माँ तू ही सब कुछ हैं

माँ तू ही सब कुछ हैं

माँ तू ही सब कुछ हैं

शिव की शक्ति तू,
विष्णु की लक्षमी तू।

ब्रह्मा की सरस्वती तू,
इंद्र की इंद्राणी भी तू।

काली तू,
महाकाली तू।

अंत भी तू,
आरंभ भी तू।

अश्रु भी तू,
आनंद भी तू।

जगतजन्नी तू,
जगतमाता भी तू।

माता तू,
विधाता तू।

प्राण भी तू,
स्वांस भी तू।

जीवन तू,
मृत्यु भी तू।

जीवन का आधार भी तू,
जीवन का संहार भी तू।

काल भी तू,
महाकाल भी तू।

जिंदगी की डोर भी तू,
जिंदगी की आखिरी उम्मीद भी तू।

कृष्ण की राधिका प्यारी भी तू,
कृष्ण की रूकमणी भी तू।

राजकुमारी भी तू,
रानी भी तू।

श्राप भी तू,
आशीर्वाद भी तू।

कर्म भी तू,
धर्म भी तू।

इच्छा भी तू,
अनी इच्छा भी तू।

भकित भी तू,
शक्ति भी तू।

आशा भी तू,
निराशा भी तू।

विचार भी तू,
निष्कर्ष भी तू।

ज्ञान भी तू,
अज्ञान भी तू।

माँ तू ही धनवान हैं,
माँ तू ही सब कुछ हैं।

©DEEPSHIKHA AGARWAL!

STOP CHILD ABORTION

Bachpan (In Indian Language)

Dear Mummy

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माँ

माँ

मंज़िल ए जुस्तजू में भटकता रहा,
मंजिल तो यहां थी।
आज फिर अकेला था,
मां तुम कहां थीं।।
मेरे दुखों का सबेरा तुम,
मेरे तबस्सुम का बसेरा तुम,
अगर गिरा मैं तर्स से तो मेरे नदीम तुम,
मेरी फ़क्र में करीम तुम,
मेरी फ़िक्र में रहीम तुम,
फ़ज़ल हो तुम,
मुझमें सजल हो तुम,
तुम्हारे बिन सारी उम्मीद तजां थीं।
आज फिर अकेला था,
मां तुम कहां थीं।।

By: Yogesh sharma
 

शब्दो का आईना माँ,

शब्दो का माइना माँ

देखना चाहू खुद को तो आईना माँ……

रूखी सी इस ज़िन्दगी को संवारती माँ,
बैठ कर समाने प्यार से निहारती माँ….

जीवन का सार भी माँ,
मेरा सारा संसार भी माँ….

ज़िन्दगी की परिभाषा माँ,
जो खत्म न हो उम्र भर वो इश्क बेइंतेहा सा माँ…………

-सन्नी रोहिला

 

मैं देखता हूं

माँ

Mother

अरसा हो गया उसके हाथ से निवाला खाये हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान ऐसी जवानी
उस ममता के लिए।
वर्षों हो गए उसकी गोद में सोए हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान सही जवानी
उस ममता के लिए
काश लौटा दे कोई वो बचपन और माँ का ढेर सारा प्यार ,
ऐसी सैकड़ों जवानी कुर्बान
उस ममता के लिए।
©sapan agrawal

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माँ, मैं और माँ

MINE MOTHER

यूँ कि माँ पर कुछ बोलने के लिए तो अभी छोटा हूँ
पर माँ कहती है कि मैं सिक्का उसका खोटा हूँ
माँ पर कुछ टिप्पणी करूँ इतना अल्पज्ञ नहीं हूँ
पर माँ के लिए कुछ ना बोलू इतना मर्मज्ञ नहीं हूँ

तो चलो आज एक दूजे से कुछ राज कहते हैं
बात जब माँ की है तो जनाब चुप क्यूँ रहते हैं

अब माँ तो महान है समता और संतुष्टि का ज्ञान है
माँ के बिना ये घर वीरान लगता है
कोई जश्न तो जैसे कोहराम लगता है
माँ!!! माँ तो प्यार का सागर है
कह दूँ तो ममत्व का गागर है

वो हँसमुख है, भोली है, वो करुणानिधान है
संसार की सभी आभाओं का अनुपम सम्मान है
वो कभी सीता,पार्वती, मीरा, शबरी, राधा रानी है
तो कभी पद्मिनी, हाड़ा, टेरेसा और लक्ष्मीबाई महारानी है

उसके तो हर शौर्य की बात ही निराली है
इतिहास जो देखू तो उसकी कई कहानी है
अरे ये तो इतिहासों मे भी अमर रह गयी है
और बाहुबली की तलवार भी तो यहीं झुक गयी है

चोट ग़र मुझे लगे तो रोती है वो
दर्द जो मुझे हो तो सहती है वो
पर शायद हम अपनी जिम्मेदारियां भूल जाते हैं
जरा उम्र क्या ढ़ली उसे वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं
ख़ैर ये तो बहुत ही शर्मनाक है
अरे बेग़ैरत वही तो तेरी ‘नाक’ है

जिसकी गोद मे सर रखने मात्र से सारी थकान मिट जाती है
जिसके कंगन की आवाज से हर दीवार झंकृत हो जाती है
वही तो समस्त प्रतिभाओं की धनी माँ अंबे की वरदायी है
माँ के रूप में वो साक्षात देवी का रूप धर आयी है

इस महान विरली आभा को मैं अभिवादित करता हूँ
नियमित इसके चरणों मे ये शीश नवादित करता हूँ

अरे इसके सामने तो वो देवता भी मौन हैं
इसे क्रोध आए तो बोलता ही कौन है
ये अटल है, अचल है, अविवादित है
ये माँ है साहब, मेरे घर का आदर है

माँ पर लिखते हुए शब्द बड़ी मुश्किल से चुन पा रहा हूँ
सोच रहा हूँ क्या सच में इस शब्द में रंग भर पा रहा हूँ??
तो अब इस बात का भी मैं परीक्षित बन गया हूँ
पर शायद मैं इसमे भी कहीं असफल नजर आ रहा हूँ

माँ पर मैं क्या लिखूँ साहब मेरी हैसियत क्या है
बस इतना बता दे माँ तेरी ख़बर-ए-खैरियत क्या है
तू खुश है, तंदरुस्त ये हमेशा जताती है
चाहे कितना भी दुख हो हमेशा छुपाती है
पर मैं तो तेरा ही बेटा हूँ माँ मैं जान जाता हूँ
तेरी हसीं के पीछे छिपे दर्द को पहचान जाता हूँ

इस बार कोशिश की है थोड़ा नाम कमाने की
तेरे दिए हाथों से तेरा संसार सजाने की
तू चिंता मत करना माँ क़ामयाब होके लौटूंगा
तू बस आशीर्वाद दे मैं नायाब होके लौटूंगा

अब बस इतना कहके तुझसे विदा लेता हूँ
हाँ याद आती है तेरी पर अब रो लेता हूँ

और हाँ माँ अब तेरी बात मान ली है मैंने
वो आयशा!” उसकी सच्चाई जान ली है मैंने
फ़िर तोड़ दी है कलम और फाड़ दी है डायरी
कोई सुनता ही नहीं तो क्या सुनाऊँ शायरी

बस यही कुछ राज़ हैं जिन्हें आज फ़िर कहता हूँ
माँ कहती है कि मैं उसका खोटा सिक्का हूँ…….

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

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सुनो माँ

सुनो माँ

माँ से कीए कई वादे भी तो हैं-
उस से जुड़ी कई यादें भी तो हैं,
यूँ तो खो जाऊँ इस दुनियाँ की भीड़ मे मैं– मुझे बचाके रखने वाली उसकी फरियादें भी तो हैं…..

]कोई परेशानी मेरे निकट हो-
या कोई बात जो विकट हो,
मैं माँ को ही खोजता बेहाल आतुर-सा– माँ गले लगा लेती मुझे देख अपना लाल व्याकुल-सा…..

मैं हो जाऊँ कभी उम्र मे बड़ा या हो
जाऊँ कभी अबोध बालक-
मेरे हर तर्क को समझती है और देखती
है मेरे हर नाटक,
तुझसे बिछड़कर माँ- अब रहूँ भी तो कहां रहूँ मैं– तू ही तो खुदा है मेरी- अब माँ कहुँ भी तो कहुँ किसे मैं…..

तेरे निष्पाप अधरों से मेरा नाम लेना हो-
या अपने चुंबन से कभी मुझे इनाम देना
हो,
माँ तेरे आँचल को पकड़ कर- मैं एक शहंशाह बन जाता हूँ– सिमट जाता हूँ तेरी गोद में- और चैन की नीन्द सो जाता हूँ …..

माँ तू वक़्त वक़्त पर मुझे आवाज देती
रहा कर-
मैं अक्सर दुनियाँ की राहों में खो जाता
हूँ,
देखता हूँ तेरी भोली सुरत की तरफ मैं– और फ़िर से नया हो जाता हूँ…..
✍kabiryashhh✍

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