पृथ्वी माँ

पृथ्वी माँ

एक खत हम सबकी सर्वश्रेष्ठ माँ के लिए……… ( पृथ्वी माँ )

माँ…… मैंने सबको कहते हुए सुना है कि माँ हमेशा हम बच्चों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है। माँ स्वयं से भी ज्यादा अपने बच्चों का ख्याल करती है फिर वो बच्चे चाहे कितनी भी गलतियाँ क्यों ना करें। माँ क्षमा और प्रेम की सक्षात मूर्ति होती है।

माँ….. मैं मानती हूँ कि तेरे बच्चों ने तुझे हमेशा इतने कष्ट दिये हैं कि वो अगणनीय हैं। तेरे बच्चों ने तेरे व्यक्तित्व को अपने स्वार्थ के कारण धूमिल कर दिया। ये भी जानती हूँ कि तुझे बहुत बुरा लगा होगा और ये भी कि जब तू रो रही होगी तो तुझे सम्भालने वाला कोई नहीं रहा होगा। तू अपने ही आंचल से अपना अश्रु नहीं पोंछ पायी होगी, क्योंकि शायद अगर तू ऐसा करती तो हमारा सन्तुलन बिगड़ जाता और शायद हमारा कहीं दूर-दूर तक मनुष्य का अस्तित्व ना रह जाता।

माँ……. मुझे ये भी पता है कि हमने तेरा दिल तोड़ा ही नहीं अपितु चकनाचूर कर दिया।
माँ……. हम सब तेरे अपराधी हैं और अपराध इतना बड़ा है कि क्षमा किस मुँह से माँगी जाए समझ नहीं आ रहा।
माँ…… तू तो अपने बच्चों की विवशता जानती थी ना कि वो विज्ञान पर इतना आश्रित था कि तेरे ह्रदय पर कब आघात पर आघात किया उसे स्वयं नहीं मालूम है। पर माँ तू तो माँ हैं ना और शास्त्रों में माँ को ईश्वर से सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। माँ हम जानते हैं कि ईश्वर भी हमारी इस गलती को क्षमा नहीं करता पर हम तुझसे हक से क्षमा मांग सकते हैं। अपने हर उस गलती कि जो हमने की है और मुझे पता है तूने बिना कहे ही क्षमा कर दिया होगा।

क्योंकि तू माँ है ना और हम तेरे नादान बच्चे…..

✍🏻साक्षी🙂
@_sakku_writes

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