
हम एक है , यह सोचकर।
उम्मीद का दीया जलाओ।
उम्मीद का दीया जलाओ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

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