झूठ और फरेब की दुनिया

झूठ और फरेब की दुनिया

झूठ और फरेब की दुनिया में,
इस रिश्ते में बस सच्चाई है,
तुम्हारे अंदर हजारो खामियां हो,
उसके लिए वो भी अच्छाई है।

बिना शर्तों पे दस्तकत किए ,
उसने सारी पूरी करके दिखाई हैं,
वक़्त से फर्क नहीं पड़ा उसे,
उसने हर हाल में यारी निभाई है।

बिना शर्तों के होता है,
मतलब बस एक दूसरे की खुशी से होता है,
और दोस्ती निभाने की शिद्दत है जिसमे,
उसके होते दिल कभी नहीं रोता है।

उसका होने से पहले कुंडली नहीं मिलाते ,
फिर भी रिश्ता उम्र भर निभाया जाता है,
रास्ते अलग हो जाए फिर भी,
जीत का ख्वाब साथ सजाया जाता है।

– अंजली कश्यप

झूठ और फरेब की दुनिया में

दोस्तीकुछ अंशपरिवार

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कुछ अंश

कुछ अंश

कुछ अंश

🌹किसी से बातचीत🍂🍃 के दौरान बातों के कुछ अंश🌹

उसने कहा वो🍂🍃 लोग भी अच्छे हैं,,

मैंने कहा,,,,,

मुझको तुम बुरे भी अच्छे लगते हो,,
झूठ बोलते हो मगर सच्चे लगते हो,,

माना खिले हैं सैंकड़ों फूल शाखों पर,,
मगर मुझमें उलझे तुम गुच्छे लगते हो,,

मुझको सारे जहाँ से क्या लेना देना,,
उन सच्चों में मुझे तुम सच्चे लगते हो,,

दुनिया कहती है बड़े चालबाज हो,,
मगर मुझे तुम नादान बच्चे लगते हो,,

मुझे तुमने तोड़ा बड़ी होशियारी से,,
पर सचिन तुम अक्ल के कच्चे लगते हो,,

कुछ अंश

©️ सचिन गोयल
सोनीपत हरियाणा
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मेरी स्वंयरचित🍂🍃 एक रचना

परिवारऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्ब

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मेरी डायरी

मेरी डायरी

मेरी डायरी में मैंने लिखा एक नया पैगाम
जो कमाया मेहनत से बस वही एक नाम
अंकित किए कुछ शब्द अपनी ख्वाइशों के
एक लड़की की दास्ताँ एक इकलौती संतान का काम।।

एक शरारती लड़की की उम्र
अंकिता के दिल का हाल
कभी खुशियाँ और गम
कभी अपनी नासमझी की मिसाल।।

मैंने लिखा दुनिया का सितम
किसी की आँखें जो थी नम
कभी हौसलों की कहानी
कभी किस्सों में सुने राजा और रानी
कभी दोस्तों की बातों को
कभी पापा जी के संवादों को
कभी घर के राशन का सामान
कभी अखबार की सुर्खियों का निशान
कभी मिली कोई उपलब्धि
कभी कहीं मिली कोई प्रसिद्धि
कभी किसी किताब का वर्णन
कभी जीवन का चिंतन।।

©️Ankita Virendra Narayan Shrivastava

IG ankitavshrivas or virendraankita

Dear Zindagi

Dear Zindagi

Dear Zindagi,

तुम भी बहुत थक जाती होगी ऐसे नाकारात्मकता का बोझा उठा जो तुम्हे हमेशा कोसते हैं कि उनके न चाहने पर भी तुम उन्हें वो चीज दे रही जो बहुतों के पास है ही नहीं। तुम्हें नही समझ पाते बहुत लोग , आखिर तुम भी तो कितनी दर्दों की पराकाष्ठा से गुजर रोज खुद को थोड़ा-थोड़ा कम करके हमारे साथ जी रही हो। सुख और दुःख (किसी व्यक्ति का आना जाना ) तो प्रकृति का नियम है, हम किसी के अनुचित व्यवहारों की सजा तुमको क्यों दे। तुम्हारा भी तो ह्रदय टूट कर बिखर जाता होगा ये सब जब तुम पर आरोपित करते होंगे वो गलतियों का बोझ जो तुमने कभी की ही नहीं होती हैं । हाँ मुझे तुमसे कोई शिकायत नही। तुम जैसी हो बस वैसी ही रहना। तुम्हारा होना और बस होने का एहसास मात्र काफी है मेरे लिए। तुम एकमात्र हो जो सोचती हो मेरे लिए, जो जीती है मेरे लिए । वरना कभी सुना है किसी के मर जाने पर कोई मरा हो उसके साथ फिर चाहे कोई किसी की सम्पूर्ण दुनिया ही क्यों ना हो। पर हाँ तुम तो खुद को भी खतम कर देती हो हमारे ही साथ। अब मेरा या किसी का ये कहना कि ( इस जिन्दगी से बेहतर है कि ये ना होती) उतना ही गलत है जितना किसी का दिल दुखाना और हम चाहकर भी ये पाप कभी नहीं कर सकते। आखिर तुम हो मेरी अपनी ही। और “अपने” बचे ही कहाँ है इन परायों की दुनिया में। तुम कभी खुद को किसी से कम मत समझना और कभी मत समझाना किसी को अपनी अहमियत। जिन्दगी में लोगों के आने और चले जाने से थोड़ी ना सब खतम हो जाता है। तुमने तो और भी बहुत कुछ दे रखा है ना। खैर तुम भी खुश रहा करो और छोड़ दिया करो लोगों को उनके हाल पर। तुम सच में बहुत खूबसूरत हो, इतनी कि शब्द ही नहीं तुम्हे बयां कर पाने को। और तुमसे बस इतना ही कहना है…. 🅸 🅻🅾️🆅🅴 🆈🅾️🆄… 💟

✍🏻साक्षी😊
@_sakku_writes

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विश्वगुरु भारत बदल गया है

भारत

अब इस दुनिया में कितना कुछ बदल गया है
भारत भी ना जाने कैसा था कैसा बन गया है
अब फिर ये ख़ुद को दिला पाएगा वो महारत?
क्या.!! क्या पहले जैसा बन जाएगा भारत

धर्म के ठेकेदारों ने इसे क्षत विक्षत कर डाला है
शास्त्री और नेहरू ने तो इसे नाजों से पाला है
ये देश आज विकट परिस्थितियों में फस गया है
ना जाने इसके वासियों को क्या हो गया है
सब गुमसुम हैं, कुछ बुझे बुझे से रहते हैं
वो मस्ती भरी बातें भी तो अब कहां करते हैं
आज फ़िर से ये सारे फ़ूल मुरझाए हैं
परेशानीयों से भी तो बहुत घबराये हैं
ये तो ख़ैर तात्कालिक विपदा है
जिसका जो कुछ था वो अता है

अब हम लोग भी तो थोड़े हार गए हैं
विश्वगुरु भारत के सपने को निराधार मान गए है
उम्मीद छोड़ कर आशाओं में जी रहे हैं
प्रयास छोड़ कर धाराओं मे बह रहे हैं
शायद हम ख़ुद को विफल मान रहे हैं
ऐ ख़ुदा ये हम किस दुनिया में आ गए हैं

यहां के लोग तो इशारों में भी खेल सकते हैं
चाहे जीरो हो उसपे भी कई दिन बोल सकते हैं
यहाँ के ‘बोस’ ‘शेखर’ और ‘भगत’ निराले हैं
इनके जैसे और ना जाने कितने रखवाले हैं
ये वो हैं जो फ़ाँसी को झूला समझ झूल गये हैं
अपनी जवानी में ही इस धरती में झूम गए हैं

यहां विवेकानंद के रूप में विवेक और आनंद हुए हैं
‘लाला’ की तलवार पे ना जाने कितने शीश चढ़ गए हैं
और अभिनंदन का तो अभिवादन करने के लायक नहीं हूँ
जितना लिख रहा हूँ उसका भी तो सहायक नहीं हूँ
तो क्या अब यहीं थम जायेगा हमारा भारत
क्या अब पुनः विश्वगुरु बन पाएगा भारत
क्या मिल पायेगी फ़िर पहले जैसी शहादत

क्या पहले ज़ैसा बन जाएगा भारत
क्या पहले ज़ैसा बन जाएगा भारत….

जय हिंद

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

 

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