हालात

हालात
ये कहानी है मुकेश एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का और तमन्ना एक हाई सोसायटी की लडकी।

यूं तो दोनों थे बिल्कुल भी उलट जैसे नदी के दो किनारे। जहां मुकेश बनारस का रहने वाला एक शांत स्वभाव वाला लेकिन चुलबुला लड़का था तो वहीं तमन्ना लखनऊ की रहने वाली एक बेबाक लेकिन शालीन लडकी।
हर जवान प्रेम कहानी की तरह ये कहानी भी शुरू हुई एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से, जहां दोनों साथ पढ़ने आते थे या यूं कहे कि अपने दोस्तो का उनकी प्रेम कहानी में साथ निभाने आते थे।

यूहीं मिलते जुलते दोनों में बाते शुरू हुई और ठीक प्रकृति के नियम की तरह दोनों एक दूसरे के लिए लगाव महसूस करने लगे।


हाय हैलो वाली बातचीत धीरे धीरे देर रात तक होने वाली बातों में बदली और बातें मुलाकातों में।

धीरे धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा और तभी दोनों की ग्रेजुएशन की पढाई खत्म हो गई और तमन्ना आगे की पढ़ाई के लिए कलकत्ता चली गई और मुकेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बनारस में रहा। कुछ इस तरह वो दोनों प्यार करने वाले दूर हो गए। मगर इस दूरी से उनकी मोहब्ब्त कम नहीं हुई बल्कि इस दूरी ने दोनों की मोहब्ब्त को और बढ़ा दिया।


जल्दी ही दोनों के घर वालो को भी उनकी मोहब्बत का पता चल गया और शुरुआत में तमन्ना के घरवाले इस रिश्ते के लिए राज़ी थे मगर मुकेश के घरवाले रिश्ते के लिए राज़ी नहीं थे लेकिन फिर दोनों के मनाने के बाद मुकेश के घर वाले भी उन दोनों की शादी के लिए मान भी गए दोनों की सगाई भी कर दी गई।

तमन्ना की पढ़ाई पूरी होते ही दोनों की सगाई कर दी जाती है और सगाई के कुछ महीनों बाद ही मुकेश की एक अच्छे पद पर नौकरी लग गई। दोनों की शादी का समय पास आ रहा था और दोनों ही अपनी शादी को लेकर बहुत ही उत्साहित थे।

उन दोनों की सगाई के कुछ समय बाद तमन्ना के माता पिता ने उसकी बड़ी बहन श्रुति की भी शादी कर दी थी, लेकिन धीरे धीरे श्रुति के पति के व्यवहार में बदलाव आने लगा और वो उसे रोज मारने पीटने लगा। जिससे की एक दिन अचानक रहस्यमय तरीके से उसकी मौत हो जाती है, या फिर यूं कहे के उसके पति के हाथों ही उसकी मौत हो जाती है।

इस घटना ने तमन्ना के माता पिता को पूरी तरह से हिला दिया था। अब वे लव मैरिज के बिल्कुल खिलाफ हो गए थे क्योंकि उनकी लाडली बेटी की जान उसके ही आशिक़ ने ले ली थी। तमन्ना की सगाई मुकेश के साथ हो गई थी और उन्हें मुकेश अपना सा भी लगता था लेकिन रिश्तेदारों से ये न देखा गया और उन्होंने तमन्ना के माता पिता के मन में मुकेश के लिए जहर भरना शुरू कर दिया।

धीरे धीरे उनकी बातो में तमन्ना के पिता आ गए और मुकेश से तमन्ना की शादी तोड़ने की बात सोचने लगे लेकिन वो अपनी बेटी की खुशी भी चाहते थे मगर जैसे ही तमन्ना को इस बात की भनक लगी कि उसके घरवाले उसकी शादी तोड़ने के बारे में सोच रहे है तो उसने अपने घरवालों के ख़िलाफ़ बगावत कर दी। दोनों का प्यार बिल्कुल सच्चा था और ये बात तमन्ना की मां भी बखूबी जानती थी।


लेकिन अपनी बड़ी बेटी की मौत से वो भी दुःखी थी। तो उन्होंने अपने दिल की बात मुकेश से जा के कह दी और उन्होंने मुकेश से उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी चीज मांग ली। उन्होंने मुकेश से कहा कि वो तमन्ना से खुद ही रिश्ता तोड़ दे लेकिन मुकेश भी ये बात जानता था कि तमन्ना उससे कितना प्यार करती है। वो कभी उसे नहीं छोड़ेगी, तब उसने अपने प्यार का बलिदान देने के लिए एक योजना बनाई जो की उसे तमन्ना की नज़रों में गिरा दे और वो खुद ही उसे छोड़ कर अपने माता पिता की पसन्द के लड़के से शादी कर ले।


उसने अपने एक दोस्त से तमन्ना को ये झूठी खबर दिलवाई की वो उसे धोखा दे रहा है। मगर फिर भी तमन्ना को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ और उसने ये बात खुद मुकेश से पूछी। जिसे मुकेश ने पहले नकार दिया क्योंकि वो जानता था कि तमन्ना इतनी आसानी से उससे दूर नहीं जाएगी। तब मुकेश ने अपने दोस्त पवन की मदद से कुछ ऐसा किया जिसने तमन्ना को उससे दूर कर दिया। उसने अपने घर पर दो लडकियो को बुलवाया और अबकी बार पवन से उसे फोन करवाया के अगर उसे यकीन न हो तो वो उसके घर जाकर देख ले कि उसकी मोहब्ब्त उसका होने वाला जीवनसाथी कैसा है और वो उसकी पीठ पीछे क्या कर रहा है।


जैसे ही तमन्ना मुकेश के घर पहुंचती है तो वो उसे उन लडकियो से साथ बिस्तर में देख कर टूट जाती है और मुकेश को खूब भला बुरा बोलकर और अपनी सगाई तोड़कर अपने घर आती है और अपनी मां से लिपट कर खूब रोती है।

मुकेश अपनी मोहब्बत का बलिदान तो कर देता है लेकिन वो तमन्ना को डोली में बैठकर जाते देख खुद को सम्भाल नहीं पाता है और वो शराब के नशे में रहने लगता है। एक दिन शराब पीकर घर लौटते वक़्त उसकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता है जिसमें उसके सर पर काफी गहरी चोटें आती है और वो पागल हो जाता है मगर इस पागलपन में भी वो अपनी मोहब्ब्त को नहीं भूलता है।

कुछ महीने बाद तमन्ना अपने पिता की पसंद के लड़के से शादी कर लेती है। लेकिन इस बार एक बार फिर से तमन्ना के पिता का फैसला गलत साबित होता है। मुकेश से रिश्ता तोड़कर उन्होंने जिस लड़के से तमन्ना की शादी की थी वो और उसके परिवार वाले दहेज के लालची होते है। वे लोग शादी के कुछ महीनों बाद ही तमन्ना को दहेज के लिए मारने पीटने लगे जिसकी वजह से उसकी मौत हो जाती है। एक बार फिर से उनके गलत फैसले की वजह से उनकी लाडली बेटी की जान चली गई।

तमन्ना की मौत की खबर को अखबार में पढ़ कर मुकेश ठीक हो जाता है और गुस्से में तमन्ना कर पिता को फोन करके खूब अनाप शनाप बोलता है। लेकिन जब उसे अपनी गलती का एहसास होता है तो वो उसके पिता से माफी मांगने की बजाए अस्पताल की बालकनी से कूद कर आत्महत्या कर लेता है।

तमन्ना की मौत के बाद मुकेश की बातों ने तमन्ना के पिता को अंदर तक झकझोड़ दिया था। और जब उन्हें मुकेश की मौत की भी खबर मिली तो उन्हें और गहरा सदमा पहुंचा। इस सदमे से उसके पिता को भी दिल का दौरा पड़ जाता है और उनकी भी मौत हो जाती है।

कुछ इस तरह से हालातो ने एक बार फिर से दो प्यार करने वाले को जुदा तो किया ही लेकिन साथ ही साथ तीन बेकसूर जाने भी ले ली। ©️ Ultimate loser
Ultimate Loser

Entry No. THG017

Date: 27rd Oct 2020

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परिवार

परिवार

हां वो ही परिवार था

आंखें खुली थी मध्दम-मध्दम,
मध्दम उंगली हिलती थी
दो जने घर में दिखते, जो मेरा संसार था।

कुछ बड़ा हुआ, कुछ होश लिया कभी जगता था,

कभी सो लिया ना दिल पर कोई वार था ।

कुछ और बढ़ा, चलना सीखा गिरते पड़ते, बढ़ना सीखा
गिरने से मेरे जो अक्सर, गिरता कई – कई बार था।

स्कूटर से स्कूल में जाना
मां की गोद में वापस आना
आकर घर में उधम मचाना, ही खुशियों का सार था।

वो कॉलेज के दिनों की मस्ती
कोई फिकर ना दिल में बसती
पिता के ही कंधों पर तब तो घर का सारा भार था।

वो पहली जॉब की खुशी मनाना
वीकेंड्स में घूमने जाना
जीता हुआ महसूस कराया,
ना लगा कभी मुझे हार था।
हां वो ही परिवार था

NAMAN KUMAAR JAIN
@ naman9203

ऐसा परिवार अब कहाँकुटुम्बकाल का चक्रव्यूहNews

ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

ऐसा परिवार अब कहाँ

वो भी क्या ज़माना था।
एंटीना चारों तरफ घुमाना था।
छत पे चढ़कर, बाबा चिल्लाते थे
ठीक हुआ या नही, दोहराते थे
हम भी चिल्ला – चिल्ला कर
हाँ या नही बताते थे।
महाभारत, श्रीकृष्ण और चित्रहार
था एक टिवी पर लगता था देख रहा पूरा संसार
दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची या मामा-मामी
देखते थे सब एक साथ रंगोली या मोगली

वक़्त क्या ऐसा बदला बदल गयी सब तस्वीर
फ़िज़ा बदली घर बदला बदल गयी तक़दीर
रिमोट के झगड़े भाई-बहन के बीच सिमट गई
वक़्त के हाथों, फूल सारे एक गमले में लिपट गयी
हम-तुम और टीवी ही घर में रह गए
जो थे रिश्ते सारे वो कहीं बह गए

जो दिल चाहिए हर पल सब टीवी पे मिल जाता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है
जो मज़ा पहले आता था, अब कहाँ आता है

ऐसा परिवार अब कहाँ

©️Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

कुटुम्बकाल का चक्रव्यूहघर की चौखटNews

घर की चौखट

घर की चौखट

अब सुबह चिड़िया घर की चौखट पर आती है,
सुबह की भोर में सूरज का प्रकाश घर के आँगन में आता है,
अब हर रोज सब साथ मिलकर बैठते है,
हर शाम अब सभी लोग आँगन की हवा एक साथ लेते है,
वातावरण भी अब काफ़ी खुशमिजाज लगता है,
शाम को अपने घर जाती हुई चिड़ियों का झुंड आसमान में दिखता है,
शाम को अब आसमान में विभिन्न एक समान रंग दिखते है,
चाँद, तारों और हवा का सब मिल अब आंनद लेते है ,
परिवार के सभी लोग अब एक दूजे को वक़्त देते है,
गंगा, यमुना की जलधारा भी अब पहले से स्वच्छ लगती है,
प्रदूषण का अब नामोनिशान सा मिटता हुआ लगता है,
अब छत पर सभी पड़ोसी अपने आँगन में नज़र आते है,
दोस्त, रिश्तेदार अब फोन पर हालचाल पूछते है,
सुबह, शाम सब साथ मिल रामायण, महाभारत देखते है,
किचिन में अब सब साथ मिल पकवान बनाते है,
रात में सब मिलकर खाना भी खाते है,
बच्चे और बड़े लूडो में साथ सारा दिन लगे रहते है,
अब छत पर हर रोज़ सबके संग खेल होते है,
देखों अब दूसरों के घर न मिलकर भी लोग दिलों के करीब होने लगें है,
अब परिवार के सभी लोग एक दूसरे पर ध्यान रख ख़्याल करते है,
प्रकृति भी अब ख़ुद को संभाल पा रहीं है,
बस अब कुछ लोग है जो विषैले पदार्थ बनाकर,
अपना और पृथ्वी के विनाश के मार्ग बना रहे है,
हमें एक साथ मिलकर सबका साथ देना होगा,
पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त बनाना ही होगा,
यह इंसान अब और कितनी गलतियां और करेगा,
गर जो गलतियों को न सुधारा तो स्वयं सहित पूरी सृष्टि के विनाश का कारण होगा ।

– आलोक कुमार राठौर
@Ehsaas_Ki_Awaaz

मैं समय हूंआईनापृथ्वी माँNews

किसान

किसान

किसान

मैं कहने को तो एक किसान हूँ,
जो खेतों खलियानों में बीज बो कर फ़सल उगाए,
तपती धूप में भी जो खेतों में हल चलाये,
रूखी सूखी खाकर अपना और अपने परिवार का पोषण करें,
साहूकारों औऱ सरकारों के कर में अपनी ज़िंदगी बिताए,
पसीनें के साथ खून की बूंद तक गिरवीं रखवाए,
कृषि प्रधान कहें जाने वाले इस देश में किसानों का दर्द जानें कौन,
हर संकट की घड़ी में भी अनाज का उत्पादन करते है,
फिर भी कई बार भस्टाचार का शिकार बनते हैं,
जो दर्द सह नहीं पाते वे आत्महत्या के शिकार होते है,
जो जीवित रह जाते है वह भी मज़बूरी में अपना जीवन व्यतीत कर लेते है,
अनेकों कवियों की आवाज़ हूं मैं जो तालियों के शोर में कहीं गुम हो जाती है।

✒️Alok Santosh Rathaur
@ehsaas_ki_awaaz

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