माँ

Mother

अरसा हो गया उसके हाथ से निवाला खाये हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान ऐसी जवानी
उस ममता के लिए।
वर्षों हो गए उसकी गोद में सोए हुए
अगर यही जवानी है तो कुर्बान सही जवानी
उस ममता के लिए
काश लौटा दे कोई वो बचपन और माँ का ढेर सारा प्यार ,
ऐसी सैकड़ों जवानी कुर्बान
उस ममता के लिए।
©sapan agrawal

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माँ, मैं और माँ

MINE MOTHER

यूँ कि माँ पर कुछ बोलने के लिए तो अभी छोटा हूँ
पर माँ कहती है कि मैं सिक्का उसका खोटा हूँ
माँ पर कुछ टिप्पणी करूँ इतना अल्पज्ञ नहीं हूँ
पर माँ के लिए कुछ ना बोलू इतना मर्मज्ञ नहीं हूँ

तो चलो आज एक दूजे से कुछ राज कहते हैं
बात जब माँ की है तो जनाब चुप क्यूँ रहते हैं

अब माँ तो महान है समता और संतुष्टि का ज्ञान है
माँ के बिना ये घर वीरान लगता है
कोई जश्न तो जैसे कोहराम लगता है
माँ!!! माँ तो प्यार का सागर है
कह दूँ तो ममत्व का गागर है

वो हँसमुख है, भोली है, वो करुणानिधान है
संसार की सभी आभाओं का अनुपम सम्मान है
वो कभी सीता,पार्वती, मीरा, शबरी, राधा रानी है
तो कभी पद्मिनी, हाड़ा, टेरेसा और लक्ष्मीबाई महारानी है

उसके तो हर शौर्य की बात ही निराली है
इतिहास जो देखू तो उसकी कई कहानी है
अरे ये तो इतिहासों मे भी अमर रह गयी है
और बाहुबली की तलवार भी तो यहीं झुक गयी है

चोट ग़र मुझे लगे तो रोती है वो
दर्द जो मुझे हो तो सहती है वो
पर शायद हम अपनी जिम्मेदारियां भूल जाते हैं
जरा उम्र क्या ढ़ली उसे वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं
ख़ैर ये तो बहुत ही शर्मनाक है
अरे बेग़ैरत वही तो तेरी ‘नाक’ है

जिसकी गोद मे सर रखने मात्र से सारी थकान मिट जाती है
जिसके कंगन की आवाज से हर दीवार झंकृत हो जाती है
वही तो समस्त प्रतिभाओं की धनी माँ अंबे की वरदायी है
माँ के रूप में वो साक्षात देवी का रूप धर आयी है

इस महान विरली आभा को मैं अभिवादित करता हूँ
नियमित इसके चरणों मे ये शीश नवादित करता हूँ

अरे इसके सामने तो वो देवता भी मौन हैं
इसे क्रोध आए तो बोलता ही कौन है
ये अटल है, अचल है, अविवादित है
ये माँ है साहब, मेरे घर का आदर है

माँ पर लिखते हुए शब्द बड़ी मुश्किल से चुन पा रहा हूँ
सोच रहा हूँ क्या सच में इस शब्द में रंग भर पा रहा हूँ??
तो अब इस बात का भी मैं परीक्षित बन गया हूँ
पर शायद मैं इसमे भी कहीं असफल नजर आ रहा हूँ

माँ पर मैं क्या लिखूँ साहब मेरी हैसियत क्या है
बस इतना बता दे माँ तेरी ख़बर-ए-खैरियत क्या है
तू खुश है, तंदरुस्त ये हमेशा जताती है
चाहे कितना भी दुख हो हमेशा छुपाती है
पर मैं तो तेरा ही बेटा हूँ माँ मैं जान जाता हूँ
तेरी हसीं के पीछे छिपे दर्द को पहचान जाता हूँ

इस बार कोशिश की है थोड़ा नाम कमाने की
तेरे दिए हाथों से तेरा संसार सजाने की
तू चिंता मत करना माँ क़ामयाब होके लौटूंगा
तू बस आशीर्वाद दे मैं नायाब होके लौटूंगा

अब बस इतना कहके तुझसे विदा लेता हूँ
हाँ याद आती है तेरी पर अब रो लेता हूँ

और हाँ माँ अब तेरी बात मान ली है मैंने
वो आयशा!” उसकी सच्चाई जान ली है मैंने
फ़िर तोड़ दी है कलम और फाड़ दी है डायरी
कोई सुनता ही नहीं तो क्या सुनाऊँ शायरी

बस यही कुछ राज़ हैं जिन्हें आज फ़िर कहता हूँ
माँ कहती है कि मैं उसका खोटा सिक्का हूँ…….

✍🏻 Chhayank Mudgal ✍🏻

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DEAR MAA

Dear Mom

Dear Maa,
My words can’t honestly express what I am feeling for you and my love for you. I know you have always been there for me.
You always have shown me the right way.
No matter what,
I’ll always be your little girl who needs you in every good or bad,right or wrong,I always need you.
You know mummy, you are the only best friend I’ld have ever hope for.
You’ve taught me everything.
Thanks is just a word but really thanks for being with me always.
Thanks for accepting me as I am .
Thanks for everything you’ve done for me and continue to do.
I’m happy to have you as my mother.

Thank you for your unconditional love and support Maa

By:- Amruta Patil

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