आत्म चिंतन

आत्म चिंतन

जीवन को सरल रूप और उचित ढंग से व्यवस्थित करने के लिए सबसे उपयोगी कुछ है तो वो आत्म चिंतन है। 
आपकी हर परेशानियों और मुश्किलों का हल आप आत्म चिंतन से कर सकते है। 
बस जरूरी है कि आप आत्म चिंतन में सिर्फ अपने आपको जाँचो और परखो ,
 और यह भी जानो की जो आपने किया वह सही किया या गलत , 
और यह भी की कोई काम उससे बेहतर तरीके से हो सकता था या नहीं, 
कुछ भूल गए या कुछ ज्यादा कह दिया, 
इस पर गौर करने की जरूरत आपको खुद में है। 
हम दूसरों की गलती तो आसानी से बता लेते है, 
मग़र क्या स्वयं की गलती पर भी उतना ही गौर करते है ?
रिश्तों में पनप रही कड़वाहट को आप स्वयं दूर कर सकते है,
 बस आगे आकर दूसरों की गलती माफ कर या 
अपनी गलतियों की माफी मांग कर पहले से बेहतर अच्छा रिश्ता फिर से कायम कर सकते है। 
जो दिल से अपने होते है वे आपको माफी माँगने से पहले ही माफ कर चुके होते है
 बस आपके वापस आने और बोलने का इंतेज़ार करते है। 
कुछ कड़वी याद जो आपको रूलाती थी, 
एक वक्त गुज़र जाने के बाद वह आपके हँसी का कारण भी बन सकती है।
 अपनी गलतियों से सीखकर हमें आगे बढ़ना चाहिए ।
 गलतियां सभी करते है शायद इसीलिए इंसान को गलतियों का पुतला भी कहा गया है। 
जीवन में जब तक कोई गलती नहीं करेगा, गिरेगा नहीं, 
तब तक वह जिंदगी से मिले सबक को कैसे सीख पायेगा और कैसे बुलंदियों पर पहुँच पाएगा।

हमें अपने विचारों का अवलोकन करना चाहिए क्योंकि वे आपके शब्द बनते है।
हमें अपने शब्दों पर निगरानी रखनी चाहिए क्योंकि वे आपकी क्रियाएं बनती है,
हमें अपनी क्रियाएं को प्रतिदिन जांचना चाहिए क्योंकि वे आपकी आदत बनती है,
और हमें अपनी आदतों को परखना चाहिए 
क्योंकि हमारी आदतें ही हमारे चरित्र का निर्माण करती है।


✒️ Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

Entry No. THG014

Date: 23rd Oct 2020

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एक गुजारिश

एक गुजारिश

एक गुजारिश

उससे जिसकी कमी उसके ,
होने पर भी खलती रही।
जिन्दगी इन्तजार बन यू ही चलती रही,
जब मेरी काया का ये ढेर खाक बन जाये,
तो तुम अपने हाथों में गुलाब लिए ,
चले आना मेरी कब्र पर।
फिर से उस प्यार की खुशबू फैलाने,
जिसके लिए में जीवन भर तरसती रही।
छूकर अपने हाथों से फिर ,
मुझे एक बार जीने का एहसास दिला देना,
फिर वो फूलो की माला मेरी कब्र पर चढ़ा,
मेरी रूह को सात जन्म के बन्धनों,
वो सात फेरे याद दिला देना।
बस एक गुजारिस है तुमसे ,
जब तुम आओ तो अकेले ही आना,
तोहफा वक्त का साथ लाना।
ताकि चन्द लम्हे गुजार सकूँ,
और बटोर सकूँ उस एहसास को
रूह बन रूह तक समा सकूँ ,
के तुम सिर्फ और सिर्फ मेरे हो।

 

©️कविता जयेश पनोत

Challenge: Writer of the Month

Entry No.THG002

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शिक्षा

शिक्षा

शिक्षा का महत्त्व जब जान जाएगा।
तभी तो तू, इंसान कहलायेगा।
अच्छे, बुरे, समतल, समन्दर, तूफान से
लड़कर आगे बढ़ पायेगा।

नौकरी कर पैसा कमाना , शिक्षा का स्थान नही
ग़रीबों, यतीमों पे जुल्म ढाना, कोई उत्थान नही।

बिन शिक्षा के इंसान जानवर बन जाता है
हालात आये ऐसे, जानवर भी शिक्षित नज़र आता है।

मानव बुद्धिमान होकर, सब विनाश कर गया
देखते ही देखते देखो, कितना अवकाश कर गया।

कैसी शिक्षा, कैसा नीति, कैसा ये प्रावधान है
अपने औऱ ग़ैरों को मारे, भला कैसा इंसान है।

पोथी पढ़-पढ़ के, पंडित न हो जायेगा
पाप किया तो फल भी तू ही खायेगा।

शिक्षा से शिक्षित होकर कर तू उपकार
इस धरती पे जैसा करे मिले जीवन का सार
इस धरती पे जैसा करे मिले जीवन का सार

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

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काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह

काल का चक्रव्यूह
बचपन के मासूमियत में कैसा उतावलापन आया
काल का सार मुझमें ऐसा समाया
समय बदल गया और मैं रोना भूल गया
एक समय आया जब मेरा बचपन शरारत भरा साथ पाया
मेरे साथ रहा मेरे माता पिता का साया
लगा जैसे शैतानियों का हुज़ूम मुझमें समाया
रेत की तरह समय बीत गया
मैं युवा हुआ और मिला काम का रीत गया
जीवन के चक्रव्यूह में समय का काल था
युवावस्था में जिम्मेदारियों का मायाजाल था
माहौल था बुरी संगतों का बुरी विपदाओं का आगाज़ था
वक्त बीता यौवन का वो आपदाओं का रिवाज़ था
अब वृद्ध हो चला हूँ उन्नति के पथ पर
अब पीछे एक ज़माना है
अब पीढ़ियों को लिखा पढ़ा कर पंचतत्व में विलीन हो जाना है।।

©️Ankita Virendra Shrivastava IG ankitavshrivas

घर की चौखटमैं समय हूंविषय शून्यNews

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन में जल का महत्व

जीवन का प्रारंभ जल से हुआ,
जल के द्वारा ही वनस्पतियों आदि का निर्माण हुआ,
प्रकृति को सुंदर हरा भरा बनाये रखने के लिए जल की ही आवश्यकता होती है,
जीव जंतु भी जल से अपनी प्यास बुझाते है,
मानव के लिए जल बिन जीवन एक असंभव सा कार्य है,
हर वस्तु हर जगह जल की आवश्यकता है,
फसल उगाने से लेकर, बीज आरोपण ,
खाना बनाने से लेकर, मकान बनने तक,
बिजली से लेकर अनेकों संसाधनों का स्रोत जल है,
शरीर को स्वच्छ बनाने और किसी नई चीज़ का निर्माण के लिए आवश्यकता जल है,
जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है,
अतः हमें जल को संरक्षित कर हमेशा जल का सदुपयोग करना चाहिए,
और जल को व्यर्थ में बर्बाद होने से बचाना भी चाहिए।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

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किसानविचारआखिर क्यों?News Updates,

किसान

किसान

किसान

मैं कहने को तो एक किसान हूँ,
जो खेतों खलियानों में बीज बो कर फ़सल उगाए,
तपती धूप में भी जो खेतों में हल चलाये,
रूखी सूखी खाकर अपना और अपने परिवार का पोषण करें,
साहूकारों औऱ सरकारों के कर में अपनी ज़िंदगी बिताए,
पसीनें के साथ खून की बूंद तक गिरवीं रखवाए,
कृषि प्रधान कहें जाने वाले इस देश में किसानों का दर्द जानें कौन,
हर संकट की घड़ी में भी अनाज का उत्पादन करते है,
फिर भी कई बार भस्टाचार का शिकार बनते हैं,
जो दर्द सह नहीं पाते वे आत्महत्या के शिकार होते है,
जो जीवित रह जाते है वह भी मज़बूरी में अपना जीवन व्यतीत कर लेते है,
अनेकों कवियों की आवाज़ हूं मैं जो तालियों के शोर में कहीं गुम हो जाती है।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

विचारआखिर क्यों?विषय शून्यNews Updates

जातिवाद

जातिवाद

जातिवाद

बाँटते-बाँटते इतना बंट गए,
अब और कितना बांटोगे।
बीज लगाकर बबूल का
आम तो नहीं काटोगे।

इस रूढ़िवादी ने,
कितने का घर बर्बाद किया।
ऊंच-नीच, जात-पात कहकर
जीवन नरक वास किया।

नमक की बात है क्या?
पानी को भी तरसाता है।
औकात में रहकर बात कर
हर बात पे, जताता है।

आज़ाद भी है, कानून भी है
फिर भी रोज़ छपता है अखबारों में।
जान लेकर रूढ़िवाद ने
लटकाया है पेड़ों में।

भगवान ने तो बांटा नही
तुम अब कोई आग न लगाओ।
दिमाग से भी दिल से भी
जातिवाद का फ़र्क़ मिटाओ।
हम एक है , यह सोचकर।
उम्मीद का दीया जलाओ।
उम्मीद का दीया जलाओ।

©️Nilofar Farooqui Tauseef
FB, ig-writernilofar

क्योंकि हम इंसान हैं

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